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ATM में डेबिट कार्ड क्लोनिंग करने वाले जालसाजों से रहें सावधान, ठगी से बचना है तो उठाएं ये कदम...

Updated at : 07 Mar 2020 9:57 PM (IST)
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ATM में डेबिट कार्ड क्लोनिंग करने वाले जालसाजों से रहें सावधान, ठगी से बचना है तो उठाएं ये कदम...

देश में इस समय एटीएम से कार्ड क्लोनिंग कर जालसाजों द्वारा यूजर्स के खातों से रकम निकालने के मामले कुछ अधिक ही सामने आने लगे हैं, लेकिन जालसाजों से बचने के लिए उपाय जानना बेहद जरूरी है.

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नयी दिल्ली : कहीं आप अपने डेबिट कार्ड से धोखाधड़ी का शिकार तो नहीं हुए? नहीं हुए तो अच्छा है. ठगों द्वारा कार्ड क्लोनिंग करके खातों से ग्राहकों की जानकारी के बिना रकम उड़ाने वाले ठगों के कारनामों को आप रोज सुनते हैं. अगर आप उनके शिकार नहीं हुए हैं, तो डेबिट कार्ड यानी एटीएम कार्ड का क्लोन कर ठगी करने वाले ठगों से अभी ही सावधान हो जाएं.

दरअसल, जब आप एटीएम से पैसा निकालने जाते हैं, तो जालसाज पलक झपकते आपके डेबिट कार्ड का क्लोन तैयार कर लेते हैं और फिर उससे एक दूसरा डुप्लीकेट कार्ड तैयार कर उसका इस्तेमाल करते हैं. जब तक आपको अपने खाते से जालसाजों द्वारा उड़ायी गयी रकम का पता चलता है, तब तक वे आपके पैसों का दूसरी जगह इस्तेमाल कर चुके होते हैं.

आइए, पहले जानते डेबिट कार्ड और क्लोनिंग के बारे में जानते हैं : दरअसल, प्रत्येक डेबिट कार्ड में एक मैग्नेटिक स्ट्रिप होती है, जिसमें आपके खाते से जुड़ी हुई सभी प्रकार की जानकारी दी गयी होती है. जालसाल स्कीमर नामक एक उपकरण से किसी के डेविट कार्ड को क्लोन कर लेते हैं. इसके बाद स्कीमर को कार्ड स्वैपिंग मशीन में फिट कर दिया जाता है, जिसके जरिये कार्ड स्वैप होते ही क्लोन किये गये कार्ड की सारी जानकारियों की कॉपी कर ली जाती है. कॉपी किया गया डेटा इंटरनल मेमोरी में स्टोर हो जाता है.

कई एटीएम में जालसाज स्कीमर किट को इस तरह फिट कर देते हैं कि यूजर्स को उसका पता ही नहीं चलता. इसमें एटीएम के कीपैड पर एक मेट के तरीके का उपकरण, स्वाइप की जगह कॉपी मशीन और पासवर्ड को देखने के लिए एक बटन जैसा कैमरा लगाया जाता है. अब स्कीमर फिट एटीएम से जितने डेबिट कार्ड से पैसे निकाले जाएंगे, उन सबका डेटा जालसाज के पास इकट्ठा हो जाता है और फिर वे उसका इस्तेमाल ठगी करने में करते हैं.

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डेबिट कार्ड की क्लोनिंग से बचाव के ये हैं तरीके : जब भी आप एटीएम में जाएं, तो सबसे पहले आप मशीन के कार्ड डालने वाली स्लॉट को देखें. अगर आपको कार्ड डालने वाला स्लॉट ढीला लगे, तब आप उसमें अपना डेबिट कार्ड बिल्कुल न डालें.

एटीएम की लाइट बंद रहे, तो सावधान हो जाएं : अगर आप एटीएम में गये हैं, तो जालसाजों से बचने के लिए कार्ड स्वैप करने के पहले आप स्वैप स्लॉट पर ध्यान दीजिए. वहां पर एक लाइट हमेशा जलती रहती है. वह इस बात का संकेत देती है कि आप इसमें कार्ड स्वैप कर सकते हैं. अगर किसी एटीएम के स्वैप स्लॉट के पास वाली लाइट न जल रही हो या फिर वहां पर कोई लाइट न हो, तो समझ जाएं कि जालसाजों ने उस एटीएम को अपने कब्जे में ले रखा है.

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हिडेन कैमरा से सावधान रहें : एटीएम में जालसाजों से बचने का तीसरा उपाय यह है कि अगर आपने स्वैपिंग स्लॉट के पास कार्ड स्वैप कर दिया है, तो पासवर्ड डालने वाले कीपैड के पास गौर कीजिएगा. वहां पर जालसाज हिडेन कैमरा फिट कर देते हैं. जब आप कीपैड पर अपना पासवर्ड डाल रहे हों, तो कीपैड को अपने हाथ से ढंक लें, ताकि आपके पासवर्ड को जालसाज हिडेन कैमरा के जरिये न देख सकें.

कार्ड स्वैप करने के पहले हाथ का करें इस्तेमाल : अगर आप नकदी निकालने के लिए किसी एटीएम में खड़े हैं, तो अपने हाथ का इस्तेमाल करना न भूलें. एटीएम के पास जाते ही आप सबसे पहले स्वैप स्लॉट के पास हाथ लगाकर यह देख लें कि यह स्लॉट कहीं ढीला तो नहीं है? दूसरा, आप कीपैड के चार कोनों में से किसी एक कोना को दबाकर देखें. अगर वह दबाव पड़ने के बाद आपको ढीला नजर आए या उसका कोई एक सिरा उठा हुआ नजर आए, तो आप समझ जाएं कि जालसाजों ने अपना खेल कर दिया है.

बिना सुरक्षा गार्ड वाले एटीएम में जाने से पहले सतर्क हो जाएं : सबसे आखिर में यह कि अगर आप किसी एटीएम में जा रहे हैं, तो यह जरूर देखें कि एटीएम के बाहर कोई सुरक्षा गार्ड बैठा है या नहीं? अगर नहीं कोई गार्ड नहीं है और आसपास में दूर-दूर तक कोई दूसरा एटीएम नहीं है, तो आप सचेत हो जाएं. सावधानी में ही सुरक्षा है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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