एअर इंडिया का फैसला: विंटर शेड्यूल से रोजाना 100 उड़ानें होंगी बंद; विदेश जाना हो सकता है मुश्किल

Published by :Abhishek Pandey
Published at :01 May 2026 3:04 PM (IST)
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Air india winter schedule flight

फोटो: Air India

Air india winter schedule flight: टाटा ग्रुप की एअर इंडिया विंटर शेड्यूल से अपनी उड़ानों में 10% की कटौती करने जा रही है. जानिए किन इंटरनेशनल रूट्स पर पड़ेगा असर और क्या है इस फैसले के पीछे की असली वजह.

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Air india winter schedule flight: टाटा ग्रुप की अगुवाई वाली एअर इंडिया ने अपने ऑपरेशंस को लेकर एक कड़ा फैसला लिया है. एयरलाइन आगामी अक्टूबर के अंत से शुरू होने वाले ‘विंटर शेड्यूल’ में अपनी रोजाना की उड़ानों में 10% की कटौती करने जा रही है. इसका सीधा मतलब यह है कि हर दिन उड़ान भरने वाली 900 फ्लाइट्स में से अब करीब 100 उड़ानें आसमान में नजर नहीं आएंगी.

आखिर क्यों उड़ानों काट रही है एअर इंडिया ?

इस कटौती के पीछे दो सबसे बड़े कारण हैं.

  • महंगा ईंधन (ATF): जेट फ्यूल की कीमतों में लगातार उछाल आ रहा है. किसी भी एयरलाइन के कुल खर्च का 40% हिस्सा अकेले ईंधन पर जाता है. ईंधन महंगा होने से कई लंबी दूरी के रूट्स अब घाटे का सौदा बन गए हैं.
  • स्पेयर पार्ट्स का संकट: एअर इंडिया के करीब 30 बड़े विमान (Wide-body) पुर्जों और इंजन की कमी के कारण जमीन पर (Grounded) खड़े हैं. नए विमानों के ऑर्डर तो दे दिए गए हैं, लेकिन उनकी डिलीवरी में अभी वक्त है.

इन रूट्स पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर

अगर आप विदेश यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो सावधान हो जाइए. एअर इंडिया ने सबसे ज्यादा कैंची अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर चलाई है.

  • उत्तरी अमेरिका और यूरोप: सैन फ्रांसिस्को, शिकागो और लंदन जैसे शहरों के लिए अब डेली फ्लाइट्स मिलना मुश्किल हो सकता है. जहाँ पहले रोजाना सर्विस थी, वहां अब हफ्ते में सिर्फ 4 या 5 दिन ही विमान उड़ेंगे.
  • ऑस्ट्रेलिया: सिडनी जाने वाली फ्लाइट्स की संख्या में भी कमी की गई है.
  • डोमेस्टिक रूट्स: घरेलू उड़ानों में भी बदलाव होगा. खास तौर पर ‘मेट्रो-टू-मेट्रो’ (जैसे दिल्ली-मुंबई) रूट्स पर जहां एक ही दिन में कई उड़ानें थीं, वहां फ्रीक्वेंसी कम की जाएगी.

क्या इससे यात्रियों को होगा कोई फायदा?

सुनने में यह कटौती बुरी लग सकती है, लेकिन एयरलाइन का दावा है कि इससे ‘ऑन-टाइम परफॉर्मेंस’ (OTP) में सुधार होगा. जब विमानों की संख्या कम होगी, तो एयरलाइन के पास ‘स्टैंडबाय’ विमान रहेंगे. अगर किसी विमान में तकनीकी खराबी आती है, तो दूसरे विमान को तुरंत भेजा जा सकेगा, जिससे फ्लाइट देरी से चलने या अचानक कैंसिल होने की समस्या कम होगी.

एक्सपर्ट की राय

एविएशन एनालिस्ट्स का मानना है कि टाटा ग्रुप के लिए यह ‘ग्रोथ’ और ‘प्रॉफिट’ के बीच तालमेल बिठाने की चुनौती है. पुराने बेड़े को मेंटेन करना और बढ़ते फ्यूल के बीच एयरलाइन को मुनाफे में लाना फिलहाल कंपनी की प्राथमिकता है.

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लेखक के बारे में

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अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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