500 रुपये के नोट पर अनुपम खेर का फोटो, 2 किलो सोने की ठगी

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :30 Sep 2024 5:46 PM (IST)
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500 रुपये के नोट पर अनुपम खेर का फोटो, 2 किलो सोने की ठगी

पांच सौ रुपये के नोट पर बापू की जगह अनुपम खेर की तस्वीर.

Fake Currency: ठगी की जानकारी मिलने के बाद सोने के कारोबारी मेहुल ठक्कर मौके पर पहुंचे. आसपास के दुकानदारों से जानकारी ली, तो लोगों ने बताया कि यहां पर अंगड़िया फर्म कभी था ही नहीं. दो दिन पहले ही किसी ने शुरू की थी.

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Fake Currency: गुजरात के अहमदाबाद से बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर का फोटो 500 रुपये के नकली नोट पर छापकर दो किलो सोने की ठगी करने की बड़ी खबर सामने आ रही है. शातिर जालसाजों ने 500 रुपये के नकली नोट पर सोने की ठगी करने का कारनामा कर दिखाया. मजे की बात यह है कि सोने की ठगी करने के लिए इन जालसाजों ने नकली फर्म भी बना लिया था और फोन पर ही सोने के असली कारोबारी को भरोसे में भी ले लिया. इन ठगों ने इन नकली नोटों पर आरबीआई का फुलफॉर्म रिसोल बैंक ऑफ इंडिया लिख दिया था.

दो किलो सोना खरीदने का सौदा

अंग्रेजी के समाचार पत्र टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, अहमदाबाद पुलिस को शिकायत मिली कि सोने के कारोबारी मेहुल ठक्कर को 23 सितंबर 2024 को उनके परिचित लक्ष्मी ज्वैलर्स के मैनेजर ने फोन किया. लक्ष्मी ज्वैलर्स के मैनेजर ने फोन पर कहा था कि उन्हें दो किलो सोने की खरीद करनी है. दाम क्या लगेगा? मेहुल पिछले 15 साल से लक्ष्मी ज्वैलर्स के साथ कारोबार करते आ रहे हैं. इस भरोसे पर उन्होंने दो किलो सोने की कीमत 1.60 करोड़ रुपये बताई. दूसरे दिन सोना भिजवाने के वादे के साथ सौदा पक्का हो गया.

नोट गिनने वाली मशीन के साथ मिले ठग

रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरे दिन 24 सितंबर 2024 को लक्ष्मी ज्वैलर्स के मैनेजर ने मेहुल ठक्कर को दोबारा फोन किया. उसने कहा कि एक पार्टी को तुरंत सोना चाहिए. आरटीजीएस नहीं चल रहा है. इसलिए वह सोने के एवज में कुछ सिक्योरिटी अमाउंट देंगे. उसके बाद आरटीजीएस से पैसे भेज देंगे. मैनेजर ने यह भी कहा कि सोना खरीदने वाले सीजी रोड पर अंगड़िया फर्म में मिलेंगे. पैसों का लेनदेन भी वहीं करेंगे. सोने के कारोबार ने मैनेजर के कहने पर अपने स्टाफ को दो किलो सोना देकर सीजी रोड पर भेज दिया. वहां पर अंगड़िया फर्म में पहले से तीन लोग मौजूद थे, जिसमें से एक आदमी के पास नोट गिनने की मशीन भी थी. दूसरा आदमी सरदारजी के भेष में था और तीसरा आदमी कंपनी के बाहर बैठा था.

दो किलो सोना के बदले 1.30 करोड़ नकली नोट का भुगतान

रिपोर्ट में कहा गया है कि सोना खरीदने वाले दोनों व्यक्ति ने 1.30 करोड़ रुपये सिक्योरिटी डिपॉजिट के तौर पर दिया और मेहुल ठक्कर के स्टाफ से दो किलो सोना ले लिया. उसके बाद उन दोनों ने कहा कि बाकी के 30 लाख रुपये दूसरे ऑफिस से लोकर देगे. मेहुल के स्टाफ ने सोना देने के बाद जब नोट को देखा, तो सभी नोट नकली थे. जब तक वह नोट को देखता, तब तक तीनों लोग सोना लेकर फरार हो चुके थे.

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नकली फर्म बनाकर सोने की ठगी

ठगी की जानकारी मिलने के बाद सोने के कारोबारी मेहुल ठक्कर मौके पर पहुंचे. आसपास के दुकानदारों से जानकारी ली, तो लोगों ने बताया कि यहां पर अंगड़िया फर्म कभी था ही नहीं. दो दिन पहले ही किसी ने शुरू की थी. जो व्यक्ति लक्ष्मी ज्वैलर्स का मैनेजर बनकर संपर्क किया था, कॉल करने पर उसका फोन बंद मिला. ठगे जाने का एहसास होने के बाद उन्होंने पुलिस को इसकी जानकारी दी. मजे की बात यह है कि ठगों ने जिन 500 रुपये के नोटों का भुगतान किया, उसका महात्मा गांधी की जगह बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर की तस्वीर छपी थी और आरबीआई का फुलफॉर्म रिसोल बैंक ऑफ इंडिया लिखा था. मेहुल ठक्कर की शिकायत पर नवरंगपुरा पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया. चौंकाने वाली दूसरी बात यह है कि जो आदमी नोट गिनने वाली मशीन लेकर खड़ा था, वह ठग नहीं बल्कि मशीन बेचने वाला सेल्समैन था. वह मशीन की डिलीवरी करने के लिए वहां मौजूद था. अब इन ठगों को पकड़ने के लिए अहमदाबाद पुलिस ने अधिकारियों की एक टीम बनाई है.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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