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पर्यावरण संरक्षण की पहल: कोल इंडिया के जयंत प्रोजेक्ट में 200 हेक्टेयर से अधिक बढ़ा वन क्षेत्र

Updated at : 22 Sep 2021 9:05 PM (IST)
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पर्यावरण संरक्षण की पहल: कोल इंडिया के जयंत प्रोजेक्ट में 200 हेक्टेयर से अधिक बढ़ा वन क्षेत्र

Climate Change|Environment Conservation|यह आंकड़ा दर्शाता है कि परियोजना के लिए जितनी जमीन पट्टे पर दी गयी थी, उसका 45 फीसदी हिस्सा अब वन क्षेत्र है.

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नयी दिल्लीः कोल इंडिया (Coal India) देश में कोयला खनन ही नहीं करता, पर्यावरण संरक्षण (Environment Conservation) पर भी मिशन मोड में काम करता है. यही वजह है कि जयंत प्रोजेक्ट (Jayant Project) में 200 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र बढ़ा है. यहां कोयला खनन की शुरुआत से पहले लगभग 1180 हेक्टेयर वन क्षेत्र था, जो अब बढ़कर 1419 हेक्टेयर हो गया है. ये आंकड़े वर्ष 2020 के लिए उपग्रह से मिले डेटा पर आधारित हैं.

नयी दिल्ली में कोयला मंत्रालय के सचिव (कोयला) ने जयंत परियोजना की पर्यावरण और वन मंजूरी की विस्तृत समीक्षा की. इसी दौरान, नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) द्वारा प्रस्तुत परियोजना के उपग्रह डेटा ने उस क्षेत्र में पूर्व-खनन वन आवरण की तुलना में अब अधिक हरित आवरण क्षेत्र होने की जानकारी दी. ऐसे किसी बड़े लीजहोल्ड क्षेत्र में संचालित किसी भी बहुत बड़ी (मेगा) कोयला परियोजना के लिए यह एक उत्कृष्ट उपलब्धि है.

यह आंकड़ा दर्शाता है कि परियोजना के लिए जितनी जमीन पट्टे पर दी गयी थी, उसका 45 फीसदी हिस्सा अब वन क्षेत्र है. इस खदान के बंद होने के बाद यहां 2600 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को हरित क्षेत्र में शामिल करने का लक्ष्य है, जो कि पूर्व-खनन अवस्था के दोगुने से भी अधिक होगा.

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यह सर्वविदित है कि कोयला खनन से उस क्षेत्र में भूमि का क्षरण होता है. लेकिन, कोयला मंत्रालय के अंतर्गत कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की नयी परियोजनाएं न केवल भूमि को पुनः उसके मूल आकार में ला रही हैं, बल्कि अपनी कोयला खनन गतिविधियों के साथ-साथ आसपास के हरित आवरण क्षेत्र को भी बढ़ा रही हैं.

पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए कोयला खनन संचालन (ओपनकास्ट कोल माइनिंग) के बाद वहां पर खोदी गयी भूमि को सघन वृक्षारोपण से एक साथ भरने पर जोर दिया जा रहा है.

ऐसी कई हरित क्षेत्र (ग्रीनफील्ड) परियोजनाओं में मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में जयंत ओपनकास्ट कोयला परियोजना, जो कि कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की सबसे बड़ी परियोजना में से एक है, अब भूमि की बहाली करने के साथ-साथ कोयला खनन से आगे जाकर दिन-ब-दिन हरित आवरण बढ़ाने के मिशन के साथ आगे बढ़ रही है.

3200 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन, 2.5 करोड़ टन कोयला का उत्पादन

इससे प्रदूषण के प्रभाव को काफी हद तक कम करने और कार्बन ऑफसेट को बढ़ाने में भी मदद मिली है. यह परियोजना सीआईएल की सहायक कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) के अधीन है. जयंत कोयला परियोजना का संचालन लगभग 3200 हेक्टेयर क्षेत्र में किया जा रहा है, जिसकी वार्षिक कोयला उत्पादन क्षमता 2.5 करोड़ टन है.

1975-76 में शुरू हुआ था खनन

परियोजना में खनन कार्य बहुत पहले वर्ष 1975-76 में शुरू हुआ था। वर्ष 1977-78 से यहाँ कोयला का उत्पादन बड़ी क्षमता वाली हेवी अर्थ मूविंग मशीनों (एचईएमएम) जैसे ड्रैगलाइन, फावड़ा, डंपर आदि की मदद से शुरू किया गया था. परियोजना से उत्पादित कोयला शक्तिनगर, उत्तर प्रदेश में स्थित राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम ( एनटीपीसी) के सिंगरौली सुपर थर्मल पावर स्टेशन में भेजा जाता है, जिसकी उत्पादन क्षमता 2000 मेगावाट है.

ग्रीन कवर मिशन

ग्रीन कवर मिशन के अनुरूप, परियोजना में और उसके आसपास हर साल बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जा रहा है, जिसमें मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम लिमिटेड (एमपीआरवीववीएनएल) की मदद से पुनः प्राप्त क्षेत्र और अत्यधिक भारित (ओवरबर्डन- ओबी), कचरा (डंप) क्षेत्र शामिल हैं.

लगाये गये पौधों में जामुन, जंगल जलेबी, सीसम, सिरस, महुआ, सुबाबुल, बेल, आंवला, कचनार, करंज, नीम, अमलतास, बांस, बोगनविलिया, कैसिया, गुलमोहर, खमेर, पेल्टोफोरम आदि प्रजातियां शामिल हैं.

Posted By: Mithilesh Jha

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