FDI लिमिट 49 फीसदी करेगी जियो फाइनेंशियल, शेयरधारकों से मांगी मंजूरी

एफडीआई लिमिट बढ़ाएगी जियो फाइनेंशियल सर्विसेज. फोटो: सोशल मीडिया
FDI: आरबीआई ने कंपनी के शेयरधारिता तरीके और नियंत्रण में बदलाव के लिए अपनी मंजूरी देते समय कुछ शर्तें रखी थीं. उसी के अनुरूप कंपनी ने एनबीएफसी से सीआईसी में बदलने के लिए एक आवेदन पेश किया है.
FDI: रिलायंस ग्रुप की वित्तीय सेवा कंपनी जियो फाइनेंशियल सर्विसेज में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की लिमिट को बढ़ाकर 49 फीसदी करने का फैसला किया है. इसके प्रस्ताव पर उसने शेयरधारकों से मंजूरी मांगी है. शेयर बाजार को दी गई जानकारी में कंपनी ने कहा कि प्रमुख निवेश कंपनी (सीआईसी) के रूप में तब्दील होने के बाद उसकी इक्विटी शेयर पूंजी में 49 फीसदी तक विदेशी निवेश (विदेशी पोर्टफोलियो निवेश सहित) को मंजूरी देने के लिए शेयरधारकों के ऑनलाइन मतदान का एजेंडा रखा गया है. जियो फाइनेंशियल सर्विसेज ने कहा कि यह निर्णय नियामकीय मंजूरी के अधीन होगा.
22 जून तक ई-वोटिंग की सुविधा
मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, जियो फाइनेंशियल की ओर से एफडीआई लिमिट बढ़ाने के प्रस्ताव पर मतदान करने के लिए शेयरधारकों के लिए कट-ऑफ डेट 17 मई तय की गई थी. इसमें कहा गया है कि ई-वोटिंग सुविधा 24 मई से 22 जून तक उपलब्ध रहेगी. इसके अलावा, उसने कंपनी के संगठन संबंधी नियमों के प्रावधान में बदलाव के लिए भी मंजूरी मांगी है.
आरबीआई ने मंजूरी में रखी कुछ शर्तें
अक्टूबर, 2020 में जारी इंटीग्रेटेड एफडीआई पॉलिसी के मुताबिक, वित्तीय सेवा गतिविधियों में लगी कंपनी में स्वत: मंजूर मार्ग के तहत 100 फीसदी तक एफडीआई की मंजूरी है. ऐसे में कंपनी को किसी अनुमोदन की आवश्यकता नहीं थी. आरबीआई ने कंपनी के शेयरधारिता तरीके और नियंत्रण में बदलाव के लिए अपनी मंजूरी देते समय कुछ शर्तें रखी थीं. उसी के अनुरूप कंपनी ने एनबीएफसी से सीआईसी में बदलने के लिए एक आवेदन पेश किया है. इसमें कहा गया है कि सीआईसी में विदेशी निवेश को सरकारी अनुमोदन मार्ग के तहत अनुमति लेनी होती है.
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निदेशक मंडल ने 24 दिसंबर को ही दे दी है मंजूरी
कंपनी के निदेशक मंडल ने 27 दिसंबर, 2023 को हुई अपनी बैठक में कंपनी के सीआईसी में बदलाव पर प्रभावी 49 फीसदी तक कंपनी की इक्विटी शेयर पूंजी में विदेशी निवेश (विदेशी पोर्टफोलियो निवेश सहित) को पहले ही मंजूरी दी है. इसके अलावा, कंपनी ने राम वेदश्री को कंपनी के स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्त करने की भी मंजूरी मांगी है.
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लेखक के बारे में
By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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