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दुबई और दोहा के लोग चखेंगे गुलाब के सुगंध वाली पंजाब की लीची, टोकरी में भर-भरके भेजा भारत

Updated at : 28 Jun 2025 11:10 PM (IST)
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Litchis Export

Litchis Export

Litchis Export: भारत ने पहली बार गुलाब की खुशबू वाली पंजाबी लीची को दुबई और दोहा निर्यात किया है. जून 2025 में 1.5 टन लीची की खेप पठानकोट से रवाना हुई, जिसमें 1 टन दोहा और 0.5 टन दुबई भेजा गया। यह कदम एपीडा, पंजाब बागवानी विभाग और लुलु ग्रुप के सहयोग से उठाया गया है. पंजाब अब भारत के लीची उत्पादन में 12% से अधिक का योगदान दे रहा है. यह निर्यात किसानों की आय बढ़ाने और वैश्विक बाजार में भारतीय फल पहुंचाने की दिशा में अहम है.

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Litchis Export: संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कतर के लोग भारत की गुलाबी सुगंध वाली लीची का स्वाद चख सकेंगे. इसका कारण यह है कि आम, अंगूर और केला जैसे फलों के बाद भारत अब गुलाब के सुगंध वाली लीची का विदेशी निर्यात शुरू कर दिया है. आम की तरह लीची भी एक ऐसा मौसमी फल है, जो गर्मी के मौसम में ही उपजता है. भारत की बागवानी को बढ़ावा देने के लिए पंजाबी लीची की पहली खेप मध्य-पूर्व के देशों में पहुंच गई है.

1.5 टन लीची की पहली खेप हुई रवाना

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) के अनुसार, जून 2025 में 1.5 टन लीची की पहली खेप पंजाब के पठानकोट से रवाना की गई. अंग्रेजी की वेबसाइट सीएनबीसी टीवी18 की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पंजाबी लीची की 1 टन की खेप कतर की राजधानी दोहा भेजी गई है. इसके अलावा, करीब 0.5 टन पंजाबी लीची संयुक्त अरब अमीरात के प्रमुख शहर दुबई के लिए निर्यात की गई है. यह निर्यात एपीईडीए, पंजाब का बागवानी विभाग और लुलु ग्रुप के साझा प्रयास से संभव हुआ है. यह साझेदारी भारत के ताजे बागवानी उत्पादों को वैश्विक बाजारों में पहचान दिलाने की दिशा में एक सशक्त कदम है.

पंजाब बना लीची उत्पादन का प्रमुख केंद्र

पंजाब लीची के उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन गया है. वर्ष 2023-24 में पंजाब ने 71,490 टन लीची का उत्पादन किया, जो भारत के कुल लीची उत्पादन का 12% से अधिक है. यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि पंजाब अब आम के अलावा लीची के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. इसी अवधि में, भारत से कुल 639.53 टन लीची का निर्यात किया गया.

बदलते वैश्विक स्वाद और भारत की भूमिका

जहां पहले आम, केला, अंगूर और संतरा ही भारत के प्रमुख निर्यात फल माने जाते थे, अब चेरी, जामुन और लीची भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहचान बना रहे हैं. एपीईडीए का मानना है कि देशी और मौसमी फलों में विदेशी ग्राहकों की बढ़ती रुचि को देखते हुए निर्यात का नया परिदृश्य तैयार हो रहा है.

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किसानों की आमदनी और निर्यात में नया अवसर

यह निर्यात न केवल भारत के फलों की विविधता को दर्शाता है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और स्थानीय कृषि को वैश्विक मंच पर लाने का जरिया भी बन रहा है. भारत सरकार का उद्देश्य कृषि निर्यात को बढ़ावा देना है और यह पहल उसी दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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