भिलाई कारखाना विस्फोट मामले में सीएजी का बड़ा खुलासा, सुरक्षा उपाय लागू करने में सेल ने बरती लापरवाही

Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 10 Feb 2021 7:45 PM

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कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उसने सेल की 2014 से 2019 के दौरान सुरक्षा नीति और पर्यावरण प्रबंधन से संबंधित सभी रिकॉर्ड की जांच की.

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नयी दिल्ली : नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के मामले में ढिलाई बरते जाने को लेकर भारतीय इस्पात प्राधिकरण (सेल) की खिंचाई की है. इसकी वजह से 2018 में कंपनी के भिलाई इस्पात कारखाने (बीएसपी) में विस्फोट हुआ, जिसमें 14 लोगों की मौत हो गयी थी. बता दें कि 9 अक्टूबर, 2018 को भिलाई कारखाने की गैस पाइपलाइन में सुबह करीब 10.30 बजे विस्फोट हुआ था. यह पाइपलाइन कोक ओवन खंड से जुड़ी हुई थी.

कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उसने सेल की 2014 से 2019 के दौरान सुरक्षा नीति और पर्यावरण प्रबंधन से संबंधित सभी रिकॉर्ड की जांच की. संसद में मंगलवार को पेश रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी के संयंत्रों में उक्त अवधि में नियमों के अनुसार जितनी संख्या में सुरक्षा अधिकारियों की जरूरत थी, उससे कहीं कम तैनाती की गयी थी.

रिपोर्ट में इस बात का आकलन किया गया है कि क्या कंपनी ने निर्धारित कानून, नियम और मानक परिचालन गतिविधियों (एसओपी) का अनुपालन किया. साथ ही, इसमें इसमें इस बात का भी आकलन किया गया है कि क्या पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित सामाजिक जिम्मेदारी, सुरक्षा मानदंडों और बेहतर औद्योगिक गतिविधियों का अनुकरण किया गया है.

कैग के अनुसार, यह पाया गया कि सेल सुरक्षा संगठन ने अपनी सिफारिशों को क्रियान्वित करने के लिए कोई योजना या समयसीमा निर्धारित नहीं की. भिलाई कारखाने में पंप हाउस में पाइपलाइनों के टूटने से पानी का दबाव कम हुआ और ब्लास्ट फर्नेस गैस पंप हाउस में फैल गई, जिससे छह लोगों की मौत हो गई.

रिपोर्ट में कहा गया है कि सुरक्षा उपायों को सख्ती से नहीं लागू करने और मानक परिचालन व्यवस्था नहीं अपनाने के कारण भिलाई कारखाने में दुर्घटना हुई, जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई. सेल के ओड़िशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ में पांच एकीकृत इस्पात कारखाने हैं. रिपोर्ट के अनुसार, सेल के कारखानों में कार्बन (सीओ2) उत्सर्जन अंतरराष्ट्रीय मानकों से अधिक है. इतना ही नहीं संयंत्रों में औसत ऊर्जा खपत वैश्विक औसत के साथ-साथ टाटा स्टील और राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड से भी अधिक है.

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Posted By : Vishwat Sen

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