Budget 2022 : शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ग्रीन एनर्जी बजट में किये गये ये प्रावधान

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 01 Feb 2022 10:06 PM

विज्ञापन

प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) के तहत आवंटन राशि को 4,500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 24,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा है.

विज्ञापन

Budget 2022 : 2070 तक शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र सरकार कितनी गंभीर है, इसका प्रमाण आज वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के उन घोषणाओं से मिला जो उन्होंने वित्तीय वर्ष 2022-23 के बजट को पेश करते हुए की.

सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 24,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव

सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घरेलू सौर सेल और मॉड्यूल विनिर्माण के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) के तहत आवंटन राशि को 4,500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 24,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा है.

2030 तक 2,80,000 मेगावॉट की सौर क्षमता का लक्ष्य

निर्मला सीतारमण ने बताया कि उच्च दक्षता वाले सौर मॉड्यूल के विनिर्माण के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत 19,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन किया जायेगा. सीतारमण ने कहा कि वर्ष 2030 तक केंद्र सरकार 2,80,000 मेगावॉट की सौर क्षमता के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के यह प्रस्ताव लेकर आयी है.

इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ाना सरकार का लक्ष्य

इसके साथ ही कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ाना सरकार का लक्ष्य है और इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए कहा कि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए चार्जिंग स्टेशनों पर ही बैटरियां बदलने की सुविधा प्रदान करने के लिए एक नीति लायी जायेगी.

चार्जिंग स्टेशनों पर बैटरी बदलने की सुविधा मिलेगी

चूंकि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी की चार्जिंग सुविधा बहुत अहम है इसलिए सरकार ने चार्जिंग स्टेशनों पर बैटरी बदलने के लिए एक अहम नीति लाने का ऐलान कर दिया है. गौरतलब है कि शहरों में चार्जिंग स्टेशन के लिए जगह की कमी है और इस समस्या को देखते हुए सरकार ने बैटरी बदलने की सुविधा देना जरूरी समझा है. अगर बैटरी बदलने की सुविधा होगी तो इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक मजबूत इको सिस्टिम विकसित किया जा सकेगा.

डिस्चार्ज हो चुके बैटरी को बदला जा सकेगा

इस नीति में बैटरी अदला-बदली के केंद्रों की स्थापना को बढ़ावा दिया जायेगा, जहां इलेक्ट्रिक वाहनों के मालिक डिस्चार्ज हो चुके बैटरी को बदलकर चार्ज बैटरी लगवा सकेंगे. सरकार यह नीति इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए ला रही है, ताकि क्लाइमेंट चेंज को रोका जा सके और सरकार अपने वादे को पूरा कर सके.

विज्ञापन
Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola