सोने-चांदी की चमक पड़ी फीकी, युद्ध के बावजूद क्यों धड़ाम गिरी कीमतें ?

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Gold-Silver Price

सांकेतिक तस्वीर (फोटो : Canva )

Gold-Silver Price: युद्ध के माहौल में जहां सोने-चांदी को महंगा होना चाहिए था, वहां इनकी कीमतों में भारी गिरावट आई है. सोने में 4% और चांदी में लगभग 9% की इस गिरावट की मुख्य वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, मजबूत डॉलर और ब्याज दरों में कटौती की कम होती उम्मीदें हैं. फिलहाल निवेशकों का भरोसा सोने से हटकर एनर्जी मार्केट (तेल) की तरफ मुड़ गया है, जिससे कीमती धातुओं के दाम एक महीने के निचले स्तर पर पहुँच गए हैं.

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Gold-Silver Price: आमतौर पर जब दुनिया में युद्ध जैसे हालात होते हैं, तो सोने और चांदी के दाम आसमान छूने लगते हैं. लेकिन इस बार उलटा हो रहा है. अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और बाजार में उथल-पुथल के बावजूद, सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. सोना करीब 4% और चांदी लगभग 9% तक टूट गई है.

आखिर क्यों गिर रहे हैं दाम ?

निवेशक अब सोने-चांदी के बजाय दूसरी जगहों पर पैसा लगा रहे हैं. इसके पीछे 3 मुख्य कारण हैं.

  • तेल की बढ़ती ताकत: युद्ध की वजह से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें $100 के पार चली गई हैं. निवेशक सोने के बजाय तेल में पैसा लगाना ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं. यानी ‘सुरक्षित निवेश’ के तौर पर तेल ने सोने की जगह ले ली है.
  • महंगाई और ब्याज दरें: जब दुनिया में महंगाई बढ़ती है, तो उम्मीद की जाती है कि केंद्रीय बैंक (जैसे अमेरिका का Fed) ब्याज दरों में कटौती नहीं करेंगे. जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो लोग सोने के बजाय बैंक डिपॉजिट या बॉन्ड्स में पैसा लगाना पसंद करते हैं क्योंकि वहां से उन्हें ब्याज मिलता है (सोने से कोई नियमित ब्याज नहीं मिलता).
  • डॉलर की मजबूती: अमेरिकी डॉलर इस समय बहुत मजबूत हो रहा है. जब डॉलर मजबूत होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग कम हो जाती है और कीमतें गिरती हैं.

क्या अब सोना खरीदना सही है ?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक महंगाई कम नहीं होती या डॉलर कमजोर नहीं पड़ता, तब तक सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है. हालांकि, कुछ लोग इसे कम दाम में खरीदने का मौका भी मान रहे हैं, लेकिन अभी सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है.

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Abhishek Pandey

लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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