अब प्लास्टिक के पैकेट में नहीं मिलेगा पान मसाला, FSSAI ने बदले नियम
पान मसाला पैकिंग के नियम बदले, फोटो AI
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पान मसाला की पैकेजिंग को लेकर नए और सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं. नये नियम के अनुसार अब पान मसाले को प्लास्टिक या एल्युमिनियम फॉइल वाले पाउच में बेचना बंद करना होगा.
FSSAI के अनुसार अब पान मसाला पैक करने के लिए ऐसे किसी कागज या मटेरियल का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा, जिसमें प्लास्टिक (जैसे पॉलीथीन, PVC) या एल्युमिनियम फॉइल की परत चढ़ी हो. पैकिंग पूरी तरह प्लास्टिक-मुक्त और इको-फ्रेंडली होनी चाहिए.
किन चीजों में पैक हो सकेगा पान मसाला? बिना प्लास्टिक/एल्युमिनियम कोटिंग वाले सादे कागज या नेचुरल मटेरियल में. धातु के बने छोटे टीन डिब्बों में. कांच की बोतलों या डिब्बों में.
पर्यावरण के नियमों का पालन जरूरी
पान मसाला बनाने वाली कंपनियों को प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के सख्त नियमों का भी पालन करना होगा.
क्यों लिया गया यह फैसला?
आम तौर पर पान मसाला जिन चमकदार प्लास्टिक पाउच में आता है, वे पर्यावरण को तो नुकसान पहुंचाते ही हैं, साथ ही लंबे समय तक प्लास्टिक और केमिकल के संपर्क में रहने से सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने जनता से सलाह और सुझाव मांगने के बाद इस नए नियम को आधिकारिक रूप से देश भर में लागू कर दिया है.
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लेखक के बारे में
By अरबिंद कुमार मिश्रा
अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.
झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.
करियर का सफरनामा
अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग
खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:
34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.
पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.
पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.
शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)
UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.
बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.
एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.
लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.
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