अमेरिका के मुकाबले भारत के मजदूरों की कमाई काफी कम, हर महीने बस इतनी होती है कमाई

Updated at : 18 Mar 2025 8:24 PM (IST)
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Workers Wages

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Workers Wages: अमेरिका में एक मजदूर की औसत कमाई भारत के मुकाबले कई गुना अधिक है. यह अंतर दोनों देशों के श्रम कानून, आर्थिक विकास और जीवन स्तर में मौजूदा अंतर को दर्शाता है. जहां एक ओर अमेरिका के मजदूर अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए अधिक कमाते हैं, वहीं भारत के श्रमिकों को अपनी जीविका कम मजदूरी में चलानी पड़ती है.

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Workers Wages: भारत पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ती पांचवीं अर्थव्यवस्था बन चुका है और तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ गया है. इसका मतलब यह है कि अमेरिका और चीन के बाद भारत तीसरे नंबर पर पहुंच जाएगा. लेकिन, मजदूरी की बात करें, तो अमेरिका के मुकाबले भारत के मजदूरों की एक महीने में होने वाली कमाई काफी कम है. एक महीने में अमेरिका का एक मजदूर जितनी कमाई करता है, भारतीय श्रमिक उससे 10 से 20 गुना से भी कम है. आइए, जानते हैं कि एक महीने में अमेरिका का एक मजदूर कितना कमाता है और भारत के श्रमिक की कितनी कमाई होती है?

अमेरिका में मजदूरों की भारतीय श्रमिकों से अधिक कमाई

अमेरिका में एक मजदूर की औसतन मासिक कमाई भारत के मजदूरों की तुलना में काफी अधिक है. यह अंतर दोनों देशों के आर्थिक विकास, न्यूनतम वेतन कानून और जीवन स्तर में अंतर अनुरूप है. अमेरिका में मजदूरों को मिल रही अधिकतम मजदूरी उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाती है, जबकि भारत में मजदूरी कम है और श्रमिकों को अनेकानेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

अमेरिका में मजदूरों की औसत कमाई

विश्व बैंक और अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो (बीएलएस) की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में औसतन एक मजदूर हर महीने 3,500 डॉलर से से 4,000 डॉलर (करीब 2.8 लाख रुपये से 3.2 लाख रुपये) तक की कमाई होती है. यह आंकड़ा नौकरी के प्रकार, राज्य और उद्योग के अनुसार बदल सकता है, लेकिन यह सामान्य औसत है. अमेरिका में मजदूरी निर्धारित करने के लिए न्यूनतम वेतन कानून लागू है, जो हर राज्य में अलग-अलग हो सकता है. लेकिन, अधिकांश राज्यों में यह कम से कम 7.25 डॉलर प्रति घंटा होता है. कुछ राज्यों में यह अधिक भी होता है, जैसे कि न्यूयॉर्क और कैलिफोर्निया में जहां न्यूनतम वेतन 15 डॉलर प्रति घंटा है.

भारत में मजदूरों की औसत कमाई

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मजदूरों की औसत मासिक कमाई अपेक्षाकृत कम है. एक आम मजदूर हर महीने 10,000 रुपये से 20,000 रुपये (करीब 120 डॉलर से 250 डॉलर) तक की कमाई करता है, जो नौकरी के प्रकार, राज्य और शहर के हिसाब से बदल सकता है. भारत में श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन राज्यों के हिसाब से निर्धारित किया जाता है और यह अक्सर अमेरिका के मुकाबले बहुत कम होता है. उदाहरण के लिए, दिल्ली में मजदूरों की न्यूनतम वेतन 15,000 प्रति माह है, जबकि छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में यह राशि बहुत कम होती है.

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अमेरिका और भारत के मजदूरों की आमदनी अंतर क्यों?

  • आर्थिक विकास: अमेरिका की अर्थव्यवस्था बहुत विकसित है और वहां की औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों में मजदूरों की मांग अधिक है. नतीजतन, उनकी मजदूरी भी अधिक होती है. भारत में आर्थिक विकास हो रहा है, लेकिन बड़ी संख्या में श्रमिक असंगठित क्षेत्रों में काम करते हैं, जो उनके लिए कम वेतन और कम सुविधाओं का कारण बनता है.
  • न्यूनतम वेतन कानून: अमेरिका में न्यूनतम वेतन कानून बहुत सख्त है और श्रमिकों को अच्छा वेतन दिया जाता है. वहीं, भारत में यह कानून कुछ हद तक कमजोर है और श्रमिकों को कई बार कम वेतन पर काम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है.
  • जीवन स्तर का अंतर: अमेरिका में उच्च जीवन स्तर और महंगाई के कारण मजदूरों की अधिक कमाई की जरूरत है. भारत में महंगाई अपेक्षाकृत कम है, लेकिन श्रमिकों की कमाई भी उतनी ही कम रहती है, जिससे उनके जीवन स्तर पर भी असर पड़ता है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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