जंग का असर भारतीय बजट पर, जानें क्यों 9 दिनों में तीसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम

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Fuel price Hike (Photo: Freepik)

Fuel price Hike: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 9 दिनों के भीतर तीसरी बार हुआ इजाफा. जानिए आखिर क्यों सरकारी तेल कंपनियां बार-बार बढ़ा रही हैं फ्यूल के दाम और क्या है वजह.

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Fuel price Hike: कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों का सीधा असर अब भारतीय आम जनता की जेब पर पड़ने लगा है. शनिवार की सुबह देश की सरकारी तेल कंपनियों ने एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है. पिछले 9 दिनों के भीतर यह तीसरी बड़ी बढ़ोतरी है. इन तीन झटकों को मिलाकर अब तक तेल की कीमतों में कुल 4.8 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हो चुका है.

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क्यों बार-बार बढ़ रहे हैं तेल के दाम?

इस समय हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और इंडियन ऑयल (IOC) जैसी सरकारी तेल कंपनियां भारी नुकसान से गुजर रही हैं. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसी महीने बताया था कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1FY27) में भारतीय तेल कंपनियों को करीब 1 से 1.2 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान होने का अनुमान है. जब यह संकट शुरू हुआ था, तब ये तीनों कंपनियां मिलकर हर रोज करीब 1,000 करोड़ रुपये का घाटा खुद झेल रही थीं, जिसे लंबे समय तक जारी रखना किसी भी कंपनी के लिए मुमकिन नहीं था. इसी घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया गया है.

कब और कितनी बार बढ़ीं कीमतें?

घाटे को कम करने के लिए तेल कंपनियों ने 9 दिनों में तीन चरणों में कीमतें बढ़ाई हैं:

  • 15 मई: पहली बार सीधे 3 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की गई.
  • 19 मई: दूसरी बार कीमतों में 90 पैसे प्रति लीटर का इजाफा हुआ.
  • 23 मई (शनिवार सुबह): तीसरी बार फिर दाम 90 पैसे प्रति लीटर बढ़ा दिए गए.

कमाई और घाटे पर क्या असर पड़ेगा?

भारत में हर रोज लगभग 463 मिलियन (46.3 करोड़) लीटर पेट्रोल-डीजल की खपत होती है, जिसमें 308 मिलियन लीटर डीजल और 155 मिलियन लीटर पेट्रोल शामिल है. देश के कुल बाजार पर 90% कब्जा इन्हीं तीनों सरकारी कंपनियों का है, यानी हर रोज इनके पंपों से करीब 417 मिलियन लीटर फ्यूल बिकता है. 

जानकारों के मुताबिक, फ्यूल के मार्जिन में हर 50 पैसे की बढ़ोतरी से इंडियन ऑयल (IOCL) की कमाई (EBITDA) 7%, भारत पेट्रोलियम (BPCL) की 8% और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) की कमाई 11% तक बढ़ जाती है. 

अब तक कितना घाटा कम हुआ?

  • पहली बढ़ोतरी (15 मई): 3 रुपये की बढ़त से रोजाना का घाटा 25% कम होकर 750 करोड़ रुपये पर आ गया. 
  • दूसरी बढ़ोतरी (19 मई): 90 पैसे की वृद्धि से घाटे में 5% की और कमी आई और यह 710 करोड़ रुपये रह गया. 
  • तीसरी बढ़ोतरी (23 मई): शनिवार को हुए 90 पैसे के इस तीसरे इजाफे से कंपनियों को हर रोज 38 करोड़ रुपये की अतिरिक्त रिकवरी होगी. 

इन तीनों लगातार बढ़ोतरी की बदौलत तेल कंपनियां अपने शुरुआती 1,000 करोड़ रुपये के दैनिक घाटे का लगभग 35% हिस्सा वसूलने में कामयाब रही हैं. हालांकि, जब तक इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक राहत की उम्मीद कम है.

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