ITR फाइलिंग की डेडलाइन बढ़ाए जाने के बावजूद वसूला ला रहा लेट फाइन, सोशल मीडिया के जरिए टैक्सपेयर लगा रहे गुहार

अहम सवाल यह पैदा होता है कि आखिर आयकर विभाग टैक्सपेयर्स से किस परिस्थिति में कब लेट फाइन वसूल करता है?
नई दिल्ली : आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने के लिए अभी हाल ही में डेडलाइन बढ़ाए जाने के बावजूद इनकम टैक्स के नए पोर्टल पर टैक्सपेयर्स से लेट फाइन वसूला जा रहा है. आईटीआर दाखिल करने की आखिरी तारीख 30 सितंबर 2021 तक बढ़ाई गई है. मीडिया की खबरों के अनुसार, कई टैक्सपेयर्स इस बात की शिकायत कर रहे हैं कि इनकम टैक्स पोर्टल पिछले कुछ दिनों से आईटीआर दाखिल करन पर सेक्शन 234एफ के तहत लेट फाइन चार्ज किया जा रहा है. चौंकाने वाली बात यह है कि आईटीआर फाइल करने वाले सोशल मीडिया के जरिए आयकर विभाग से सर्वर से लेट फाइलिंग फीस को हटाने की गुहार लगा रहे हैं.
कब वसूला जाता है लेट फाइन
अब अहम सवाल यह पैदा होता है कि आखिर आयकर विभाग टैक्सपेयर्स से किस परिस्थिति में कब लेट फाइन वसूल करता है? आयकर के नियमों के अनुसार, अगर कोई टैक्सपेयर विभाग की ओर से निर्धारित आखिरी तारीख से पहले आईटीआर दाखिल नहीं करता है और डेडलाइन गुजरने के बाद वह फाइलिंग करता है, तो उसे देय कर पर ब्याज का भुगतान करना होगा.
क्या कहता है कानून?
आयकर कानून की धारा 234एफ के अनुसार, आखिरी तारीख गुजरने के बाद फाइल किए जाने वाले विलंबित रिटर्न के लिए शुल्क अधिकतम 10,000 रुपये है. यदि व्यक्ति की कुल आमदनी 5 लाख रुपये से अधिक नहीं है, तो भुगतान की जाने वाली लेट फाइलिंग फीस की राशि 1,000 रुपये होगी.
क्या है कारण?
अंदाजा यह लगाया जा रहा है कि आयकर विभाग की नई वेबसाइट पर अभी से लेट फाइलिंग फीस की डिमांड एक तकनीकी खामी हो सकती है या फिर ऐसा भी हो सकता है कि आयकर विभाग ने बढ़ी हुई डेडलाइन के साथ टैक्स फाइलिंग सॉफ्टवेयर को अपडेट न किया हो.
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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