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भारी बारिश के चलते सर्विस सेक्टर की हालत खराब, 5 महीने के निचले स्तर पर पहुंची वृद्धि दर

Updated at : 06 Nov 2025 4:23 PM (IST)
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Services Sector PMI

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PMI: अक्टूबर 2025 में भारत के सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर भारी बारिश और प्रतिस्पर्धा के कारण पांच महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई. एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई घटकर 58.9 पर आ गया, जो सितंबर में 60.9 था. हालांकि यह गिरावट धीमी गति दर्शाती है, फिर भी पीएमआई 50 के तटस्थ स्तर से ऊपर है, जिससे संकेत मिलता है कि क्षेत्र में विस्तार जारी है. विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले महीनों में स्थिति में सुधार की उम्मीद है.

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PMI: भारी बारिश और प्रतिस्पर्धा के चलते भारत के सेवा क्षेत्र (सर्विस सेक्टर) की वृद्धि दर अक्टूबर 2025 में पांच महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई है. एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) के अनुसार, अक्टूबर में सूचकांक घटकर 58.9 पर आ गया, जो सितंबर के 60.9 से कम है. यह गिरावट मई 2025 के बाद सेवा क्षेत्र में सबसे धीमी विस्तार दर को दर्शाती है.

पीएमआई का क्या अर्थ है?

क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) किसी भी क्षेत्र की व्यावसायिक गतिविधियों का मापक होता है. इसमें 50 से ऊपर का स्तर विस्तार को और 50 से नीचे का स्तर संकुचन को दर्शाता है. अक्टूबर के आंकड़े भले ही घटे हों, लेकिन 58.9 का स्तर अब भी 50 के तटस्थ स्तर और 54.3 के दीर्घकालिक औसत से ऊपर है. इससे स्पष्ट है कि भारत का सेवा क्षेत्र अब भी विकास के क्षेत्र में बना हुआ है.

भारी बारिश और प्रतिस्पर्धा बनी मुख्य वजह

एचएसबीसी इंडिया की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने बताया, “अक्टूबर में सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर 58.9 तक घट गई है, जो मई के बाद से सबसे धीमी है. इस क्रमिक मंदी की मुख्य वजह भारी बारिश और बढ़ती प्रतिस्पर्धा है.” कई राज्यों में मानसून के बाद की बारिश ने सेवा क्षेत्र, विशेषकर लॉजिस्टिक्स, हॉस्पिटैलिटी और रिटेल सेवाओं को प्रभावित किया. साथ ही, बाजार में प्रतिस्पर्धी दबाव के कारण कई कंपनियों की आय में कमी देखी गई.

अंतरराष्ट्रीय मांग में सुधार

हालांकि, घरेलू गतिविधियों में कमी दर्ज की गई, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मांग में सुधार देखा गया. एचएसबीसी और एसएंडपी ग्लोबल द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, भारत की सेवा निर्यात बिक्री में वृद्धि जारी रही. यह मार्च के बाद से सबसे धीमी रही. इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक स्तर पर भारतीय सेवाओं की मांग स्थिर बनी हुई है.

कंपनियों को भविष्य को लेकर भरोसा

सर्वे में शामिल लगभग 400 सेवा कंपनियों में से अधिकांश ने कहा कि उन्हें आने वाले 12 महीनों में व्यवसाय वृद्धि की उम्मीद है. जीएसटी राहत और बढ़ती मांग से उन्हें परिचालन स्थितियों में सुधार की संभावना दिखाई दे रही है.

कंपोजिट पीएमआई में भी गिरावट

सेवा क्षेत्र की सुस्ती का असर भारत के कंपोजिट पीएमआई पर भी दिखा. सितंबर में जहां यह सूचकांक 61 था. वहीं, अक्टूबर में यह घटकर 60.4 रह गया. विनिर्माण क्षेत्र ने हल्की मजबूती दिखाई, लेकिन सेवा क्षेत्र की मंदी ने कुल वृद्धि दर को धीमा कर दिया.

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सेवा क्षेत्र में धीमी गति से विस्तार

भारतीय सेवा क्षेत्र फिलहाल धीमी गति से विस्तार कर रहा है. भारी बारिश और प्रतिस्पर्धी दबाव ने अस्थायी प्रभाव डाला है, लेकिन मजबूत मांग और वैश्विक बाजार में स्थिरता से आने वाले महीनों में सुधार की उम्मीद की जा रही है. यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में सेवा क्षेत्र दोबारा तेजी पकड़ सकता है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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