हिंडनबर्ग रिसर्च बंद, लेकिन नैट एंडरसन अब भी अदाणी रिपोर्ट पर कायम, जानें पूरी सच्चाई
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 04 Feb 2025 6:39 PM
हिंडनबर्ग रिसर्च और उसके संस्थापक नैट एंडरसन.
Hindenburg Research: हिंडनबर्ग रिसर्च अब बंद हो चुका है, लेकिन नैट एंडरसन अब भी अदाणी ग्रुप के खिलाफ रिपोर्ट पर कायम हैं. भारत में नियामकों की निष्क्रियता को लेकर हिंडनबर्ग रिसर्च ने सवाल उठाए, लेकिन रिपोर्ट को भारत विरोधी एजेंडा बताने से इनकार किया. अमेरिकी जांच एजेंसियों से संबंध और हेज फंड से मिलीभगत के आरोपों को एंडरसन ने गलत बताया.
हाइलाइट्स
- हिंडनबर्ग रिसर्च बंद: नैट एंडरसन का दावा – “किसी कानूनी या वित्तीय दबाव के कारण नहीं हुआ बंद.”
- अदाणी समूह पर रिपोर्ट: 2023 की रिपोर्ट को अब भी सही मानते हैं एंडरसन
- सेबी और कोर्ट की प्रतिक्रिया: अदाणी पर लगे आरोपों पर नियामकों की भूमिका सवालों के घेरे में
- भारत विरोधी एजेंडा?: एंडरसन ने ओसीसीआरपी और जॉर्ज सोरोस से संबंधों को बताया बेबुनियाद
- अमेरिकी जांच एजेंसियों से संबंध: एंडरसन का दावा, एसईसी और अमेरिकी न्याय विभाग की जांच से कोई लेना-देना नहीं
Hindenburg Research: अमेरिकी शॉर्ट-सेलर कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च के संस्थापक नैट एंडरसन ने घोषणा की कि वे अपना कारोबार समेट रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय किसी कानूनी या वित्तीय संकट के कारण नहीं लिया गया, बल्कि व्यक्तिगत कारणों से किया गया है. नैट एंडरसन ने कहा, “मैं ब्रांड से अलग नहीं हो सकता. हिंडनबर्ग मेरे नाम का पर्याय बन चुका है. यह कोई सॉफ्टवेयर या कारखाना नहीं है, जिसे बेचा जा सके.”
अदाणी ग्रुप पर हिंडनबर्ग रिपोर्ट: अब भी कायम है कंपनी
जनवरी 2023 में हिंडनबर्ग ने अदाणी ग्रुप पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें कॉरपोरेट इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला करने का आरोप लगाया गया था. रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि अदाणी ग्रुप ने शेयर हेरफेर और वित्तीय अनियमितताएं की हैं. इस रिपोर्ट के बाद अदाणी ग्रुप को भारी नुकसान हुआ था और उसके शेयरों की वैल्यू में 150 अरब डॉलर तक की गिरावट दर्ज की गई थी. हालांकि, अदाणी ग्रुप ने इन सभी आरोपों का सिरे से खंडन किया था और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस रिपोर्ट के आधार पर दायर की गई याचिकाओं को खारिज कर दिया था.
क्या हिंडनबर्ग भारत विरोधी एजेंडा चला रहा था?
अदाणी रिपोर्ट के बाद हिंडनबर्ग रिसर्च पर यह आरोप लगाया गया कि वह ओसीसीआरपी और जॉर्ज सोरोस जैसे कथित भारत विरोधी संगठनों के साथ मिला हुआ है. समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए साक्षात्कार में इस पर नैट एंडरसन ने साफ इनकार करते हुए कहा, “यह एक मूर्खतापूर्ण षड्यंत्र है. हमने कभी इस पर प्रतिक्रिया नहीं दी, क्योंकि हम ऐसे निराधार दावों को बढ़ावा नहीं देते.” उन्होंने यह भी कहा कि भारत की आर्थिक क्षमता पर हमेशा विश्वास रहा है और उनकी रिपोर्ट का उद्देश्य भारतीय बाजार को पारदर्शी बनाना था.
भारतीय नियामकों की भूमिका और सेबी की निष्क्रियता
हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच पर आरोप लगे कि उन्होंने हितों के टकराव के कारण अदाणी ग्रुप के खिलाफ उचित जांच नहीं की. माधबी पुरी बुच ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने सभी नियमों का पालन किया था.
अमेरिकी जांच एजेंसियों से हिंडनबर्ग का संबंध?
कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि हिंडनबर्ग रिसर्च अमेरिकी न्याय विभाग और एसईसी की जांच के दायरे में था. लेकिन, नैट एंडरसन ने इसे पूरी तरह गलत बताया और कहा, “इसका मेरे फैसले से कोई लेना-देना नहीं है.” उन्होंने कहा कि हेज फंड्स के साथ रिपोर्ट साझा करने के आरोप भी बेबुनियाद हैं.
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क्या अदाणी पर लगे आरोप सही थे?
नैट एंडरसन ने यह भी स्पष्ट किया कि वे अदाणी रिपोर्ट के निष्कर्षों पर पूरी तरह कायम हैं. उन्होंने कहा, “हमारे पास जो भी डेटा और प्रमाण थे, वे सार्वजनिक डोमेन में मौजूद हैं. अदाणी ग्रुप के खिलाफ रिपोर्ट मीडिया में पहले से आ रही खबरों का विस्तार था.”
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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