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बीएसई स्मॉलकैप, मिडकैप इस साल अब तक चार प्रतिशत टूटे, सेंसेक्स में दो प्रतिशत का नुकसान

विश्लेषकों का कहना है कि घरेलू शेयर बाजारों को हाल के दिनों में भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रास्फीति की चिंताओं और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है.

By Prabhat khabar Digital
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Share Market News Update: बीएसई स्मॉलकैप और मिडकैप सूचकांक का प्रदर्शन इस साल सेंसेक्स की तुलना में कमजोर रहा है. इस साल अभी तक छोटी कंपनियों के निवेशकों को चार प्रतिशत का नुकसान हुआ है. यानी बीएसई स्मॉलकैप और मिडकैप में चार प्रतिशत की गिरावट आयी है.

विशेषज्ञों ने आने वाले समय में भी फेडरल रिजर्व के दरें बढ़ाने और बढ़ती मुद्रास्फीति से बाजार में अधिक उठापटक की आशंका जतायी है. विश्लेषकों का कहना है कि घरेलू शेयर बाजारों को हाल के दिनों में भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रास्फीति की चिंताओं और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है.

ट्रेडिंगो के संस्थापक पार्थ न्यति ने कहा, ‘बाजार जब सर्वकालिक उच्च स्तर पर हों, तो उनमें गिरावट के लिए सिर्फ एक चीज की ही जरूरत होती है. और इस साल तो यूक्रेन युद्ध, एफआईआई की रिकॉर्ड बिकवाली, वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि की रफ्तार सुस्त पड़ने और मुद्रास्फीतिकारी बाधाओं की भरमार रही है.’

उन्होंने कहा कि स्मॉलकैप एवं मिडकैप सूचकांकों में ऐसे शेयर शामिल हैं, जिनमें उच्च वृद्धि, ऊंचा रिटर्न और भारी उठापटक देखी गयी है. उन्होंने कहा, ‘बड़े सूचकांक की तुलना में इनके नुकसान एवं लाभ दोनों ही बढ़ाकर पेश किये जाते हैं. इस तरह बाजार में गिरावट होने पर स्मॉलकैप एवं मिडकैप का प्रदर्शन लार्जकैप सूचकांक की तुलना में हल्का होता है.’

बीएसई स्मालकैप सूचकांक 1095.98 अंक गिरा

बीएसई स्मालकैप सूचकांक इस साल अब तक 1,095.98 अंक यानी 3.72 प्रतिशत तक गिर चुका है, जबकि मिडकैप सूचकांक में 666.1 अंक यानी 2.66 प्रतिशत का नुकसान देखा गया है. इसकी तुलना में सेंसेक्स इस साल दो मई तक 1,277.83 अंक यानी 2.19 प्रतिशत गिरा है. हालांकि, व्यापक बाजार का प्रदर्शन कुछ ज्यादा बुरा नहीं रहा है.

ऐसे तय होगी अर्थव्यवस्था की दिशा

न्याति ने कहा, ‘यह स्थिति हमारे घरेलू प्रवाह की ताकत को दर्शाती है.’ विशेषज्ञों के मुताबिक, रूस-यूक्रेन युद्ध जारी रहने के बीच आने वाले समय में फेडरल रिजर्व की दरों में वृद्धि होना और मुद्रास्फीति बढ़ना अस्थिरता के अहम कारक हो सकते हैं. इसके अलावा कंपनियों की आय और मानसून भी घरेलू अर्थव्यवस्था की दिशा तय कर सकते हैं.

घरेलू निवेशक खरीदते हैं छोटे शेयर

स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के प्रबंध निदेशक सुनील न्याति का मानना है कि मिडकैप एवं स्मॉलकैप सूचकांकों का प्रदर्शन खास कमजोर नहीं रहा है. हालांकि, व्यापक बाजार में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जो काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, खासकर जिंस से संबंधित शेयर. बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, छोटे शेयरों को आमतौर पर घरेलू निवेशक खरीदते हैं, जबकि विदेशी निवेशक ब्लूचिप या बड़ी कंपनियों के शेयरों का लेनदेन करते हैं.

छोटे शेयरों ने दिया 63 फीसदी तक रिटर्न

न्याति कहते हैं, ‘पिछले पांच महीनों में तमाम घरेलू एवं बाहरी कारकों से कई तरह की चुनौतियां रही हैं, लेकिन घरेलू पूंजी की आवक बनी रहने और बेहतर आर्थिक परिदृश्य होने से हम अधिकांश चुनौतियों का सामना करने में सफल रहे.’ वर्ष 2021 के कैलेंडर साल में छोटे शेयरों ने 63 प्रतिशत तक रिटर्न दिया था. वहीं, मझोली कंपनियों के शेयर 39 प्रतिशत चढ़े थे. इनकी तुलना में बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन को आंकने वाला सेंसेक्स 22 प्रतिशत बढ़ा था.

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