LIC के बाद अब सरकार बनाएगी नई Cooperative Life Insurance Company, अमित शाह ने किया ऐलान

केन्द्रीय गृह मंत्री (फाइल फोटो )
सरकार ने सहकारी समितियों के करोड़ों सदस्यों के लिए एक नई जीवन बीमा कंपनी, CLIC (Cooperative Life Insurance Company) शुरू करने की घोषणा की है. यह पहल ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बीमा सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर केंद्रित है.
CLIC : देश में बीमा सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई पहल की घोषणा की है. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने Cooperative Life Insurance Company (CLIC) बनाने का ऐलान किया है. इस नई कंपनी का उद्देश्य सहकारी समितियों से जुड़े करोड़ों लोगों तक जीवन बीमा सेवाएं आसान और सुलभ तरीके से पहुंचाना है.
सरकार का मानना है कि सहकारिता नेटवर्क के जरिए गांवों और छोटे शहरों तक बीमा सेवाओं का विस्तार तेजी से किया जा सकता है, जहां अभी भी बड़ी आबादी तक इंश्योरेंस की पहुंच सीमित है.
CLIC क्या है?
CLIC यानी Cooperative Life Insurance Company एक प्रस्तावित लाइफ इंश्योरेंस कंपनी है, जिसे सहकारिता क्षेत्र के लिए विकसित किया जाएगा.
इसका मकसद.
- सहकारी समितियों को बीमा कारोबार से जोड़ना.
- ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बीमा सेवाओं का विस्तार करना.
- सहकारी संस्थाओं के करोड़ों सदस्यों को आसानी से जीवन बीमा उपलब्ध कराना.
- बीमा खरीदने और क्लेम की प्रक्रिया को सरल बनाना.
यह फिलहाल एक घोषित योजना है. कंपनी के संचालन, उत्पाद और लॉन्च टाइमलाइन से जुड़ी विस्तृत जानकारी बाद में जारी की जा सकती है.
LIC और CLIC में क्या अंतर होगा?
हालांकि दोनों का काम जीवन बीमा से जुड़ा होगा, लेकिन उनका उद्देश्य और कार्यप्रणाली अलग हो सकती है.
| LIC | CLIC |
| देश की सबसे बड़ी सरकारी जीवन बीमा कंपनी | सहकारिता क्षेत्र के लिए प्रस्तावित नई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी |
| पूरे देश के सभी ग्राहकों को सेवाएं | सहकारी समितियों और उनके सदस्यों पर विशेष फोकस |
| व्यापक बीमा उत्पाद | सहकारी नेटवर्क के माध्यम से बीमा सेवाओं का विस्तार |
CLIC का उद्देश्य LIC का विकल्प बनना नहीं, बल्कि सहकारिता क्षेत्र के जरिए बीमा कवरेज बढ़ाना माना जा रहा है.
CLIC से किसे फायदा मिलेगा?
सरकार के अनुसार देश में लगभग 8.5 लाख सहकारी समितियां कार्यरत हैं, जिनसे 30 करोड़ से अधिक सदस्य जुड़े हुए हैं.
नई कंपनी बनने के बाद लाभ मिलने की उम्मीद है.
- किसानों को.
- PACS से जुड़े सदस्यों को.
- ग्रामीण परिवारों को.
- छोटे कारोबारियों को.
- सहकारी समितियों के सदस्यों को.
इन लोगों को अपने नजदीकी सहकारी केंद्र के माध्यम से बीमा पॉलिसी खरीदने और क्लेम करने की सुविधा मिल सकती है.
किसानों के लिए यह योजना क्यों महत्वपूर्ण है?
देश के लाखों किसान Primary Agricultural Credit Societies (PACS) से जुड़े हुए हैं.
यदि CLIC शुरू होती है, तो किसानों को.
- गांव के पास ही बीमा सेवाएं मिल सकती हैं.
- पॉलिसी खरीदना आसान हो सकता है.
- क्लेम प्रक्रिया सरल हो सकती है.
- बड़े शहरों या बैंक शाखाओं के बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत कम पड़ सकती है.
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
सरकार ने IFFCO का उदाहरण क्यों दिया?
अमित शाह ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र की प्रमुख संस्था IFFCO पहले से ही एक जापानी साझेदार के साथ बीमा कारोबार में काम कर रही है.
सरकार का मानना है कि इस अनुभव से यह साबित हुआ है कि सहकारी संस्थाएं बीमा क्षेत्र में भी सफल मॉडल तैयार कर सकती हैं. इसी अनुभव के आधार पर CLIC की योजना बनाई जा रही है.
सहकारिता क्षेत्र में और क्या ऐलान हुए?
स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान सरकार ने कई अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं.
- 50,000 PACS को e-PACS में अपग्रेड किया गया.
- 75,000 टन क्षमता वाले 135 गोदामों का हस्तांतरण किया गया.
- 85 नए गोदामों का उद्घाटन हुआ.
- गुजरात के आनंद में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय स्थापित किया जा रहा है.
- भारत टैक्सी परियोजना को अगले दो वर्षों में 500 शहरों तक पहुंचाने की योजना है.
CLIC से भारतीय बीमा सेक्टर पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि यह योजना सफल होती है, तो भारत में बीमा सेवाओं का दायरा और बढ़ सकता है.
संभावित प्रभाव.
- ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा की पहुंच बढ़ेगी.
- सहकारी संस्थाओं की भूमिका मजबूत होगी.
- वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा.
- किसानों और छोटे आय वर्ग के लोगों के लिए बीमा सेवाएं अधिक सुलभ हो सकती हैं.
हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव कंपनी के लॉन्च, उत्पादों और नियामकीय मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा.
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By Abhishek Pandey
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