धूल फांक रही आसमान छू रही हसरतें, हिंडनबर्ग धमाके के बाद अर्श से फर्श पर पहुंच गये गौतम अदाणी

Published by : Pritish Sahay Updated At : 30 Mar 2023 12:41 PM

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अडानी ग्रुप फिलहाल कैश बचाने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है. गौरतलब है कि हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट आने के बाद अदाणी समूह विवादों में घिरा है. इस रिपोर्ट के कारण गौतम अदाणी के शेयर के भाव जमीन पर आ गये. उनकी संपत्ति में जबरदस्त गिरावट आयी, और अमीरों की लिस्ट से भी वो बाहर हो गये.

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कभी एशिया के नंबर वन और दुनिया के टॉप 10 अमीरों की सूची में शामिल गौतम अदाणी का व्यवसायिक साम्राज्य तिनके की तरह बिखर गया है. हिंडनबर्ग की एक रिपोर्ट ने गौतम अदाणी को अर्श से फर्श पर ला दिया. एक अनुमान के मुताबिक अदाणी समूह की सात लिस्टेड फर्मों का मार्केट वैल्यू 125 अरब डॉलर घटा है. रिपोर्ट आने के बाद गौतम अदाणी अमीरों की फेहरिस्त से बाहर होते चले गए. फिलहाल वो टॉप 20 से भी बाहर हैं.

रफ्तार पर लगा ब्रेक: हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद अदाणी समूह के शेयरों में भारी गिरावट आयी थी. कंपनी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था. हालांकि अदाणी समूह के कुछ शेयरों के भाव इन दिनों जरूर चढ़े हैं लेकिन अभी भी उन पर भारी कर्ज है. हालांकि अदाणी ग्रुप तेजी से वित्तीय हालात में सुधार करने की दिशा में काम कर रहा है. बिजली उत्पादन, पोर्ट और न्यू ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में और आगे बढ़ाने की दिशा में कंपनी काम कर रही है.

डरे हुए है सहयोगी: अदाणी कंपनी में आयी उधल-पुथल से उसके सहयोगी कंपनियां भी डरे हुए हैं. हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पेरिस स्थित  टोटल इनर्जिस एसई (Total Energies SE) पहले से ही अदाणी समूह के साथ एक ग्रीन हाइड्रोजन पार्टनरशिप परियोजना को होल्ड पर रख दिया है. इसके अलावा बीते महीने फरवरी में अडानी ग्रुप ने मध्य भारत में एक कोयला खदान खरीदने की योजना को भी रद्द कर दिया. इसके अलावा पीटीसी इंडिया लिमिटेड में हिस्सेदारी के लिए बोली भी नहीं लगाई. अदाणी समूह ने डीबी पावर के अधिग्रहण से भी अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं.

कैश बचाने पर ध्यान दे रहा है अदाणी ग्रुप: मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अडानी ग्रुप फिलहाल कैश बचाने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है. गौरतलब है कि हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट आने के बाद अदाणी समूह विवादों में घिरा है. इस रिपोर्ट के कारण गौतम अदाणी के शेयर के भाव जमीन पर आ गये. उनकी संपत्ति में जबरदस्त गिरावट आयी, और अमीरों की लिस्ट से भी वो बाहर हो गये. हालांकि अडानी ग्रुप ने हिंडनबर्ग के सभी आरोपों को खारिज किया है.

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सेबी प्रमुख ने अदाणी मुद्दे पर साधी चुप्पी: वहीं, सेबी की चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच ने अडाणी मुद्दे पर किसी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. विवाद को लेकर उनका कहना है कि फिलहाल यह मामला अदालत में है.  बता दें, अदाणी और हिंडनबर्ग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी का गठन किया है, कमेटी में सर्वोच्च न्यायालय ने 6 सदस्यों को शामिल किया हैं. यह कमेटी दो महीने के भीतर कोर्ट को अपनी रिपोर्ट देगी. 

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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