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जीएसटी रिटर्न फाइल नहीं करने वालों के लिए जरूरी इन्फॉर्मेशन, 1 सितंबर से GSTR-1 भरना आसान नहीं, जानें क्यों?

जीएसटीएन के अनुसार, जहां व्यापार इकाइयां किसी महीने का जीएसटीआर-1 उसके अगले महीने के 11 वें दिन तक दाखिल करती हैं.

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
जीएसटी रिटर्न फाइल नहीं करने वालों को चेतावनी.
जीएसटी रिटर्न फाइल नहीं करने वालों को चेतावनी.
फाइल फोटो.

GST Return : वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) रिटर्न दाखिल करने वाले कारोबारियों के लिए एक जरूरी खबर है. टैक्सपेयर जिन कारोबारियों ने पिछले दो महीने से जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं किया है, उन्हें आने वाले दिनों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. दो महीने से टैक्स भुगतान करने से बचने वाले कारोबारी आगामी 1 सितंबर से जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं कर पाएंगे.

जीएसटीएन (जीएसटी नेटवर्क) ने शुक्रवार कहा है कि टैक्स भरने वाले जिन कारोबारियों ने पिछले दो महीनों से जीएसटीआर-3बी रिटर्न दाखिल नहीं किया है, वे 1 सितंबर से बाहर भेजी जाने वाली सप्लाई का ब्योरा जीएसटीआर-1 में फाइल नहीं कर पाएंगे. जीएसटीएन के अनुसार, जहां व्यापार इकाइयां किसी महीने का जीएसटीआर-1 उसके अगले महीने के 11 वें दिन तक दाखिल करती हैं, जीएसटीआर-3बी को अगले महीने के 20-24 दिन के अंदर क्रमबद्ध तरीके से दाखिल किया जाता है. व्यवसायिक इकाइयां जीएसटीआर-3बी के जरिए कर भुगतान करती हैं.

जीएसटी के लिए तकनीकी सुविधाओं का प्रबंधन करने वाले जीएसटीएन ने टैक्सपेयर्स के लिए जारी एक परामर्श में कहा है कि केंद्रीय जीएसटी नियमों के तहत नियम-59 (6) आगामी 1 सितंबर 2021 से अमल में आ जाएगा. इस नियम के लागू हो जाने के बाद जीएसटीआर-1 दाखिल करने पर रोक लग जाएगी.

जीएसटी नियम के अनुसार, यदि किसी रजिस्टर्ड कारोबारी ने पिछले दो महीने के दौरान फार्म जीएसटीआर-3बी में रिटर्न फाइल नहीं किया है, तो ऐसे रजिस्टर्ड व्यक्ति को वस्तु या सेवाओं या दोनों की दी गई सप्लाई का ब्योरा फॉर्म जीएसटीआर-1 में दाखिल करने की मंजूरी नहीं मिलेगी. इसके साथ ही, ऐसे कारोबारी जो हर तीन महीने पर रिटर्न दाखिल करते हैं, यदि उन्होंने पिछली कर अवधि के दौरान फार्म जीएसटीआर-3बी में रिटर्न फाइल नहीं किया है, तो उनके लिए भी जीएसटीआर-1 दाखिल फाइल करना आसान नहीं होगा.

ईवाई कर भागीदार अभिषेक जैन ने कहा कि यह सोचा विचारा प्रतिबंध है. यह एक प्रकार से जरूरी नियंत्रण निगरानी भी है. ऐसे कई मामले होते हैं, जहां टैक्सपेयर्स जीएसटीआर-1 में अपने सप्लाई चालान रिपोर्ट करते रहते हैं, लेकिन उसके साथ ही जीएसटीआर-3बी रिटर्न जमा नहीं कराते हैं, जिसके द्वारा वास्तव में सरकार को कर का भुगतान किया जाता है.

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