शहरों की किचकिच होगी खत्म ! आनंद महिंद्रा ने बताया कैसे इकोनॉमिक सर्वे बदलेगा शहरों की तस्वीर

Economic Survey
Economic Survey: महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया पर इस सर्वे की तारीफ करते हुए कहा कि इस बार सरकार ने शहरों को सिर्फ "प्रशासनिक समस्या" नहीं, बल्कि देश की आर्थिक ताकत का केंद्र माना है. आइए जानते हैं कि इस सर्वे में शहरों को लेकर क्या खास बातें कही गई हैं और यह आम आदमी की जिंदगी कैसे बदल सकता है.
Economic Survey: कल यानी 20 जनवरी 2026 को पेश हुए इकोनॉमिक सर्वे ने एक ऐसी बात कही है जिसने उद्योगपति आनंद महिंद्रा का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया पर इस सर्वे की तारीफ करते हुए कहा कि इस बार सरकार ने शहरों को सिर्फ “प्रशासनिक समस्या” नहीं, बल्कि देश की आर्थिक ताकत का केंद्र माना है. आइए जानते हैं कि इस सर्वे में शहरों को लेकर क्या खास बातें कही गई हैं और यह आम आदमी की जिंदगी कैसे बदल सकता है.
शहरों के लिए 20 साल का मास्टर प्लान
सर्वे में एक बहुत बड़ा सुझाव दिया गया है: हर वह शहर जिसकी आबादी 10 लाख (1 मिलियन) से ज्यादा है, उसे अगले 20 सालों के लिए ‘सिटी स्पेशल एंड इकोनॉमिक प्लान’ तैयार करना होगा.
क्या होगा खास: यह कोई पुराना कागजी प्लान नहीं होगा, बल्कि इसे हर 5 साल में अपडेट किया जाएगा ताकि बदलती जरूरतों के हिसाब से शहर को ढाला जा सके.
शहरों को लेकर बदली सोच: “प्रॉब्लम” नहीं, “एसेट” हैं शहर
आनंद महिंद्रा के अनुसार, अब तक की नीतियों में शहरों को सिर्फ ट्रैफिक, भीड़भाड़ और झुग्गियों वाली जगह माना जाता था जिन्हें बस “मैनेज” करना पड़ता था. लेकिन इस बार सर्वे ने माना है कि शहर ‘स्ट्रैटेजिक एसेट’ यानी ऐसी संपत्ति हैं जो देश की GDP को तेजी से बढ़ा सकते हैं. अगर शहरों को सही संस्थागत और वित्तीय ढांचा मिले, तो वे इनोवेशन और रोजगार का गढ़ बन सकते हैं.
जमीन के सही इस्तेमाल पर जोर (Land & Housing)
शहरों में घर महंगे क्यों हैं? सर्वे के मुताबिक, जमीन से जुड़े कानूनों और पुराने नियमों की वजह से समस्या बढ़ती है. इसे ठीक करने के लिए कुछ कदम सुझाए गए हैं:
- साफ टाइटल (Clear Titles): जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद कम करना.
- बेहतर डेंसिटी नॉर्म्स: जमीन का सही और सघन उपयोग ताकि लोग कम जगह में बेहतर ढंग से रह सकें.
- ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट: यानी जहां ट्रांसपोर्ट की सुविधा हो, उसके आसपास रिहायशी इलाके विकसित करना ताकि ‘शहरों का फैलाव’ कम हो और सस्ते घर मिल सकें.
गाड़ियां नहीं, लोग हैं जरूरी (Focus on Mobility)
ट्रैफिक की समस्या को लेकर सर्वे में कहा गया है कि गाड़ियों के बजाय लोगों को प्राथमिकता दें. शहर की तरक्की तब नहीं होती जब सड़क पर गाड़ियां बढ़ें, बल्कि तब होती है जब पब्लिक ट्रांसपोर्ट (बस, मेट्रो) इतना अच्छा हो कि लोग अपनी गाड़ी छोड़कर उसमें सफर करना पसंद करें. इससे प्रदूषण कम होगा, समय बचेगा और काम करने की क्षमता (Productivity) बढ़ेगी.
‘लिवेबिलिटी’ (Liveability) यानी रहने लायक माहौल
आनंद महिंद्रा ने कहा कि “वही शहर दुनिया भर के टैलेंट और क्रिएटिविटी को अपनी ओर खींचते हैं, जहां रहने का माहौल अच्छा होता है.” सिर्फ बड़ी इमारतें और फैक्ट्रियां होने से काम नहीं चलेगा. शहरों में हरियाली, साफ हवा, अच्छा ट्रांसपोर्ट और बेसिक सुविधाएं होनी चाहिए. अगर लोग शहर में खुश और सुरक्षित महसूस करेंगे, तभी देश की ग्रोथ टिकाऊ (Sustainable) होगी.
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लेखक के बारे में
By Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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