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कर्ज की दलदल में ऐसे फंसते चले गए अनिल अंबानी, खर्च चलाने के लिए बेचने पड़े घर की ये कीमती चीजें...

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
अनिल धीरूभाई अंबानी.
अनिल धीरूभाई अंबानी.
फाइल फोटो.

नयी दिल्ली : अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) के चेयरमैन और धीरूभाई अंबानी के छोटे बेटे अनिल अंबानी की कंपनियों की हालत इन दिनों बेहद खराब हो गयी है. कभी देश की बड़ी कंपनियों में शुमार रिलायंस का बंटवारा कर बड़ी रकम और संपत्तियां हासिल करने वाले अनिल अंबानी ने ब्रिटेन की एक कोर्ट में जब यह बयान दिया कि उन्हें खर्च चलाने के लिए घर के गहने तक बेचने पड़ गए, तो लोग भौंचक रह गए. यह बयान उस कारोबारी समूह के चेयरमैन का है, बंटवारे के बाद जिनकी कंपनियों का बाजार वैल्यू 4 लाख करोड़ रुपये थी और आज उन कंपनियों की वैल्यू केवल 2000 करोड़ रुपये पर सिमटकर रह गयी है.

कभी अर्श पर चमकने वाला यह कारोबारी सितारा कर्ज की दलदल में कुछ इस कदर फंसता चला गया कि अब कर्ज की अदायगी के लिए एक-एक करके कंपनियां उनके हाथों से निकलती चली जा रही हैं. आइए, जानते हैं कि अर्श पर चमकने वाला यह कारोबारी सितारा आखिर कर्ज की दलदल में क्यों और कैसे फंसता चला गया.

मुकेश अंबानी के साथ बंटवारे में मिली थी अच्छी संपत्ति

देश के दिग्गज कारोबारी धीरूभाई अंबानी से रिलायंस का कारोबार मुकेश और अनिल अंबानी को विरासत में मिला था. हालांकि, बाद में जायदाद के बंटवारे को लेकर दोनों में जमकर विवाद-तनाव रहा. आखिर में मां कोकिला बेन और परिवार के कई अन्य करीबियों के दबाव में बंटवारा किया गया. इस बंटवारे में मुकेश अंबानी को पुराना पेट्रोकेमिकल कारोबार मिला, तो अनिल अंबानी को नए जमाने का टेलीकॉम, फाइनेंशियल सर्विसेज और एनर्जी का कारोबार हासिल हुआ.

नहीं संभाल सके पिता की विरासत

मुकेश अंबानी से नए जमाने का नया कारोबार हासिल करने के बावजूद अनिल अंबानी अपने पिता धीरूभाई अंबानी की विरासत को संभाल नहीं सके. वहीं, उनके बड़े भाई मुकेश अंबानी बंटवारे के बाद से लगातार आगे बढ़ते जा रहे हैं और आज स्थिति यह है कि वे दुनिया के सबसे बड़े अमीरों को लगातार टक्कर पर टक्कर दे रहे हैं. अनिल अंबानी के पास टेलीकॉम कारोबार जैसी काफी महत्वाकांक्षी योजना थी. वह टेलीकॉम, पावर और इन्फ्रास्ट्रक्चर में देश के सबसे बड़े खिलाड़ी बनना चाहते ​थे, लेकिन शायद इन्हीं कारोबार ने उन्हें बर्बाद कर दिया.

गलतियों में नहीं कर पाए सुधार

साल 2002 में टेलीकॉम कारोबार आरकॉम की शुरुआत पर एडीएजी ने कोड डिवीजन मल्टीपल एक्ससेस यानी (सीडीएमए) टेक्नोलॉजी अपनाने का फैसला किया, जो कि एक बेहद गलत निर्णय साबित हुआ. यह टेक्नोलॉजी 2जी और 3जी तक सीमित है. इसलिए जब 4जी और 5जी का जमाना आया, तो आरकॉम मैदान से बाहर हो गयी. साल 2008 में जब आरकॉम को स्पेक्ट्रम मिला, तब तक उसके ऊपर 25,000 करोड़ रुपये का कर्ज हो गया.

2008 में ही बेचनी पड़ी थी रिलायंस पावर की परिसंपत्तियां

रिलायंस पावर ने साल 2008 में आईपीओ से रिकॉर्ड 11,563 करोड़ रुपये जुटाये थे. इसके आधार पर उसने कुल 28,200 मेगावॉट क्षमता के 13 गैस, कोल और हाईड्रो पावर प्रोजेक्ट का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा, लेकिन इन प्रोजेक्ट को गैस नहीं मिल पाई. बड़े भाई मुकेश अंबानी ने सस्ती दर पर गैस देने से मना कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने भी मुकेश के पक्ष में फैसला दिया. अनिल अंबानी को रिलायंस पावर की परिसंपत्तियां बेचने को मजबूर होना पड़ा. कंपनी का 1.2 लाख करोड़ रुपये का निवेश फंस गया.

डिफेंस सेक्टर में भी नहीं चला कारोबार

साल 2015 में डिफेंस सेक्टर में कदम रखते हुए अनिल अंबानी ने पिपावाव डिफेंस को खरीद लिया. इस कंपनी के ऊपर पहले से ही 7,000 करोड़ रुपये का कर्ज था. आगे यह करीब 10,700 करोड़ रुपये के कर्ज का भुगतान नहीं कर पायी. आईडीबीआई बैंक और आईएफसीआई ने इसे एनसीएलटी में घसीट लिया.

2018 तक 1.72 लाख करोड़ रुपये का हो गया कर्ज

साल 2018 तक अनिल धीरूभाई अंबानी (ADAG) समूह की कंपनियों के पास 1.72 लाख करोड़ रुपये का कर्ज हो गया था. करीब 46,000 करोड़ रुपये के कर्ज की वजह से ग्रुप की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस को बैंकरप्शी कोर्ट का सामना करना पड़ा. वित्त वर्ष 2010 के 27,710 करोड़ रुपये की तुलना में वित्त वर्ष 2020 तक रिलायंस कम्युनिकेशंस की आय घटकर 1,734 करोड़ रुपये रह गई.

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में फंस गए 2 लाख करोड़

यूपीए सरकार के दूसरे दौर के खत्म होने तक 2जी स्पेक्ट्रम के कथित घोटाले की वजह से 2 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट फंस गए. यह अनिल अंबानी समूह के लिए एक और झटका साबित हुआ. साल 2018 में अनिल अंबानी ने एजीएम में घोषित कर दिया कि वे टेलीकॉम सेक्टर से बाहर जा रहे हैं.

एसबीआई समेत कई बैंकों से लिया कर्ज

एसबीआई के नेतृत्व में कई बैंकों ने रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस इन्फ्राटेल को करीब 1,200 करोड़ रुपये का कर्ज दे रखा था. इसके लिए अनिल अंबानी ने पर्सनल गारंटी दी थी. नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल ने अनिल अंबानी के खिलाफ आदेश देते हुए दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दे दिया है.

एडीए समूह की कंपनियों की 2000 करोड़ रुपये हो गयी मार्केट वैल्यू

अपने गोल्डन पीरियड में साल 2008 में अनिल अंबानी के रिलायंस समूह (ADAG) की कंपनियों की मार्केट वैल्यू करीब 4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी, लेकिन अब उनकी सभी कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू करीब 2 हजार करोड़ रुपये ही रह गई है. आज रिलायंस कैपिटल की बाजार पूंजी सिर्फ 202 करोड़ रुपये, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर का मार्केट कैप 606 करोड़ रुपये, आरकॉम का मार्केट कैप 247 करोड़ रुपये, रिलायंस पावर का मार्केट कैप 794 करोड़ रुपये, रिलायंस होम फाइनेंस का शेयर 86.25 करोड़ रुपये, रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग का मार्केट कैप सिर्फ 217 करोड़ रुपये है.

Posted By : Vishwat Sen

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