विधवा महिला के गुजारा भत्ते पर कोर्ट का नियम, ससुर तभी देंगे खर्च जब पूरी हों ये शर्तें

Updated at : 01 Apr 2026 2:30 PM (IST)
विज्ञापन
Allahabad High Court Order

इलाहाबाद उच्च न्यायालय (फोटो/ Live Law)

Allahabad High Court Order: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पति की मृत्यु के बाद भी विधवा अपने ससुर से गुजारा भत्ता पाने की हकदार है. हिंदू एडॉप्शन एंड मेंटेनेंस एक्ट, 1956 के तहत यह अधिकार बना रहता है.

विज्ञापन

Allahabad High Court Order: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विधवा महिलाओं के अधिकारों को लेकर एक ऐतिहासिक आदेश में स्पष्ट किया है कि पति की अपनी पत्नी के प्रति जिम्मेदारी उसकी मृत्यु के साथ समाप्त नहीं होती है. जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने ‘अकुल रस्तोगी’ मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्धारित किया कि एक विधवा अपने ससुर से गुजारा भत्ता (Maintenance) पाने की पूरी हकदार है, और यह जिम्मेदारी कानूनी रूप से स्थानांतरित हो जाती है.

पति की मौत के बाद भी अधिकार

कोर्ट ने अपने 17 मार्च के आदेश में कहा कि यह एक स्थापित और तय नियम है कि पति अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने के लिए उत्तरदायी है. यह कानूनी दायित्व उसकी मृत्यु के बाद भी बना रहता है, और कानून एक विधवा को अपने ससुर से भरण-पोषण की मांग करने की पूरी इजाजत देता है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वैवाहिक संबंधों से उत्पन्न सुरक्षा का अधिकार पति के न रहने पर उसके परिवार, विशेषकर ससुर पर लागू होता है.

‘झूठे बयान’ के आरोपों पर कोर्ट का रुख

आज तक के एक रिपोर्ट के अनुसार गुजारा भत्ता के एक मामला में अकुल रस्तोगी ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसने उसकी पत्नी के खिलाफ कथित तौर पर गलत जानकारी देने के लिए कार्रवाई करने से मना कर दिया था. पति का आरोप था कि उसकी पत्नी नौकरी करने के बावजूद खुद को गृहिणी बता रही है और उसके पास 20 लाख रुपये से ज्यादा की फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें (FDRs) हैं जिन्हें उसने छिपाया है.

हालांकि, कोर्ट ने पाया कि पति अपने इन आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया. कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की कि यह साबित करने की जिम्मेदारी पूरी तरह पति की है कि पत्नी के पास अच्छी नौकरी है; सिर्फ यह कह देना कि वह काम करती है, कानूनी तौर पर पर्याप्त नहीं माना जा सकता.

पत्नी के पास मौजूद 20 लाख रुपये की FDRs के मामले में कोर्ट ने पाया कि यह पैसा उसे उसके पिता से उपहार स्वरूप मिला था. कोर्ट ने यह कानूनी बिंदु साफ किया कि सामान्य तौर पर एक पिता अपनी बेटी की शादी के बाद उसके भरण-पोषण के लिए जिम्मेदार नहीं होता है, सिवाय उन परिस्थितियों के जब वह विधवा हो जाए.

कोर्ट ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि पत्नी ने अपनी निजी और जरूरी जरूरतों को पूरा करने के लिए उस फिक्स्ड डिपॉजिट से ज्यादातर पैसे पहले ही निकाल लिए थे, जो यह दर्शाता है कि उसे वास्तव में गुजारे के लिए आर्थिक सहायता की आवश्यकता थी.

जानकारी छिपाना ‘झूठ’ नहीं

हाई कोर्ट ने ‘झूठे बयान’ (Perjury) के कानूनी पहलुओं को समझाते हुए कहा कि सिर्फ कुछ बातों को आवेदन में न लिखना या पूरी जानकारी साझा न करना अपने आप में ‘झूठा बयान’ देना नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने माना कि जब तक कोई ठोस साक्ष्य न हो कि पत्नी ने जानबूझकर कोर्ट को गुमराह किया है, तब तक उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती. अंततः, पति के पास कोई पुख्ता आधार न होने के कारण कोर्ट ने उसकी अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया.

ससुर से कब नहीं मिलेगा गुजारा भत्ता?

लीगल वेबसाइट लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार हिंदू एडॉप्शन एंड मेंटेनेंस एक्ट, 1956 के प्रावधानों के अनुसार, एक विधवा ससुर या उनकी संपत्ति से मेंटेनेंस का दावा तभी कर सकती है जब वह अपने दिवंगत पति की संपत्ति, अपने माता-पिता या अपने बच्चों से भरण-पोषण प्राप्त करने में असमर्थ हो.

सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि विधवा ने दूसरी शादी न की हो. यदि वह पुनर्विवाह (Remarriage) कर लेती है, तो वह अपने पूर्व ससुर से गुजारा भत्ता पाने का कानूनी अधिकार खो देती है. इसके अलावा, यदि उसके पास आय के स्वतंत्र और पर्याप्त स्रोत मौजूद हैं, तो ससुर पर उसकी जिम्मेदारी नहीं बनती है.

Also Read: बेडरूम तक पहुंचा ईरान वॉर का असर, होर्मुज बंदी से कंडोम सप्लाई पर संकट, भयानक होंगे नतीजे

विज्ञापन
Abhishek Pandey

लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola