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मंदिरों में पड़ा 2137 किलो सोना पिघलायेगी सरकार, तमिलनाडु में 42 सालों से चल रही है योजना

Updated at : 23 Oct 2021 1:44 PM (IST)
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मंदिरों में पड़ा 2137 किलो सोना पिघलायेगी सरकार, तमिलनाडु में 42 सालों से चल रही है योजना

तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सरकार राज्य के मंदिरों का सोना पिघलाने की योजना लेकर आयी है. इन्हें पिघला कर 24 कैरेट के गोल्ड बार्स बनाये जायेंगे. स्टालिन सरकार ने बताया कि अब तक मंदिरों में रखे 500 किलो सोने को पिघला कर बैंकों में डिपॉजिट किया गया है

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तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सरकार राज्य के मंदिरों का सोना पिघलाने की योजना लेकर आयी है. इन्हें पिघला कर 24 कैरेट के गोल्ड बार्स बनाये जायेंगे. स्टालिन सरकार ने बताया कि अब तक मंदिरों में रखे 500 किलो सोने को पिघला कर बैंकों में डिपॉजिट किया गया है और इससे राज्य सरकार को ब्याज के रूप में 11 करोड़ रुपये की कमाई हुई है. इसके बाद सरकार ने 2,137 किलोग्राम सोने को पिघलाने का फैसला लिया है.

राज्य सरकार का कहना है कि ये वो सोना है, जो मंदिरों के नियंत्रण में है और जिनका उपयोग नहीं हो पा रहा. योजना के तहत सबसे पहले तिरुवरकाडु के श्री कुमारीअम्मन मंदिर, समयपुरम के मरियम्मन मंदिर और ईरुक्कनकुडी के मरियम्मन मंदिर के सोने पिघलाये जायेंगे. सरकार ने बताया कि सोने को पिघला कर गोल्ड बार्स बनाये जाने के बाद उन्हें राष्ट्रीय बैंकों में डिपॉजिट किया जायेगा और उससे जो रुपये आयेंगे, उसका इस्तेमाल ‘स्टेट हिंदू चैरिटेबल एंड रिलीजियस एंडोमेंट्स’ विभाग द्वारा मंदिरों के विकास में किया जायेगा.

सरकार का कहना है कि वो श्रद्धालुओं द्वारा दान में दिये गये सिर्फ उन्हीं सोने के आभूषणों को पिघलायेगी, जिनका पिछले 10 वर्षों से इस्तेमाल नहीं हुआ है. जिन आभूषणों का इस्तेमाल देवी-देवताओं के शृंगार में किया जाता है, उन्हें हाथ भी नहीं लगाया जायेगा. सरकार के इस फैसले के खिलाफ अदालत में याचिकाएं दाखिल हुई हैं. इसमें कहा गया है कि ये प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है.

  • अभी केवल नौ प्रमुख मंदिरों में दान दिये गये सोने को पिघलाया जाता है

  • 500 किलो सोने से सरकार को ब्याज के रूप में मिले 11 करोड़

  • 38,000 मंदिरों में रखे गये सोने पिघलाये जायेंगे अब

  • 10,000 करोड़ रुपये से अधिक है सोने का मूल्य

तमिलनाडु में 42 वर्षों से चल रही है ये योजना: तमिलनाडु सरकार ने कहा है कि मंदिरों के सोने को ‘मोनेटाइज’ करने की योजना 1979 में ही आ गयी थी. बताया गया है कि इसके तहत नौ प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा दान में दिये जाने वाले सोने को पिघलाया जाता है, जिनमें मदुरै का प्राचीन मीनाक्षी सुन्दरीश्वर मंदिर, पलानी का धनदायुथपानी मंदिर, तिरुचेंदूर का श्री सुब्रमण्य स्वामी मंदिर और समापुरम का मरियम्मम मंदिर शामिल है. इस कदम के खिलाफ दायर याचिकाओं में कहा गया है कि ये आभूषण मंदिरों के हैं और भक्तों ने इन्हें दान में दिया है, इसीलिए सरकार को इन्हें छूने का कोई हक नहीं है.

Posted by: Pritish Sahay

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