Budget 2022 : शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ग्रीन एनर्जी बजट में किये गये ये प्रावधान

प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) के तहत आवंटन राशि को 4,500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 24,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा है.
Budget 2022 : 2070 तक शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र सरकार कितनी गंभीर है, इसका प्रमाण आज वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के उन घोषणाओं से मिला जो उन्होंने वित्तीय वर्ष 2022-23 के बजट को पेश करते हुए की.
सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घरेलू सौर सेल और मॉड्यूल विनिर्माण के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) के तहत आवंटन राशि को 4,500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 24,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा है.
निर्मला सीतारमण ने बताया कि उच्च दक्षता वाले सौर मॉड्यूल के विनिर्माण के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत 19,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन किया जायेगा. सीतारमण ने कहा कि वर्ष 2030 तक केंद्र सरकार 2,80,000 मेगावॉट की सौर क्षमता के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के यह प्रस्ताव लेकर आयी है.
इसके साथ ही कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ाना सरकार का लक्ष्य है और इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए कहा कि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए चार्जिंग स्टेशनों पर ही बैटरियां बदलने की सुविधा प्रदान करने के लिए एक नीति लायी जायेगी.
चूंकि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी की चार्जिंग सुविधा बहुत अहम है इसलिए सरकार ने चार्जिंग स्टेशनों पर बैटरी बदलने के लिए एक अहम नीति लाने का ऐलान कर दिया है. गौरतलब है कि शहरों में चार्जिंग स्टेशन के लिए जगह की कमी है और इस समस्या को देखते हुए सरकार ने बैटरी बदलने की सुविधा देना जरूरी समझा है. अगर बैटरी बदलने की सुविधा होगी तो इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक मजबूत इको सिस्टिम विकसित किया जा सकेगा.
इस नीति में बैटरी अदला-बदली के केंद्रों की स्थापना को बढ़ावा दिया जायेगा, जहां इले���्ट्रिक वाहनों के मालिक डिस्चार्ज हो चुके बैटरी को बदलकर चार्ज बैटरी लगवा सकेंगे. सरकार यह नीति इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए ला रही है, ताकि क्लाइमेंट चेंज को रोका जा सके और सरकार अपने वादे को पूरा कर सके.
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By रजनीश आनंद
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राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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