MSME निर्यातकों के पास नहीं है कर्मचारियों को अप्रैल महीने के वेतन देने का पैसा
Author : KumarVishwat Sen Published by : Prabhat Khabar Updated At : 14 Apr 2020 7:19 PM
निर्यातकों का शीर्ष संगठन फियो ने मंगलवार को कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मझोले (एमएसएमई) उद्यमों के पास अप्रैल महीने के लिए अपने कर्मचारियों को वेतन देने को लेकर पर्याप्त नकदी नहीं है.
नयी दिल्ली : निर्यातकों का शीर्ष संगठन फियो ने मंगलवार को कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मझोले (एमएसएमई) उद्यमों के पास अप्रैल महीने के लिए अपने कर्मचारियों को वेतन देने को लेकर पर्याप्त नकदी नहीं है. ये इकाइयां ‘लॉकडाउन’ के कारण कोई भी कारोबारी गतिविधियां कर पाने में असमर्थ रही हैं. भारतीय निर्यातक संगठनों के महासंघ (फियो) ने यह बात दोहरायी है कि सरकार को तत्काल प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा करनी चाहिए और विनिर्माण इकाइयों में आंशिक रूप से कामकाज शुरू करने की अनुमति दी जानी चाहिए.
फियो के अध्यक्ष शरद कुमार सर्राफ ने एक बयान में कहा कि निर्यातकों खासकर एमएसएमई निर्यातकों के पास कर्मचारियों को अप्रैल महीने का वेतन देने के लिए नकदी नहीं है, क्योंकि वे देशव्यापी बंद के दौरान कारोबार से जुड़ा कोई भी काम नहीं कर पा रहे हैं. उन्होंने विनिर्माण क्षेत्र के चुनिंदा खासकर निर्यात इकाइयों को कामकाज की अनुमति देने के फैसले को टाले जाने को लेकर निराशा जतायी.
सर्राफ ने कहा कि हम प्रधानमंत्री के मंगलवार को सुबह राष्ट्र के नाम संबोधन में इस संदर्भ में कुछ घोषणा की उम्मीद कर रहे थे. अगर निर्यातक माल डिलीवरी के लिए निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं करेंगे, तो उनके निर्यात ऑर्डर रद्द होंगे. इतना ही नहीं, जुर्माना लगेगा और बाजार भी गंवाना पड़ेगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को घोषणा की कि लॉकडाउन 3 मई तक जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि देश में कोरोना वायरस महामारी रोकने के लिए यह जरूरी है. सर्राफ ने कहा कि चुनिंदा विनिर्माण इकाइयों को कामकाज शुरू करने में भी कई कठिनाइयों का सामाना करना पड़ेगा. इसका कारण श्रमिकों का उपलब्ध नहीं होना, कच्चा माल, परिवहन की समस्या है. स्पेन कोरोना वायरस से सर्वाधिक प्रभावित देशों में एक है, लेकिन उसने भी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए उसे धीरे-धीरे खोलना शुरू कर दिया है.
फियो के अध्यक्ष ने मांग की है कि अर्थव्यवस्था की मदद के लिए व्यापक आर्थिक पैकेज की घोषणा की जा सकती है. इसमें छह महीने के वेतन के बराबर ब्याज मुक्त कर्ज, किराया तथा किस्तों के भुगतान पर छह महीने की रोक शामिल हैं. उन्होंने कहा कि इस प्रकार के समर्थन के बिना सरकार को यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि उद्योग ‘लॉकडाउन’ के दौरान कर्मचारियों को वेतन देगा. इसे लागू करने के लिए किसी भी प्रकार से दंडात्मक आदेश का कोई फायदा नहीं होगा.
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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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