विश्व कैंसर दिवस: अस्पताल के बिल से 3 गुना ज्यादा होता है कैंसर का खर्च, ऐसे करें सही प्लानिंग

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विश्व कैंसर दिवस: बढ़ते मेडिकल खर्चों के कारण अब साधारण हेल्थ इंश्योरेंस कैंसर के इलाज के लिए पर्याप्त नहीं है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, अस्पताल के बिल के अलावा भी कई छिपे हुए खर्च होते हैं. वित्तीय सुरक्षा के लिए ₹20-30 लाख का बीमा, क्रिटिकल इलनेस कवर और समय पर स्क्रीनिंग अनिवार्य है.

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विश्व कैंसर दिवस के मौके पर जहां एक ओर बीमारी से बचाव और जल्द पहचान को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर एक बड़ी चिंता भी सामने आ रही है. हेल्थ एक्सपर्ट्स और बीमा कंपनियों का मानना है कि भारत में मिलने वाली सामान्य हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी अक्सर कैंसर के भारी-भरकम खर्चों को पूरा करने में कम पड़ जाती हैं. बढ़ते मेडिकल खर्च, लंबे समय तक चलने वाला इलाज और अस्पताल के अलावा होने वाले अन्य खर्चे परिवारों की बचत पर भारी पड़ रहे हैं.

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इलाज का बढ़ता खर्च: ₹5 लाख से ₹30 लाख तक का बोझ

केयर हेल्थ इंश्योरेंस के आंकड़ों के मुताबिक, कैंसर के इलाज का खर्च बीमारी की स्टेज पर निर्भर करता है.

  • शुरुआती स्टेज: इलाज का खर्च आमतौर पर ₹5 से ₹7 लाख के बीच होता है.
  • एडवांस स्टेज: जटिल मामलों में यह खर्च ₹20 से ₹30 लाख तक पहुंच सकता है.

कैंसर का इलाज महीनों चलता है जिसमें बार-बार अस्पताल जाना, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी शामिल होती है. स्तन (Breast), मुँह (Oral) और ब्लड कैंसर जैसे मामलों में अक्सर बीमा की राशि कम पड़ जाती है. इसीलिए अब एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कम से कम ₹15 से ₹25 लाख का बीमा होना जरूरी है.

बीमा की लिमिट: अस्पताल के बिल से आगे की सोचें

पॉलिसीबाजार के सिद्धार्थ सिंघल बताते हैं कि ज्यादातर पॉलिसी अस्पताल में भर्ती होने, सर्जरी और डायग्नोस्टिक्स का खर्च तो उठाती हैं, लेकिन कैंसर का असर अस्पताल के बिलों से कहीं ज्यादा होता है. अक्सर इलाज के दौरान मरीज की कमाई रुक जाती है और घर के खर्च बढ़ जाते हैं. इसके लिए ‘क्रिटिकल इलनेस’ (Critical Illness) कवर या कैंसर-विशिष्ट राइडर लेना फायदेमंद होता है, जो बीमारी का पता चलते ही एकमुश्त राशि का भुगतान करते हैं.

पिनेकल लाइफ साइंस के मैनेजिंग डायरेक्टर विश्व सांवला के अनुसार, इलाज का असली खर्च अस्पताल के बिल से 2.5 से 3 गुना ज्यादा हो सकता है. इसके कुछ कारण हैं.

  • महंगे टेस्ट: मॉलिक्यूलर प्रोफाइलिंग जैसे टेस्ट में ₹1.5 लाख तक लग सकते हैं.
  • दवाइयां: टारगेटेड थेरेपी का खर्च हर महीने ₹2 से ₹3 लाख तक जा सकता है.
  • रहने का खर्च: इलाज के लिए बड़े शहरों में जाने पर किराए और यात्रा का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाता है.

बचाव ही सबसे बड़ा समाधान है

डॉक्टरों का कहना है कि अगर कैंसर की पहचान समय पर (स्क्रीनिंग के जरिए) हो जाए, तो खर्च और जान का जोखिम दोनों कम हो जाते हैं. उदाहरण के तौर पर, शुरुआती स्टेज में ब्रेस्ट कैंसर के इलाज का खर्च ₹3-4 लाख आता है, जबकि तीसरी स्टेज तक पहुँचने पर यह ₹22 लाख तक जा सकता है.

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