खाद की किल्लत पर सरकार का बयान: खरीफ सीजन के लिए स्टॉक है तैयार

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खाद डालते हुए व्यक्ति (Photo: Freepik)

Impact of Middle East Conflict on Fertilizer: मिडल ईस्ट में जारी युद्ध के बावजूद भारतीय किसानों के लिए राहत की खबर है. सरकार ने खरीफ सीजन के लिए खाद और बीजों का पर्याप्त स्टॉक होने का दावा किया है.

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Impact of Middle East Conflict on Fertilizer: मिडल ईस्ट में जारी युद्ध और तनाव के बीच भारतीय किसानों के लिए एक राहत भरी खबर आई है. यूनियन मिनिस्टर ऑफ केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स जेपी नड्डा ने राज्यों के कृषि मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के साथ एक बड़ी बैठक की है. सरकार ने साफ कर दिया है कि दुनिया भर में सप्लाई चेन बिगड़ने के बावजूद भारत के पास खाद और बीजों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. 

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क्या खरीफ सीजन के लिए खाद पर्याप्त है?

ANI की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, आने वाले खरीफ सीजन के लिए 390.52 लाख मीट्रिक टन (LMT) खाद की जरूरत है. राहत की बात यह है कि इसका लगभग 46 प्रतिशत यानी 180 LMT हिस्सा पहले से ही ‘ओपनिंग स्टॉक’ के रूप में देश में मौजूद है. कृषि मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि किसानों को बुवाई (sowing) के समय किसी भी तरह की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा. 

बीजों की उपलब्धता को लेकर क्या स्थिति है?

खाद के साथ-साथ बीजों को लेकर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है. अतिरिक्त सचिव मनिंदर कौर द्विवेदी के अनुसार, इस सीजन में 166.46 लाख क्विंटल बीजों की जरूरत है, जबकि हमारे पास 19.29 लाख क्विंटल बीज सरप्लस (अतिरिक्त) में उपलब्ध हैं. यानी बीजों की कोई कमी नहीं होगी. 

मिडल ईस्ट के तनाव का भारत पर क्या असर होगा?

भारत अपनी खाद की जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भर है. जिसमें 20% यूरिया और एक तिहाई कॉम्प्लेक्स खाद (जैसे DAP) बाहर से मंगाते हैं. वित्त वर्ष 2026 के पहले 9 महीनों में खाद की कुल जरूरत का 40% हिस्सा अकेले मिडल ईस्ट से आया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तनाव से घरेलू उत्पादन पर 10-15% का असर पड़ सकता है, लेकिन सरकार की पहले से की गई तैयारियों ने इस खतरे को कम कर दिया है. 

यूरिया और DAP का गणित क्या है?

भारत में खाद की कुल खपत में 45% हिस्सा अकेले यूरिया का है. इसके अलावा DAP और NPK जैसी खाद का हिस्सा करीब एक तिहाई है. यूरिया बनाने में इस्तेमाल होने वाली 80% नेचुरल गैस भी बाहर से आती है.  इन चुनौतियों को देखते हुए ही कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और जेपी नड्डा ने संसद में मुलाकात कर हालात की समीक्षा की है ताकि राज्यों को खाद की सप्लाई में कोई रुकावट न आए. 

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