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IRCTC News : प्राइवेट ट्रेन चलाने के बाद अब IRCTC में ओएफसी के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेचेगी सरकार, मंगायी गयीं बोलियां

Updated at : 19 Aug 2020 5:59 PM (IST)
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IRCTC News : प्राइवेट ट्रेन चलाने के बाद अब IRCTC में ओएफसी के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेचेगी सरकार, मंगायी गयीं बोलियां

IRCTC News Todays : देश में प्राइवेट चलाने के बाद केंद्र सरकार भारतीय रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन यानी आईआरसीटीसी में अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में जुट गयी है. मीडिया में सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों के अनुसार, सरकार की ओर से आईआरसीटीसी की यह हिस्सेदारी ओएफसी के जरिए बेची जाएगी. इसके लिए विनिवेश विभाग की ओर से मर्चेंट बैंकर्स की नियुक्ति की खाति बोलियां मंगायी गयी है. खबर यह भी है कि इसके लिए आगामी 3 सितंबर को एक उच्चस्तरीय बैठक भी आयोजित की जाएगी. फिलहाल, आईआरसीटीसी में सरकार की 80 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी है.

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IRCTC News Todays : देश में प्राइवेट चलाने के बाद केंद्र सरकार भारतीय रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन यानी आईआरसीटीसी में अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में जुट गयी है. मीडिया में सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों के अनुसार, सरकार की ओर से आईआरसीटीसी की यह हिस्सेदारी ओएफसी के जरिए बेची जाएगी. इसके लिए विनिवेश विभाग की ओर से मर्चेंट बैंकर्स की नियुक्ति की खाति बोलियां मंगायी गयी है. खबर यह भी है कि इसके लिए आगामी 3 सितंबर को एक उच्चस्तरीय बैठक भी आयोजित की जाएगी. फिलहाल, आईआरसीटीसी में सरकार की 80 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी है.

हर महीने 2.5 करोड़ से अधिक टिकटों की बिक्री करती है आईआरसीटीसी

बता दें कि आईआरसीटीसी भारतीय रेलवे की सहायक कंपनी है. आईआरसीटीसी ट्रेनों में सफर करने वाले लोगों टिकटों की बुकिंग के साथ ही यात्रा के दौरान भोजन आदि भी व्यवस्था करती है. इसके अलावा, इसी कंपनी की ओर से देश में प्राइवेट ट्रेनों का परिचालन भी किया जाता है. शेयर बाजार में आईआरसीटीसी 2019 के अक्टूबर महीने में सूचीबद्ध करायी गयी थी. आईआरसीटीसी भारतीय रेलवे में कैटरिंग सर्विस के साथ ही ऑनलाइन टिकट बुकिंग और बोतलबंद पानी बेचती है. आईआरसीटीसी की वेबसाइट के जरिए हर महीने करीब 2.5-2.8 करोड़ टिकट बिक्री की जाती है. भारतीय रेलवे से जुड़ी हर News in Hindi से अपडेट रहने के लिए बने रहें हमारे साथ.

क्या होता है ओएफएस?

ओएफएस को ऑफर फॉर सेल कहते है. शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के प्रमोटर्स अपनी हिस्सेदारी को कम करने के लिए इसका इस्तेमाल करते है. सेबी के नियमों के मुताबिक, जो भी कंपनी ओएफएस जारी करना चाहती है, उसे इश्यू के दो दिन पहले इसकी सूचना सेबी के साथ-साथ एनएसई और बीएसई को देनी होती है. इसके बाद इन्वेस्टर्स एक्सचेंज को जानकारी देकर इस प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं. इन्वेस्टर्स किस कीमत पर शेयर खरीदना चाहते हैं उसकी जानकारी उपलब्ध करानी होती है. निवेशक अपनी बोली दाखिल करता है. उसके बाद कुल बोलियों के प्रस्तावों की गणना की जाती है और इससे पता चलता है कि इश्यू कितना सब्सक्राइब हुआ है. इसके बाद प्रक्रिया पूरी होने पर स्टॉक्स का अलॉटमेंट होता है.

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Posted By : Vishwat Sen

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