13.1 C
Ranchi

लेटेस्ट वीडियो

Budget Expectations: रोजगार और बैंकिंग सुधार बने बजट की प्राथमिकता, अर्थशास्त्रियों की सरकार को सलाह

Budget Expectations: एक फरवरी को पेश होने वाले आम बजट 2026-27 से पहले अर्थशास्त्रियों ने सरकार को रोजगार सृजन, एमएसएमई सेक्टर को मजबूती और बैंकिंग क्षेत्र में बड़े सुधारों पर फोकस करने की सलाह दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि राजकोषीय मजबूती बनाए रखते हुए बुनियादी ढांचे, हरित ऊर्जा, एआई और रेलवे में पूंजीगत व्यय बढ़ाया जाना चाहिए. साथ ही महिलाओं, अप्रेंटिसशिप और गुणवत्तापूर्ण रोजगार से जुड़ी योजनाओं को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए.

Budget Expectations: एक फरवरी को पेश होने वाले आम बजट से पहले देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों ने सरकार से अपील की है कि आगामी बजट में रोजगार सृजन को शीर्ष प्राथमिकता दी जाए. इसके साथ ही, उन्होंने एमएसएमई सेक्टर को मजबूती देने और बैंकिंग क्षेत्र में बड़े सुधारों का रोडमैप पेश करने की जरूरत बताई है. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मजबूत आर्थिक वृद्धि के बावजूद आम आदमी तक इसका सीधा लाभ पहुंचाने के लिए रोजगार, निवेश और वित्तीय समावेशन पर फोकस जरूरी है. अर्थशास्त्रियों का यह भी कहना है कि पिछले साल 12 लाख रुपये तक की आय पर राहत दिए जाने के बाद इस बार प्रत्यक्ष करों में किसी बड़े बदलाव की संभावना कम है. हालांकि, सीमा शुल्क नीति में कुछ अहम घोषणाएं हो सकती हैं.

रविवार को पेश होगा 2026-27 का बजट

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करेंगी. यह लगातार नौवीं बार होगा, जब वह संसद में बजट पेंश करेंगी. खास बात यह है कि पहली बार बजट रविवार के दिन पेश किया जाएगा. ऐसे में, सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह विकास, रोजगार और सुधारों का संतुलित खाका पेश करेगी.

एमएसएमई और बैंकिंग सुधारों पर नया फोकस जरूरी

बजट को लेकर अपनी उम्मीदें साझा करते हुए मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के निदेशक और जाने-माने अर्थशास्त्री एन आर भानुमूर्ति ने कहा कि सरकार को सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) पर नए सिरे से ध्यान देना चाहिए. उनके अनुसार, बजट सिर्फ सालाना आय-व्यय का दस्तावेज नहीं बल्कि 2047 के विकसित भारत लक्ष्य के लिए एक विजन डॉक्यूमेंट होना चाहिए. भानुमूर्ति ने कहा कि एमएसएमई सेक्टर रोजगार सृजन की रीढ़ है. ऐसे में इसे औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने, तकनीकी सहायता देने और संरचनात्मक सुधार लाने की जरूरत है. साथ ही बैंकिंग क्षेत्र में सुधारों का स्पष्ट रोडमैप बजट में सामने आना चाहिए.

देश को और बैंकों की जरूरत, सिर्फ विलय समाधान नहीं

बैंकिंग सुधारों पर बात करते हुए भानुमूर्ति ने कहा कि हाल के वर्षों में बड़े बैंकों के विलय पर जोर रहा है, लेकिन देश की जरूरत सिर्फ बड़े बैंकों की नहीं बल्कि ज्यादा बैंकों की है. उन्होंने कहा कि वित्तीय समावेशन की दिशा में भारत को अभी लंबा सफर तय करना है. ज्यादा बैंक होंगे तो दूर-दराज और जरूरतमंद तबकों तक कर्ज और बैंकिंग सुविधाएं बेहतर तरीके से पहुंच सकेंगी. उनके मुताबिक, बैंकिंग तंत्र का विस्तार रोजगार, उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा सकता है.

एमएसएमई में कर्ज नहीं, व्यवस्था है बड़ी समस्या

एमएसएमई सेक्टर को लेकर एक अहम पहलू पर भानुमूर्ति ने ध्यान दिलाया. उन्होंने कहा कि फिलहाल इस क्षेत्र में कर्ज की उपलब्धता बड़ी समस्या नहीं है। बैंक कर्ज देने को तैयार हैं, लेकिन संगठित ढांचे की कमी के कारण मांग नहीं बन पा रही. उन्होंने कहा कि छोटे उद्यमों में पंजीकरण, ऑडिट, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और संचालन स्तर पर बड़े सुधारों की जरूरत है. जब तक छोटे कारोबार संगठित दायरे में नहीं आएंगे, तब तक उन्हें योजनाओं और वित्तीय सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा.

राजकोषीय मजबूती और कैपेक्स पर रहेगा जोर

राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) की प्रोफेसर लेखा चक्रवर्ती ने कहा कि इस बार बजट में सरकार की प्राथमिकता राजकोषीय मजबूती बनाए रखने की होगी. उनका अनुमान है कि राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के करीब 4.4% या उससे नीचे रखने का प्रयास किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इसके साथ बुनियादी ढांचा, हरित ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रेलवे जैसे क्षेत्रों में पूंजीगत व्यय को बढ़ावा दिया जाएगा। इन सेक्टर्स में निवेश से दीर्घकालिक विकास और रोजगार दोनों को गति मिल सकती है.

निजी निवेश, उपभोग और कर प्रशासन सुधार जरूरी

लेखा चक्रवर्ती के मुताबिक, बजट में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने, छोटे उद्योगों को सपोर्ट देने और उपभोग बढ़ाने वाले कदमों पर जोर दिया जाना चाहिए. इसके साथ ही कर प्रशासन सुधारों के जरिए नीतिगत स्थिरता सुनिश्चित करना जरूरी होगा, ताकि निवेशकों का भरोसा बना रहे. उनका कहना है कि मजबूत कैपेक्स के साथ-साथ मांग को सपोर्ट करना भी जरूरी है, ताकि आर्थिक वृद्धि संतुलित बनी रहे.

रोजगार सृजन आम आदमी के लिए सबसे बड़ा लाभ

रोजगार को लेकर पूछे गए सवाल पर भानुमूर्ति ने कहा कि आम आदमी के लिए बजट का सबसे बड़ा फायदा रोजगार के अवसरों का बढ़ना होना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस समय भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत है और इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए ऐसी नीतियों की जरूरत है, जो सीधे तौर पर नौकरियों के अवसर बढ़ाएं.

महिलाओं, अप्रेंटिसशिप और नए सेक्टरों पर फोकस की उम्मीद

लेखा चक्रवर्ती ने कहा कि रोजगार से जुड़ी योजनाओं, अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम और महिलाओं से जुड़े कार्यक्रमों के लिए बजट में आवंटन बढ़ सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा, एआई और हरित ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों के जरिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजन पर ध्यान देना जरूरी होगा.

प्रत्यक्ष करों पर बड़ी राहत की उम्मीद कम

प्रत्यक्ष करों को लेकर भानुमूर्ति ने साफ कहा कि सरकार पहले ही इस मोर्चे पर बड़े सुधार कर चुकी है. ऐसे में इस बजट में इनकम टैक्स को लेकर किसी बड़ी घोषणा की संभावना कम है. हालांकि, सीमा शुल्क नीति में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

इसे भी पढ़ें: एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक का मकर संक्रांति धमाका, ग्राहकों को मिल रही 111 से 10,000 तक की छूट

चुनावी साल में सीमित लोकलुभावन कदम संभव

लेखा चक्रवर्ती ने यह भी संकेत दिया कि 2026 में कई अहम विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, कल्याणकारी योजनाओं में सुधार या महिलाओं व कृषि जैसे क्षेत्रों के लिए सीमित नकद सहायता से इनकार नहीं किया जा सकता. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार की वित्तीय अनुशासन वाली छवि को देखते हुए बड़े पैमाने पर मुफ्त योजनाओं के बजाय सीमित और लक्षित उपाय ही देखने को मिल सकते हैं.

भाषा इनपुट के साथ

इसे भी पढ़ें: Budget Demand: सुपर रिच पर इनकम टैक्स सरचार्ज न बढ़ाया जाए, विशेषज्ञों ने सरकार से की मांग

Disclaimer: शेयर बाजार से संबंधित किसी भी खरीद-बिक्री के लिए प्रभात खबर कोई सुझाव नहीं देता. हम बाजार से जुड़े विश्लेषण मार्केट एक्सपर्ट्स और ब्रोकिंग कंपनियों के हवाले से प्रकाशित करते हैं. लेकिन प्रमाणित विशेषज्ञों से परामर्श के बाद ही बाजार से जुड़े निर्णय करें.

KumarVishwat Sen
KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

संबंधित ख़बरें

Trending News

जरूर पढ़ें

वायरल खबरें

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel