RBI पर उठने लगे सवाल, जब महंगाई गिर गई तो फिर भी ब्याज दरें ऊंची क्यों?

अर्थशास्त्री RBI की महंगाई की गलत भविष्यवाणियों पर सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि बार-बार गलत अनुमान के कारण महंगाई कम होने के बावजूद ब्याज दरें ऊंची बनी हुई हैं. अब सवाल यह है कि क्या केंद्रीय बैंक जल्द ही ब्याज दरों में कटौती करेगा?
RBI Forecast: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस साल महंगाई को लेकर किए गए अपने अनुमान में बार-बार चूक कर रहा है. असल महंगाई लगातार अनुमान से कम निकलने के कारण विशेषज्ञों का मानना है कि RBI ने जरूरत से ज्यादा सख्त नीति अपनाई और ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखा है. खाने-पीने की चीजों के दाम गिरने से CPI में बड़ी गिरावट दिखी, लेकिन उसके बावजूद पॉलिसी में निर्णायक बदलाव नहीं हुआ है. विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अनुमान में लगातार गलती से RBI की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो सकते हैं. अब सबकी नजर दिसंबर की बैठक पर है, जहां ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद की जा रही है.
RBI Forecast: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस साल लगातार महंगाई को लेकर गलत अनुमान लगा रहा है. साल की शुरुआत की असल महंगाई और RBI की भविष्यवाणी में लगभग 0.7 प्रतिशत का बड़ा फर्क सामने आया था, जो पिछले छह सालों में सबसे ज्यादा है. अगले दो तिमाहियों में भी अनुमान सही नहीं बैठे थे. इसी वजह से कई अर्थशास्त्री कह रहे हैं कि RBI ने जरूरत से ज्यादा सतर्क होकर ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखा है.
कम महंगाई से क्या असर पड़ा ?
अक्टूबर में खाने-पीने की चीजों के दाम काफी कम हो गए थे. अच्छी बरसात और सप्लाई चेन सुधार की वजह से खाने की चीजे सस्ती हो गईं थी, और इसका सीधा असर पूरी महंगाई पर दिखा था क्योंकि CPI में फूड का हिस्सा लगभग आधा है. कई अर्थशास्त्री मानते हैं कि जब महंगाई कम थी, तब RBI को और ब्याज दरें घटानी चाहिए थीं, ताकि देश की अर्थव्यवस्था तेजी पकड़ सके.
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नीति पर भरोसा क्यों डगमगा सकता है ?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बार-बार अनुमान गलत हों, तो बाजार में RBI की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है. ब्याज दरें तब भी ऊंची रह जाती हैं जब उनकी जरूरत नहीं होती है, जिससे बिजनेस और आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है.
अब आगे RBI क्या करेगा ?
RBI ने पिछले साल अपना नया मॉडल शुरू किया था, लेकिन लगातार गलत आंकड़े बताकर आलोचना झेल रहा है. सरकार अब नया उपभोक्ता मूल्य सूचकांक जल्द जारी करने वाली है, जिससे भविष्य में महंगाई का सही अंदाजा लगाने में मदद मिल सकती है. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि दिसंबर में RBI एक छोटी ब्याज दर कटौती कर सकता है, जिससे अर्थव्यवस्था को थोड़ा सहारा मिल सकती है.
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By Soumya Shahdeo
सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.
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