MGNREGA Budget 2025: जिसे PM मोदी ने ठहराया था UPA की नाकामी, उस योजना को बजट में कितना पैसा मिला?

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MGNREGA Budget 2025

जिसे PM मोदी ने ठहराया था UPA की नाकामी, उस योजना को बजट में कितना पैसा मिला

MGNREGA Budget 2025: पीएम मोदी ने जिसे UPA की नाकामी बताया था, उस योजना को इस बजट में कितनी राशि मिली? जानिए इस योजना के लिए आवंटित धनराशि

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MGNREGA Budget 2025: बजट  में सरकार ने विभिन्न सेक्टर्स के लिए फंड आवंटन किया है, लेकिन महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) को लेकर कोई वृद्धि नहीं की गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी इस योजना को “यूपीए सरकार की विफलताओं का स्मारक” बताया था, लेकिन अब इसे उसी बजट के साथ जारी रखा गया है.

बजट 2025 में MGNREGA को कितनी राशि मिली?

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने 86,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया है, जो पिछले साल 2024-25 के बजट के बराबर ही है. हालांकि, मौजूदा वित्तीय वर्ष में यह योजना 9,754 करोड़ रुपये के घाटे में चल रही है. सरकार का कहना है कि यह एक “मांग आधारित योजना” (Demand-Driven Scheme) है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त धनराशि जारी की जाती है, लेकिन इस बार बजट में कोई अतिरिक्त वृद्धि नहीं की गई.

MGNREGA भुगतान में देरी और राज्यों का बकाया

हर साल MGNREGA बजट का एक बड़ा हिस्सा पिछले वर्ष के बकाया भुगतान में चला जाता है. इस साल भी यही स्थिति बनी हुई है.

  • पश्चिम बंगाल में 7,500 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है.
  • अगर बकाया राशि चुकाई जाती है, तो नए बजट में उपलब्ध धनराशि और कम हो जाएगी.
  • मजदूरों को समय पर वेतन न मिलने की समस्या बनी रह सकती है.

MGNREGA के नियमों के अनुसार, मजदूरों को 15 दिनों के भीतर मजदूरी मिलनी चाहिए, लेकिन बजट की सीमाओं के कारण समय पर भुगतान संभव नहीं हो पा रहा.

योजना पहले से ही घाटे में, मजदूरों को रोजगार मिलने में दिक्कत

The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार मजदूर किसान शक्ति संगठन के संस्थापक सदस्य निखिल डे ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में तीन महीने शेष हैं और योजना पहले से घाटे में है. इसका मतलब है कि अगले तीन महीनों में मजदूरी के भुगतान में और देरी होगी.

  • अगले वित्तीय वर्ष में MGNREGA का बजट सीमित रह सकता है.
  • अर्थशास्त्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, मजदूरों को जब रोजगार की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब उन्हें काम नहीं मिलता.
  • MGNREGA के नियमों के मुताबिक, यदि मजदूर को 15 दिन के भीतर काम नहीं मिलता, तो उसे बेरोजगारी भत्ता मिलना चाहिए, लेकिन रिपोर्ट्स में यह सामने आया है कि मांग तभी दर्ज की जाती है, जब रोजगार दिया जाता है, जिससे सही आंकड़े सामने नहीं आते.

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Abhishek Pandey

लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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