जनता को फिर लगेगा महंगाई का झटका, पेट्रोल-डीजल के बाद अब ये सामान होगा महंगा
Published by : Abhishek Pandey Updated At : 21 May 2026 2:17 PM
Inflation : ईरान युद्ध और महंगे पेट्रोल-डीजल ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है. दूध, ब्रेड के बाद अब सब्जियां, राशन, ओला-ऊबर का किराया और स्विगी-जोमैटो से खाना मंगाना भी महंगा होने जा रहा है.
Inflation : ईरान संकट और खाड़ी युद्ध (मिडिल ईस्ट तनाव) का असर अब सीधे भारत के आम लोगों की रसोई और जेब पर दिखने लगा है. पहले से ही कुकिंग ऑयल और ड्राई फ्रूट्स जैसी चीजें महंगी चल रही थीं, और अब पेट्रोल-डीजल के दामों में करीब 4 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी ने आग में घी डालने का काम किया है.
हाल ही में अमूल और मदर डेयरी जैसी बड़ी कंपनियों ने दूध के दाम 2-3 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए थे, और मॉडर्न ब्रेड ने भी अपने पैकेट पर 5 रुपये बढ़ा दिए हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह तो सिर्फ शुरुआत है; आने वाले दिनों में महंगाई का झटका और जोर से लगने वाला है.
क्यों बढ़ रहे हैं दाम ?
पेट्रोल-डीजल महंगा होने का सबसे पहला और सीधा असर माल ढुलाई (ट्रांसपोर्टेशन) पर पड़ता है. भारत में आज भी सामान को एक शहर से दूसरे शहर ले जाने वाले ज्यादातर ट्रक डीजल पर ही चलते हैं. ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन के मुताबिक, ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई के खर्च पर 3-4% का सीधा असर पड़ा है. ट्रांसपोर्टर्स ने अपनी लागत निकालने के लिए कानपुर, दिल्ली, इंदौर, कोलकाता, प्रयागराज और वाराणसी जैसे रूटों पर मालभाड़ा 15% तक बढ़ा दिया है. जब फैक्ट्री या खेतों से सामान दुकानों तक पहुंचना महंगा हो जाएगा, तो कंपनियां इसका बोझ आम ग्राहकों की जेब पर ही डालेंगी.
सब्जियां, राशन और बिस्किट सब होंगे महंगे
हिमाचल प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर संजीत सिंह बताते हैं कि ईंधन के दाम बढ़ने से पूरी सप्लाई चेन प्रभावित होती है. ट्रैक्टर, सिंचाई के पंप और खेती की अन्य मशीनें भी डीजल से चलती हैं, जिससे खेती की लागत बढ़ जाती है.
आने वाले दिनों में इन चीजों के दाम बढ़ना तय माना जा रहा है.
- रोजमर्रा का राशन: सब्जियां, दालें, अनाज और दवाइयां.
- FMCG प्रोडक्ट्स: बिस्किट, नमकीन, साबुन और पैकेज्ड फूड. रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटानिया और विब्स जैसी बड़ी कंपनियां जल्द ही अपने दाम बढ़ा सकती हैं.
दिल्ली यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर शिवाजी सिंह का कहना है कि अगर कंपनियां बिक्री घटने के डर से सीधे तौर पर दाम (MSRP) नहीं बढ़ाएंगी, तो वे प्रोडक्ट्स के वजन या क्वांटिटी में कटौती (Shrinkflation) कर सकती हैं. यानी पैसे उतने ही रहेंगे, लेकिन सामान कम मिलेगा.
अगले साल और भड़केगी महंगाई: नोमुरा का अनुमान
वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी नोमुरा और देश के महंगाई आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति चिंताजनक है.
| पैमाना | पिछला आंकड़ा | नया अनुमान / मौजूदा स्थिति |
| भारत की रिटेल महंगाई दर | 3.4% (मार्च) | 3.48% (अप्रैल) |
| खाने-पीने की चीजों की महंगाई (FY 2026-27) | 0.6% (FY 2025-26) | ~6% सालाना (अनुमान) |
स्विगी-जोमैटो और ओला-ऊबर भी होंगे महंगे!
अगर आप घर बैठे खाना मंगाने या ऑफिस जाने के लिए कैब बुक करने के शौकीन हैं, तो आपके लिए भी बुरी खबर है. ब्रोकरेज फर्म एलारा कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल और सीएनजी के दाम बढ़ने के कारण स्विगी (Swiggy) और जोमैटो (Zomato) जैसी कंपनियां आने वाले दिनों में अपना डिलीवरी चार्ज बढ़ा सकती हैं. लोकल टैक्सी, ऑटो, बस और रैपिडो, ओला, ऊबर जैसी राइड-हेलिंग ऐप्स भी अपना किराया बढ़ाने की तैयारी में हैं ताकि वे ईंधन के बढ़े खर्च की भरपाई कर सकें.
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अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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