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Year 2023: ग्लोबल इकोनॉमी में उठा-पटक के बीच विदेशी निवेशकों की पसंद बना भारत, इस साल किया 1.5 लाख करोड़ निवेश

Updated at : 17 Dec 2023 1:43 PM (IST)
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Year 2023: ग्लोबल इकोनॉमी में उठा-पटक के बीच विदेशी निवेशकों की पसंद बना भारत, इस साल किया 1.5 लाख करोड़ निवेश

Year 2023: वैश्विक निवेश समुदाय में अब इस बात पर लगभग आम सहमति है कि आने वाले कई वर्षों तक निरंतर विकास के लिए उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भारत के पास सबसे अच्छी संभावनाएं हैं.

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Year 2023: दिसबंर के महीने में भारतीय शेयर बाजार में पिछले छह साल का सबसे लंबी तेजी देखने को मिली. इस बीच आईपीओ को लेकर भी निवेशकों में खास उत्साह दिखा. फेड द्वारा सख्त चक्र के अंत के संकेत के बाद आई, जिससे अमेरिकी बांड पैदावार में गिरावट आई, 10 साल की अवधि 4% से नीचे चली गई. इससे विदेशी निवेशकों का रुख भारतीय बाजार की तरफ हुआ. वैश्विक निवेश समुदाय में अब इस बात पर लगभग आम सहमति है कि आने वाले कई वर्षों तक निरंतर विकास के लिए उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भारत के पास सबसे अच्छी संभावनाएं हैं. जेपी मॉर्गन इमर्जिंग मार्केट बॉन्ड इंडेक्स में भारत को शामिल करने के बाद, भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश करने के लिए बहुत उत्साह है. इसका असर भारतीय बाजार पर ये देखने को मिला कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने 2023 में भारतीय शेयर बाजार में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये डाले हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि एफपीआई का यह सकारात्मक रुख अगले साल यानी 2024 में भी जारी रहने की उम्मीद है.

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कई बातों से तय होगी बाजार की दिशा

मॉर्निंगस्टोर इंडिया के एसोसिएट निदेशक-प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि आगे चलकर अगले साल होने वाले आम चुनाव के बीच राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक वृद्धि विदेशी निवेशकों के लिए प्रमुख मुद्दा रहेगी. इसके अलावा वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति और ब्याज दर परिदृश्य भारतीय शेयरों में विदेशी प्रवाह की दिशा तय करेगा. उन्होंने कहा कि अपनी मजबूत आर्थिक वृद्धि के साथ भारत एफपीआई के आकर्षण का केंद्र बना रहेगा. डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, इस साल अबतक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजारों में शुद्ध रूप से लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है. इसके अलावा ऋण या बॉन्ड बाजार में भी उन्होंने लगभग 60,000 करोड़ रुपये डाले हैं. कुल मिलाकर उनका निवेश दो लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है. तीन महत्वपूर्ण राज्यों में हाल के चुनावों में भाजपा की जीत के बाद राजनीतिक स्थिरता की स्थिति बेहतर होने से शेयरों में डेढ़ लाख करोड़ रुपये के निवेश में से करीब 43,000 करोड़ रुपये का प्रवाह दिसंबर के पहले दो सप्ताह में हुआ है. माना जा रहा है कि एफपीआई प्रवाह के लिए यह सबसे अच्छा साल हो सकता है. एफपीआई ने 2021 में शेयरों में शुद्ध रूप से 25,752 करोड़ रुपये, 2020 में 1.7 लाख करोड़ रुपये और 2019 में 1.01 लाख करोड़ रुपये डाले थे.

2022 में विदेशी निवेशकों के लिए अलग था फैक्टर

हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि 2022 में विदेशी निवेशकों का प्रवाह काफी हद तक अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित बाजारों में मुद्रास्फीति और ब्याज दर परिदृश्य, मुद्रा के उतार-चढ़ाव, कच्चे तेल की कीमतों, भू-राजनीतिक परिदृश्य और घरेलू अर्थव्यवस्था की सेहत जैसे कारकों से प्रेरित था. जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि भारत एफपीआई के लिए शीर्ष निवेश गंतव्य है. वैश्विक निवेशक समुदाय के बीच यह आम राय है कि आगामी वर्षों में सतत वृद्धि की दृष्टि से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भारत की स्थिति सबसे बेहतर है.

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Madhuresh Narayan

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By Madhuresh Narayan

Madhuresh Narayan is a contributor at Prabhat Khabar.

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