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Dream11 की कारोबार बंद करने की तैयारी! यूजर्स में वॉलेट कैश निकालने की होड़

Updated at : 22 Aug 2025 8:34 AM (IST)
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Dream11 की कारोबार बंद करने की तैयारी! यूजर्स में वॉलेट कैश निकालने की होड़

ड्रीम 11 ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म

Online Gaming Bill: संसद से पारित ऑनलाइन गेमिंग विधेयक-2025 के बाद Dream11 कंपनी अपना रियल-मनी गेमिंग कारोबार समेटने की तैयारी में है. कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि यूजर्स वॉलेट से पैसा निकाल सकेंगे. विदेशी ऐप्स और अन्य कंपनियों पर भी इसका बड़ा असर पड़ने वाला है.

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Online Gaming Bill: संसद से पारित ऑनलाइन गेमिंग विधेयक-2025 का असर अब साफ दिखने लगा है. रियल-मनी गेमिंग से सबसे बड़ी कमाई करने वाली फैंटेसी गेमिंग कंपनी Dream11 ने अपने इस कारोबार को बंद करने की तैयारी शुरू कर दी है. ऐसे में यूजर्स अब वॉलेट में रखे पैसे को निकालने में जुट गए हैं.

Dream11 ने बिजनेस समेटने का किया फैसला

सूत्रों के मुताबिक, Dream11 ने अपना बिजनेस समेटने की तैयारी कर चुकी है. यह जानकारी कंपनी ने अपने कर्मचारियों को दी हैं. हालांकि कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि जिन ग्राहकों को पैसा उनके वॉलेट में है, वे उसे निकाल सकेंगे. बता दें कि ड्रीम स्पोर्ट्स की सालाना आय का लगभग 67 फीसदी हिस्सा रियल-मनी गेम्स के जरिए आता है.

फैंटेसी स्पोर्ट्स एप पर पूरी तरह से प्रतिबंध

ऑनलाइन गेम्स बिल-2025 के कानून बनने के बाद फैंटेसी स्पोर्ट्स एप रमी, पोकर और MY11Circle एप्स पर पूरी तरह से प्रतिबंध लग जाएगा. जानकारी मिली है कि Dream11 के अलावा, जूपी (Zupee) जैसे एप्स ने अपने पेड़ गेम्स को बंद करने का फैसला किया है. हालांकि, एप्स पर मिलने वाले मुफ्त गेम्स पहले जैसे ही उपलब्ध रहेंगे.

विदेशी कंपनियों पर भी शिकंजा

गौरतलब है कि देश में इस समय 700 से ज्यादा विदेशी ऑनलाइन मनी गेमिंग कंपनियां सक्रिय हैं, जिनमें पेमेंट के लिए UPI का विकल्प उपलब्ध है. बीते दिनों इनके जरिए लेन-देन में भारी इजाफा हुआ था. लेकिन नए विधेयक में लगाए गए कड़े प्रावधानों के चलते अब इन पर पूरी तरह रोक लगेगी और भुगतान बंद कर दिया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उपयोगकर्ताओं की रकम फंसने का खतरा बढ़ गया है.

कैश निकासी में अफरा-तफरी

नए नियमों के लागू होने के बाद गेमर्स अपने-अपने वॉलेट से रकम निकालने की कोशिश में जुट गए हैं. अचानक बढ़ी इस निकासी की मांग से कंपनियों के सामने ‘बैंक रन’ जैसी स्थिति बन गई है, क्योंकि सभी प्लेटफॉर्म्स के पास पर्याप्त नकद संसाधन मौजूद नहीं हैं. वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, अगर यह स्थिति लंबी चली तो कई कंपनियां भुगतान करने में असमर्थ हो सकती हैं.

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Shashank Baranwal

लेखक के बारे में

By Shashank Baranwal

जीवन का ज्ञान इलाहाबाद विश्वविद्यालय से, पेशे का ज्ञान MCU, भोपाल से. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के नेशनल डेस्क पर कार्य कर रहा हूँ. राजनीति पढ़ने, देखने और समझने का सिलसिला जारी है. खेल और लाइफस्टाइल की खबरें लिखने में भी दिलचस्पी है.

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