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आधा भारत नहीं जानता होंडा का कॉरपोरेट कलर क्यों है लाल, जान जाएगा तो कर देगा कमाल

Updated at : 28 Jun 2025 7:48 PM (IST)
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Honda Corporate Color

Honda Corporate Color

Honda Corporate Color: होंडा का कॉरपोरेट कलर लाल क्यों है, यह बहुत कम लोग जानते हैं. कंपनी ने इसे "होंडा रेड" नाम दिया है, जो जुनून, इनोवेशन और गुणवत्ता का प्रतीक है. 1960 के दशक में जापान में कानूनी प्रतिबंधों के बावजूद सोइचिरो होंडा के संघर्ष और दृष्टिकोण ने लाल रंग को पहचान दिलाई. आज होंडा की अधिकांश गाड़ियां और उपकरण इसी रंग में दिखते हैं.

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Honda Corporate Color: जापान की दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी का नाम होंडा है. होंडा पहले हीरो मोटोकॉर्प के साथ मिलकर भारत में दोपहिया वाहनों की बिक्री करती थी. इन दोनों की साझेदारी से ‘हीरो होंडा’ नाम से मोटरसाइकिलें आती थीं. लेकिन, अब हीरो से होंडा अलग हो गई. होंडा आज भी भारत के लोगों के जेहन में अपनी जगह बनाए हुई है और इसकी प्राय: सभी गाड़ियां लाल रंग की आती हैं. इसके कार्यालयों के इंटीरियर और एक्सटीरियर डिजाइन भी चटकदार लाल रंग का होता है. देश के अधिकांश लोग नहीं जानते होंगे कि होंडा का कॉरपोरेट कलर लाल ही क्यों हैं? आइए, इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.

होंडा की 75वीं वर्षगांठ पर नया अपडेट

होंडा मोटर्स एंड स्कूटर इंडिया ने प्रोफेशनल्स स्पेशल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर अपने एक पोस्ट में कंपनी के कॉरपोरेट कलर चटकीला लाल रंग का राज खोला है. अपने लंबे-चौड़े लेख में कंपनी ने खुलासा किया है कि होंडा के लोगो में इस्तेमाल किया गया चटकीला लाल रंगर एक कॉरपोरेट कलर है, जिसे कंपनी ने “होंडा रेड” के नाम से खास तौर पर नामित किया है. साल 2023 में होंडा की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर होंडा ने अपनी आधिकारिक अपडेटेड लाइनअप में होंडा रेड कलर की पेंसिल को शामिल किया है और अक्टूबर 2023 से इसे बिक्री के लिए उपलब्ध कराया है, ताकि होंडा रेड को नए सिरे से देखा जा सके और इसे और फैलाया जा सके.

1960 के दशक में होंडा ने शुरू की प्रक्रिया

होंडा ने अपने पोस्ट में लिखा है, ”एक समय जापान में लाल या सफेद रंग की कारों की अनुमति नहीं थी. यह होंडा ही थी, जिसने 1960 के दशक में इस विनियमन को संशोधित किया था. 1950 के दशक में जापान का ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे अन्य देशों से पिछड़ रहा था. अंतरराष्ट्रीय व्यापार और उद्योग मंत्रालय (एमआईटीआई, वर्तमान में अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय) ने “राष्ट्रीय कार कॉन्सेप्ट” की घोषणा की, जिसके तहत ऑटो निर्माताओं ने मंत्रालय की ओर से निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले ऑटोमोबाइल पेश करने के लिए एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा की. इस समय कारें फोर-सीटर, 100 किमी प्रति घंटा की अधिकतम गति और 150,000 येन की कीमत पर बेची जाती थीं. होंडा ने ऑटोमोबाइल बाजार में उतरने के लिए विकास करने के लिए युवा इंजीनियरों को इकट्ठा करना शुरू कर दिया, जो उस समय एक मोटरसाइकिल निर्माता थी.

होंडा को रोकने के लिए नया कानून

हालांकि, जब विकास अभी भी प्रक्रिया में था. एमआईटीआई ने एक बुनियादी ऑटोमोटिव प्रशासनिक नीति (बाद में निर्दिष्ट उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए अस्थायी उपायों के लिए कानून) निर्धारित की. ये कानून ऑटोमोबाइल निर्माताओं के उन्मूलन/समेकन और नए निर्माताओं के प्रवेश पर प्रतिबंध के लिए थे. होंडा को इस हद तक घेर लिया गया था कि अगर ये कानून पारित हो जाते, तो वह ऑटोमोबाइल उद्योग में प्रवेश नहीं कर पाती.

कानून से बचने के लिए होंडा ने प्रोडक्ट का डिजाइन

हालांकि, होंडा मोटर कंपनी लिमिटेड के संस्थापक सोइचिरो होंडा ने इस विश्वास के साथ इसका विरोध किया कि मुक्त प्रतिस्पर्धा एक उद्योग को पोषित करती है, लेकिन सरकार ने कानूनों को प्रस्तुत करने की दिशा में कदम नहीं बदले. इसलिए, होंडा को कानूनों के पारित होने से पहले ऑटोमोबाइल उत्पादन का इतिहास रखने के लिए दो प्रकार की चार पहिया स्पोर्ट्स कारों और दो प्रकार के मिनी ट्रकों के डिजाइन और विकास में तेजी लानी पड़ी.

होंडा के जुनून से जापान में आई पहली लाल कार

उस समय एक स्टाइलिंग डिजाइनर ने स्पोर्ट्स 360 के प्रोटोटाइप को लाल नारंगी रंग में रंगा, ताकि यह थोड़ा और अलग दिखे. जब सोइचिरो होंडा ने इसे देखा, तो इसे पसंद किया. इसलिए, उन्होंने अगले नए मॉडल पर लाल रंग अपनाने की अनुमति दे दी. लेकिन, उस समय जापान में घरेलू बाजार के लिए कार की बॉडी पर लाल रंग का इस्तेमाल करना कानूनन प्रतिबंधित था. इसका कारण यह था कि लाल वाहनों को आपातकालीन वाहनों जैसे कि दमकल और एम्बुलेंस के साथ भ्रमित किया जा सकता था.

सोइचिरो होंडा ने एक अखबार के माध्यम से की अपील की.

होंडा मोटर कंपनी लिमिटेड के संस्थापक सोइचिरो होंडा ने लाल रंग के पक्ष में अखबारों में कॉलम के जरिए सरकार और आम जनता से अपील की. उन्होंने अखबारों के माध्यम से बताया, ”लाल डिजाइन का एक बुनियादी रंग है. वे इसे कानून द्वारा कैसे प्रतिबंधित कर सकते हैं? मैंने दुनिया के किसी दूसरे शीर्ष राष्ट्र के बारे में नहीं सुना है, जिसमें सरकारी रंगों के इस्तेमाल पर एकाधिकार करता है.” होंडा के प्रभारी व्यक्ति ने लाल रंग के इस्तेमाल की स्वीकृति हासिल करने के लिए परिवहन मंत्रालय (वर्तमान में भूमि, अवसंरचना और परिवहन मंत्रालय) के लगातार दौरे किए.

लेख में लिखा है कि जिस बुनियादी ऑटोमोटिव प्रशासनिक नीति ने होंडा को ऑटोमोबाइल विकास पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया था, वह अंततः पारित नहीं हुई. हालांकि, होंडा के लिए यह चुनौती कभी भी निरर्थक नहीं थी. इसका परिणाम न केवल ऑटोमोबाइल बाजार में उद्यम के रूप में सामने आया, बल्कि विकास प्रौद्योगिकियों और “लाल कार” को भी महत्वपूर्ण संपत्ति के रूप में विरासत में मिला.

चटकीले लाल प्रोडक्ट से प्रेरित “होंडा बवंडर”

ऑटोमोबाइल और मोटरसाइकिल उत्पादन के अलावा होंडा आम जनजीवन और काम के लिए आवश्यक बिजली उपकरणों जैसे टिलर, जनरेटर, स्नो ब्लोअर और लॉन मोवर के निर्माण के लिए गतिशीलता उत्पाद विकास में विकसित अपनी इंजन प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाता है. इन बिजली उत्पादों के लिए मुख्य रंग भी लाल है. हालांकि, आजकल लाल उत्पाद होंडा से जुड़े हुए हैं और चमकीले लाल रंग की होंडा दुनिया भर में देखी जा सकती हैं, लेकिन होंडा शुरू से ही उद्योग में अब की तरह अग्रणी कंपनी नहीं थी.

ऑटोमोबाइल की विकास यात्रा में होंडा अपने किसी भी डोमेन में एक अनुयायी कंपनी थी. 1952 में होंडा ने “क्यूब टाइप एफ” लॉन्च किया, जो एक सहायक मोटर थी, जिसे साइकिल में लगाया जा सकता था. इसका कैच लाइन “सफेद टैंक, लाल इंजन” था. अपने छोटे और हल्के डिजाइन और नए स्टाइल के कारण यह उत्पाद लोकप्रिय हो गया, जिससे यह छवि फैल गई कि “होंडा का इंजन लाल है.”

जब कंपनी को मिला होंडा व्हर्लविंड का खिताब

लेख में लिखा गया है, ”हालांकि, अब इसकी पुष्टि करने के लिए कोई दस्तावेज नहीं बचा है. लेकिन, ऐसा माना जाता है कि यह छवि “एफ150” में भी दिखाई देती है, जब होंडा का पहला टिलर बाजार में पेश किया गया था, जिसे चमकीले लाल रंग से रंगा गया था. अभिनव विचारों से भरा यूजर्स-केंद्रित एफ150 ने बाजार में विस्फोटक बिक्री हासिल की, जहां पहले से ही कई प्रतिस्पर्धियों के समान उत्पाद मौजूद थे. इससे इसे “होंडा व्हर्लविंड” का खिताब मिला. तब से, लाल रंग होंडा टिलर के लिए मुख्य रंग बन गया है.

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होंडा रेड ले जाने का अर्थ

2001 में होंडा ने लाल रंग को कॉर्पोरेट रंग “होंडा रेड” के रूप में नामित किया. होंडा उत्पादों और इसकी मोटर स्पोर्ट्स गतिविधियों से जुड़ी एक रोमांचक छवि के अलावा होंडा ब्रांड की गुणवत्ता की भावना और इंजीनियरिंग क्षमताओं को व्यक्त करने के लिए गहरे समृद्ध लाल रंग को अपनाया गया है. होंडा अपने उत्पादों में उच्च गुणवत्ता और इंजीनियरिंग क्षमताओं द्वारा समर्थित ठोस विश्वसनीयता को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है, जो इस लाल रंग में व्यक्त की गई है. साथ ही, सोइचिरो होंडा से प्राप्त दर्शन भी इसका मिसाल बना हुआ है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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