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रम्मी, सॉलिटेयर, दहला पकड़ और पोकरबाजी का खेला खत्म, अब काम नहीं करेगा ऐप

Updated at : 22 Aug 2025 9:58 PM (IST)
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Online Gaming: भारत में ऑनलाइन गेमिंग उद्योग को बड़ा झटका लगा है. संसद से पारित ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन विधेयक 2025 के तहत सभी रियल मनी गेम्स जैसे रम्मी, पोकर, सॉलिटेयर और फैंटेसी क्रिकेट पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. कानून लागू होते ही विंजो, पोकरबाजी और एमपीएल जैसी कंपनियों ने अपनी सेवाएं निलंबित कर दी हैं. यह कदम खिलाड़ियों को वित्तीय नुकसान से बचाने और ई-स्पोर्ट्स जैसे सुरक्षित विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है, जिससे उद्योग का बिजनेस मॉडल बदलेगा.

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Online Gaming: भारत में ऑनलाइन गेमिंग उद्योग को बड़ा झटका लगा है. संसद से पारित और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बने ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन विधेयक, 2025 के तहत सभी प्रकार के पैसे वाले (रियल मनी) गेम्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है. इस कानून का मकसद समाज में फैल रही ऑनलाइन गेमिंग की बुराई को रोकना और ई-स्पोर्ट्स जैसे सुरक्षित विकल्पों को बढ़ावा देना है.

विंजो और पोकरबाजी ने बंद की सेवाएं

कानून लागू होते ही लोकप्रिय ऑनलाइन गेमिंग मंच विंजो और नजारा टेक्नोलॉजीज समर्थित मूनशाइन टेक्नोलॉजीज (पोकरबाजी) ने अपने रियल मनी गेम्स बंद करने की घोषणा की. कंपनियों ने कहा कि वे सरकार के आदेश का सम्मान करते हुए तुरंत प्रभाव से परिचालन निलंबित कर रही हैं. विंजो ने स्पष्ट किया कि वह अपने प्लेटफॉर्म से सभी प्रभावित गेम्स को पूरी जिम्मेदारी के साथ हटा रही है.

नजारा टेक्नोलॉजीज का बड़ा फैसला

नजारा टेक्नोलॉजीज ने शेयर बाजार को जानकारी दी कि उसकी सहायक कंपनी मूनशाइन टेक्नोलॉजीज ने नए कानून के तहत अपनी रियल मनी पेशकश पूरी तरह से निलंबित कर दी है, जो पोकरबाजी का संचालन करती है. कंपनी के बयान में कहा गया कि 21 अगस्त 2025 को पारित इस विधेयक के बाद सावधानीपूर्वक निर्णय लिया गया है और सरकार की गाइडलाइंस का पालन किया जाएगा.

100 से ज्यादा गेम्स होंगे प्रभावित

विंजो के पास रम्मी, सॉलिटेयर, दहला पकड़, फैंटेसी क्रिकेट और पोकर जैसे 100 से अधिक रियल मनी गेम्स का बड़ा खंड था. इन सभी को अब प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है. इस कदम से लाखों खिलाड़ियों पर असर पड़ेगा जो इन खेलों में नियमित रूप से हिस्सा लेते थे.

एमपीएल ने भी निलंबित किया परिचालन

विंजो और पोकरबाजी के अलावा मोबाइल प्रीमियर लीग (एमपीएल) ने भी भारत में अपने सभी रियल मनी गेम्स बंद कर दिए हैं. कंपनी ने बयान जारी कर कहा कि वह देश के कानून का सम्मान करते हुए तुरंत प्रभाव से सभी ऑफर निलंबित कर रही है. एमपीएल के वर्तमान में एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में 12 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं.

भारतीय गेमिंग उद्योग पर असर

इंडिया गेमिंग रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत का गेमिंग बाजार तेजी से बढ़ रहा था. दुनिया के गेमिंग उपयोगकर्ता आधार का लगभग 20% हिस्सा भारत से आता है और वैश्विक गेमिंग ऐप डाउनलोड में भारत की हिस्सेदारी 15.1% है. 2024 में 3.7 अरब अमेरिकी डॉलर का यह बाजार 19.6% की वार्षिक दर से बढ़ते हुए 2029 तक 9.1 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान था. हालांकि, रियल मनी गेम्स पर प्रतिबंध से इस उद्योग के बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.

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नया प्लान बनाएंगी कंपनियां

ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों द्वारा परिचालन बंद किए जाने के बाद भारत का गेमिंग उद्योग अब नए सिरे से ढलने की तैयारी कर रहा है. जहां एक ओर यह कदम खिलाड़ियों को वित्तीय नुकसान से बचाएगा, वहीं दूसरी ओर कंपनियों को ई-स्पोर्ट्स और निःशुल्क गेम्स पर ध्यान केंद्रित करना होगा. नया कानून उद्योग को पारदर्शिता, सुरक्षा और जिम्मेदारी की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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