10.3 C
Ranchi

लेटेस्ट वीडियो

Mutual Fund: जॉइंट होल्डर की मौत के बाद बदलाव करना बेहद आसान, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

Mutual Fund: म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए बड़ी राहत की खबर है. अब जॉइंट होल्डर की मौत के बाद म्यूचुअल फंड में नया जॉइंट होल्डर जोड़ना और यूनिट ट्रांसफर करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है. एएमएफआई की नई गाइडलाइंस के तहत यह सुविधा ऑनलाइन उपलब्ध होगी.

Mutual Fund: म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए राहत भरी खबर है. अब स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट (एसओएस) मोड में रखे गए म्यूचुअल फंड निवेश में सह-धारक (ज्वाइंट होल्डर) की मौत के बाद नया जॉइंट होल्डर जोड़ना और यूनिट ट्रांसफर करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है. एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) ने इस संबंध में नई गाइडलाइंस जारी की हैं, जिससे लाखों निवेशकों को बड़ी सुविधा मिलने वाली है. अब तक एसओएस मोड में रखे गए म्यूचुअल फंड को सीधे ट्रांसफर करने की अनुमति नहीं थी. ऐसे मामलों में निवेशकों को पहले यूनिट्स को डीमैट में बदलना पड़ता था, फिर ऑफ-मार्केट ट्रांजैक्शन के जरिए ट्रांसफर करना होता था. यह प्रक्रिया न केवल लंबी थी, बल्कि आम निवेशकों के लिए काफी जटिल भी मानी जाती थी. आइए, जानते हैं कि इस संबंध में टैक्स एवं इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट बलवंत जैन क्या कहते हैं?

ऑनलाइन मिलेगा जॉइंट होल्डर जोड़ने का विकल्प

टैक्स एवं इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट बलवंत जैन कहते हैं कि नई व्यवस्था के तहत अब म्यूचुअल फंड हाउस के रजिस्ट्रार और एमएफ सेंट्रल पोर्टल के जरिए ऑनलाइन तरीके से जॉइंट होल्डर जोड़ने और यूनिट ट्रांसफर की सुविधा उपलब्ध होगी. निवेशक अपने घर बैठे यह प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे. ट्रांजैक्शन की सुरक्षा के लिए मोबाइल और ईमेल पर भेजे जाने वाले ओटीपी के जरिए वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा. अगर फोलियो जॉइंट है, तो सभी धारकों को ओटीपी से पुष्टि करनी होगी.

किन परिस्थितियों में जोड़ सकेंगे नया जॉइंट होल्डर

एएमएफआई के मुताबिक, ज्वाइंट होल्डर की मौत के बाद जिंदा होल्डर के साथ नया जॉइंट होल्डर जोड़ा जा सकेगा. इसके अलावा, नाबालिग के बालिग होने पर उसके फोलियो में माता-पिता, अभिभावक, जीवनसाथी या भाई-बहन को भी जोड़ा जा सकता है. नामांकित व्यक्ति से कानूनी उत्तराधिकारियों के फोलियो में यूनिट ट्रांसफर की अनुमति भी दी गई है.

स्टांप ड्यूटी और स्कीम से जुड़े नियम

नई गाइडलाइंस के अनुसार, माता-पिता, बच्चे या जीवनसाथी को यूनिट ट्रांसफर करने पर स्टांप ड्यूटी नहीं लगेगी, लेकिन भाई-बहन या किसी तीसरे व्यक्ति को ट्रांसफर करने पर स्टांप ड्यूटी देनी होगी. यह सुविधा सभी म्यूचुअल फंड स्कीम्स में मिलेगी. हालांकि, ईटीएफ को इससे बाहर रखा गया है. यूनिट्स केवल किसी एक व्यक्ति को ट्रांसफर की जा सकेंगी और ट्रांसफर पाने वाले के पास उसी फंड हाउस में केवाईसी-कम्प्लायंट फोलियो होना जरूरी होगा.

आंशिक ट्रांसफर और कूलिंग पीरियड

बलवंत जैन आगे कहते हैं कि निवेशक अब अपने फोलियो से आंशिक रूप से भी यूनिट्स ट्रांसफर कर सकेंगे, बशर्ते न्यूनतम बैलेंस बना रहे. अगर बैलेंस न्यूनतम निवेश से कम हुआ, तो बाकी यूनिट्स रिडीम कर दी जाएंगी. धोखाधड़ी से बचाव के लिए ट्रांसफर के बाद 10 दिन का कूलिंग पीरियड रखा गया है, इस दौरान ट्रांसफर पाने वाला व्यक्ति यूनिट्स को रिडीम नहीं कर पाएगा.

टैक्स को लेकर बरतनी होगी सावधानी

उन्होंने कहा कि यूनिट ट्रांसफर को आयकर विभाग रिडेम्पशन के समान मान सकता है. इसलिए, इसे आयकर रिटर्न में सही तरीके से दिखाना जरूरी होगा. माता-पिता, जीवनसाथी या बच्चों को गिफ्ट करने पर ट्रांसफर के समय टैक्स नहीं लगेगा, लेकिन रिडेम्पशन के समय कैपिटल गेन टैक्स देना होगा. वहीं, तीसरे व्यक्ति को गिफ्ट की स्थिति में 50 हजार रुपये से ज्यादा की रकम टैक्स के दायरे में आ सकती है.

इसे भी पढ़ें: एसबीआई एटीएम की देखरेख करेगी सीएमएस, मिला 1000 करोड़ रुपये का ठेका

निवेशकों के लिए क्यों है यह बदलाव अहम

उनका कहना है कि यह कदम म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को ज्यादा निवेशक-अनुकूल बनाएगा. इससे उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में आसानी होगी और अनावश्यक तकनीकी अड़चनें खत्म होंगी. डिजिटल प्रक्रिया से पारदर्शिता बढ़ेगी और फ्रॉड की आशंका भी कम होगी.

इसे भी पढ़ें: डेबिट कार्ड इस्तेमाल करने वाले सावधान! इन 7 गलतियों से खाली हो सकता है बैंक अकाउंट, रहें सतर्क

Disclaimer: शेयर बाजार से संबंधित किसी भी खरीद-बिक्री के लिए प्रभात खबर कोई सुझाव नहीं देता. हम बाजार से जुड़े विश्लेषण मार्केट एक्सपर्ट्स और ब्रोकिंग कंपनियों के हवाले से प्रकाशित करते हैं. लेकिन प्रमाणित विशेषज्ञों से परामर्श के बाद ही बाजार से जुड़े निर्णय करें.

KumarVishwat Sen
KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

संबंधित ख़बरें

Trending News

जरूर पढ़ें

वायरल खबरें

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel