ATM से पैसे कटे, कैश नहीं निकला… 9 साल बाद ग्राहक को मिला 3.28 लाख का मुआवजा

5 दिन में पैसे नहीं लौटाए, अब बैंक को चुकाने पड़े लाखों (फोटो क्रेडिट- Canva)
Bank of Baroda: सूरत के एक ग्राहक के खाते से एटीएम ट्रांजैक्शन के दौरान पैसे कट गए, लेकिन कैश नहीं निकला. बैंक ने शिकायत के बावजूद रकम वापस नहीं की, जिसके बाद मामला कंज्यूमर कोर्ट पहुंचा. लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट ने बैंक को न सिर्फ 10 हजार रुपये लौटाने, बल्कि देरी के लिए 3.28 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया.
Bank of Baroda: हम सभी के साथ कभी न कभी ऐसा होता है, एटीएम मशीन में कार्ड डाला, पिन भरा, खाते से पैसे कटने का मैसेज भी आ गया, लेकिन मशीन से कैश बाहर नहीं निकला. घबराहट में हम बैंक के चक्कर काटते हैं और अक्सर थक-हार कर बैठ जाते हैं. लेकिन सूरत के एक जागरूक नागरिक ने हार नहीं मानी और आज नतीजा सबके सामने है.
क्या था पूरा मामला ?
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार 18 फरवरी 2017 की बात है, सूरत के रहने वाले एक शख्स उधना के एक SBI एटीएम से पैसे निकालने गए. उनके खाते से 10,000 रुपये कट गए, लेकिन कैश नहीं निकला. उनका बैंक अकाउंट बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) में था. नियम के मुताबिक, ऐसे मामलों में 5 दिन के अंदर पैसे वापस आ जाने चाहिए, लेकिन हफ्तों बीत जाने के बाद भी बैंक ने कोई सुनवाई नहीं की. ग्राहक ने ईमेल किए, चक्कर काटे, यहां तक कि RTI (सूचना का अधिकार) डालकर सीसीटीवी फुटेज भी मांगी, लेकिन बैंक टालमटोल करता रहा.
कोर्ट में बैंक की दलीलें हुईं फेल
जब मामला कंज्यूमर कोर्ट पहुंचा, तो Bank of Baroda ने अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की. बैंक ने दलील दी कि पैसा State Bank of India के एटीएम से निकाला गया था, इसलिए उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती. साथ ही यह भी कहा गया कि उन्हें एसबीआई से सीसीटीवी फुटेज नहीं मिली, जिससे यह साबित नहीं हो पाया कि पैसे निकले या नहीं.
हालांकि, कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया और बैंक को कड़ी फटकार लगाई. कोर्ट ने साफ कहा कि सीसीटीवी फुटेज मिली या नहीं, इससे ग्राहक का कोई लेना-देना नहीं है. ग्राहक के खाते से पैसा कटा है, तो यह साबित करना बैंक की जिम्मेदारी है कि कैश वास्तव में निकला या नहीं. Reserve Bank of India के नियमों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर 5 दिनों के भीतर पैसा वापस नहीं किया जाता, तो बैंक को हर दिन 100 रुपये के हिसाब से हर्जाना देना ही होगा.
10 हजार के बदले मिले 3.28 लाख
कोर्ट ने हिसाब लगाया कि फरवरी 2017 से लेकर अब तक लगभग 3288 दिन बीत चुके हैं. ₹100 रोज के जुर्माने के हिसाब से यह रकम 3 लाख 28 हजार 800 रुपये जा पहुंची. इसके अलावा, कोर्ट ने बैंक को आदेश दिया कि वह मूल 10,000 रुपये पर 9% ब्याज भी दे. अगर बैंक भुगतान में और देरी करता है, तो यह राशि बढ़कर 3.31 लाख रुपये से भी ज्यादा हो जाएगी.
अगर एटीएम से पैसे न निकलें तो क्या करें ?
- तुरंत शिकायत करें: अपने बैंक को फोन या ईमेल के जरिए तुरंत सूचित करें.
- शिकायत नंबर संभालें: हर बातचीत का ट्रांजेक्शन आईडी और कंप्लेंट नंबर संभाल कर रखें.
- 5 दिन का नियम याद रखें: अगर 5 दिन में पैसा वापस न आए, तो छठे दिन से आप ₹100 प्रतिदिन के मुआवजे के हकदार हैं.
- लोकपाल या कोर्ट: अगर बैंक एक महीने तक समाधान न करे, तो आप बैंकिंग लोकपाल या कंज्यूमर फोरम का दरवाजा खटखटा सकते हैं.
- याद रखें: बैंक की तकनीकी गलती की सजा ग्राहक को नहीं मिलनी चाहिए. आपका हक मांगना आपका अधिकार है!
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By Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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