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सस्ता तेल के लिए रूस से मोल-भाव कर रहा भारत, युद्ध के दौरान रूस ने किया 63 बिलियन यूरो का निर्यात

Updated at : 04 May 2022 8:25 PM (IST)
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crude oil

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दुनिया के शक्तिशाली देशों ने रूस के साथ व्यापारिक संबंधों को खत्म करने की घोषणा की हो, उनमें से कई देश अब भी रूस से तेल, कोयला और गैस का आयात कर रहे हैं. रूस ने भारत को तेल की कीमतों में छूट का ऑफर दिया. अब भारत समेत एशिया के कई देश रूस से तेल आयात करने के लिए तेल की कीमतों पर मोल-भाव कर रहे हैं

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नयी दिल्ली: यूक्रेन पर हमला करने की वजह से अमेरिका समेत यूरोपीय देश लामबंद हो चुके हैं. रूस के खिलाफ कई सख्त प्रतिबंध लगाये गये, ताकि यूक्रेन को रूसी हमलों से बचाया जा सके. अमेरिका की अगुवाई में दुनिया भर के देशों ने रूस से व्यापारिक संबंध खत्म करने का ऐलान कर दिया. भारत ने युद्ध रोकने की अपील तो की, लेकिन प्रत्यक्ष तौर पर रूस के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया.

अमेरिका समेत यूरोपीय देश खुद कर रहे रूस से ईंधन का आयात

भले दुनिया के कई शक्तिशाली देशों ने रूस के साथ व्यापारिक संबंधों को खत्म करने की घोषणा की हो, उनमें से कई देश अब भी रूस से तेल, कोयला और गैस का आयात कर रहे हैं. रूस ने भारत को तेल की कीमतों में छूट का ऑफर दिया. अब भारत समेत एशिया के कई देश रूस से तेल आयात करने के लिए तेल की कीमतों पर मोल-भाव कर रहे हैं. भारत चाहता है कि रूस 70 डॉलर प्रति बैरल से कम कीमत पर तेल का निर्यात करे. इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल 105 डॉलर प्रति बैरल की दर से बिक रहा है.

40 मिलियन बैरल तेल का भारत ने किया है सौदा

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत के सरकारी और गैर-सरकारी रिफाइनरियों ने रूस से 40 मिलियन बैरल तेल खरीद का सौदा किया है. ब्लूमबर्ग ने वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के आधार कहा है कि वर्ष 2021 में भारत ने रूस से जितने तेल का आयात किया था, यह उससे 20 फीसदी अधिक है. रूस से भारत को होने वाले तेल के निर्यात पर प्रतिबंध नहीं लगा है. हालांकि, अमेरिका की ओर से भारत पर इस बात का दबाव बनाया जा रहा है कि वह रूस से तेल की खरीद न करे.

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पश्चिमी देशों के दबाव को पीएम मोदी ने किया दरकिनार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक पश्चिमी देशों के दबाव को दरकिनार किया है, क्योंकि मास्को की ओर से तेल पर भारी डिस्काउंट का ऑफर है. दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक भारत बहुत से हथियार रूस से आयात करता है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर भारत और रूस के बीच अगर तेल की कीमतों पर बात बन गयी, तो हमारे यहां की सरकारी रिफाइनरीज 15 मिलियन बैरल तेल का आयात कर सकती है. यह कुल आयात का 10 फीसदी है.

युद्ध के दौरान रूस ने 63 अरब यूरो का ईंधन किया निर्यात

इस बीच, सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर ने उन देशों की लिस्ट जारी की है, जिन्होंने यूक्रेन पर हमले के बाद रूस से फॉसिल फ्यूल का आयात किया है. फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद से रूस ने 63 अरब यूरो (करीब 5,061.94 अरब रुपये) का निर्यात किया है. जिन देशों ने सबसे ज्यादा खरीद की है, उसमें जर्मनी, इटली, चीन, नीदरलैंड्स, तुर्की, फ्रांस, बेल्जियम, स्पेन, दक्षिण कोरिया, पोलैंड, स्लोवाकिया, हंगरी, ऑस्ट्रिया, ग्रीस, चेक रिपब्लिक, जापान, बुल्गारिया, अमेरिका और मिस्र शामिल हैं.

ईयू ने 71 फीसदी ईंधन का किया आयात

बता दें कि यूरोपियन यूनियन, जो पूरी तरह से रूस के खिलाफ खड़ा है, ने 71 फीसदी फॉसिल फ्यूल (कोयला, तेल उत्पाद, एलएनजी, कोयला, क्रूड ऑयल, पाइपलाइन गैस) आयात किया. चीन, कोरिया, जापान और अमेरिका ने भी भारत से ज्यादा ईंधन का आयात रूस से किया है.

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