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चिदंबरम ने बजट को बताया उत्‍साहहीन, कहा - ठोस सुधारों को आगे बढ़ाने का मौका गंवा दिया

Updated at : 02 Feb 2017 9:26 PM (IST)
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चिदंबरम ने बजट को बताया उत्‍साहहीन, कहा - ठोस सुधारों को आगे बढ़ाने का मौका गंवा दिया

नयी दिल्ली : पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने आम बजट को आज ‘उत्साहहीन’ बताया. उन्होंने कहा कि सरकार ने ठोस सुधारों को आगे बढ़ाने, आर्थिक वृद्धि को तीव्र पटरी पर लाने और रोजगार सृजन के लिये रणनीति बनाने का एक मौका गंवा दिया. चिदंबरम ने हालांकि, नोटबंदी के बाद ‘लापरवाही और गड़बड़ी’ जैसा कुछ […]

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नयी दिल्ली : पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने आम बजट को आज ‘उत्साहहीन’ बताया. उन्होंने कहा कि सरकार ने ठोस सुधारों को आगे बढ़ाने, आर्थिक वृद्धि को तीव्र पटरी पर लाने और रोजगार सृजन के लिये रणनीति बनाने का एक मौका गंवा दिया. चिदंबरम ने हालांकि, नोटबंदी के बाद ‘लापरवाही और गड़बड़ी’ जैसा कुछ नहीं करने और नरम रुख बनाये रखने के लिये वित्त मंत्री अरुण जेटली की प्रशंसा की है.

उन्होंने नकद लेनदेन की सीमा तय करने, राजनीतिक चंदे को साफ सुथरा बनाने और बजट के कुछ अन्य प्रस्तावों का स्वागत किया है. उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘सभी बजट दस्तावेजों को देखने के बाद हमारा निष्कर्ष यही है कि जितनी व्यापक स्तर पर तैयारी की गयी वह सब फुस्स पटाखे की तरह हो गयी. कुल मिलाकर, अवसर गंवा दिया गया. मुझे यह देखकर निराशा हुई कि सरकार ने इस अवसर का लाभ ठोस सुधारों को आगे बढ़ाने, समग्र मांग और वृद्धि को बढ़ाने और रोजगार सृजन के लिये नयी रणनीति रखने के लिये इस्तेमाल नहीं किया.’

चिदंबरम ने कहा कि सरकार ने निवेश और आर्थिक वृद्धि को बढ़ाने के लिये नयी रणनीति अपनाकर अथवा नये नीतिगत उपायों के जरिये कुछ नहीं किया. नोटबंदी के बार निवेश और आर्थिक वृद्धि बुरी तरह प्रभावित हुई है. पूर्व वित्त मंत्री ने हालांकि इस मामले में सतर्क रुख अपनाया कि नोटबंदी के फैसले का असर अगले वित्त वर्ष 2018-19 में भी महसूस हो सकता है. ‘यह अब व्यापक तौर पर स्वीकार कर लिया गया है कि देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर बुरा असर पडा है. यह बुरी तरह प्रभावित होगी. कम वृद्धि की यह अवधि 2017-18 और 2018-19 तक बढ़ेगी.’

चिदंबरम ने कहा कि अर्थव्यवस्था में निवेश और मांग बढ़ाने के लिये बजट में कुछ ठोस नहीं किया गया है. उन्होंने इसके लिये अप्रत्यक्ष करों में कटौती की वकालत करते हुये कहा कि उत्पाद शुल्कों में कटौती की जानी चाहिये थी क्योंकि जीएसटी एक अक्तूबर से पहले अमल में लाना मुमकिन नहीं लगता. उन्होंने प्रत्यक्ष कर संहिता को जल्द अमल में लाने पर जोर दिया.

चिदंबरम ने करदाताओं को औसतन केवल 5,000 रुपये की राहत देने को लेकर भी हमला किया. उन्होंने इसे ‘मात्र सांकेतिक’ राहत ही बताया. ‘हम इस राहत का स्वागत करते हैं लेकिन यह कई सप्ताह लाइन में खड़े रहने वाले व्यक्ति के लिये बहुत छोटी राहत है. उन्होंने 1.98 करोड़ करदाताओं को प्रति करदाता औसतन 5,000 रुपये की राहत ही दी है.’

चिदंबरम ने किसानों को धोखा देने के लिये भी सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि किसानों के साथ ही कृषि श्रमिक, स्व:रोजगार चलाने वाले और एमएसएमई क्षेत्र में काम करने वाले नोटबंदी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुये हैं. उनके लिये भी कुछ राहत बजट में दी जानी चाहिये थी.

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