सरकारी बैंकों का नुकसान को पाटने के लिए और धन दिया जायेगा : जेटली

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 06 Jun 2016 4:04 PM

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नयी दिल्ली : वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सरकारी बैंकों का पूंजी-आधार और मजबूत करने के लिए उन्हें और धन मुहैया कराने की सरकार की प्रतिबद्धता जतायी है. जेटली ने आज कहा कि पिछले वित्त वर्ष में इन बैंकों को जो 18,000 करोड रुपये का संचयी नुकसान हुआ वह मुख्य तौर पर वसूल न किए […]

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नयी दिल्ली : वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सरकारी बैंकों का पूंजी-आधार और मजबूत करने के लिए उन्हें और धन मुहैया कराने की सरकार की प्रतिबद्धता जतायी है. जेटली ने आज कहा कि पिछले वित्त वर्ष में इन बैंकों को जो 18,000 करोड रुपये का संचयी नुकसान हुआ वह मुख्य तौर पर वसूल न किए जा सकने वाले ऋण (एनपीए) के लिए ऊंचे पूंजी प्रावधान के कारण है. वित्त मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वस्तुत: 2015-16 में 1.40 लाख करोड रपए का परिचालन लाभ हुआ. उनका कथन इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रदर्शन को उतना बुरा नहीं मानती जितना बुरा उसे पेश जा रहा है.

जेटली ने यहां बैंकिंग क्षेत्र के प्रदर्शन की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पुनपूंर्जीकरण के लिए इस वित्त वर्ष 25,000 करोड रुपये की व्यवस्था की है. जरुरत पडने पर उन्हें और धन मुहैया कराया जा सकता है. जेटली ने कहा, ‘सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल परिचालन लाभ काफी अच्छा रहा। यह 1.40 लाख करोड रुपये से अधिक रहा. ऊंचे पूंजी-प्रावधान करने की जरुरत के कारण ही सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को करीब 18,000 करोड रुपये का नुकसान हुआ है.

पूंजी-प्रावधान का बडा हिस्सा पिछले वित्त वर्ष की आखिरी दो तिमाहियों में किया गया है.’ आज की बैठक में वसूली में अटके ऋणों (एनपीए) के स्टैंड अप इंडिया तथा मुद्रा जैसी वित्तीय सवावेश की योजनाओं, उद्योग को ऋण प्रवाह और बैंकिंग क्षेत्र के विस्तार जैसे विषयों की समीक्षा की गयी. जेटली ने जेटली ने एनपीए वसूली पर विशिष्ट सुझावों के संबंध में कहा कि आज की चर्चा बैंकों को अधिकास संपन्न बनाने, वास्तविक रूप से वाणिज्यिक दृष्टि से लिए गए फैसलों का बचाव और समधान की तलाश या समाधान केंद्रित पहलों के ईद-गिर्द केंद्रित रही.

उन्होंने कहा कि विभिन्न विषयों पर ‘खुलकर’ चर्चा हुई और बैंकों के मुख्य कार्यकारियों ने एनपी से निपटने के संबंध में बैंकों को अधिकार संपन्न बनाने तथा वातावरण में ऐसे सुधार के सुझाव पेश किए ताकि वाणिज्यिक दृष्टि से समुचित फैसले किए जा सके. उन्होंने कहा कि सरकार इस संबंध में पूरी तरह से बैंकों के समर्थन के लिए प्रतिबद्ध है. दिवालिया एवं शोधन अक्षमता संहिता पारित किया जा चुकी है. यह जल्दी ही लागू हो जाएगा.

उन्होंने कहा, ‘ऋण वसूली कानून में और प्रतिभूतिकरण कानून में संशोधन के प्रस्ताव के समक्ष हैं. संयुक्त समिति इस पर विचार कर रही है. उम्मीद है कि हम एनपीए से निपटने में बैंकों को और सशक्त बना सकेंगे.’ जेटली ने कहा कि सरकार बैठक में एनपीए की समस्या के समाधान के संबंध में पेश अन्य सुझावों पर चर्चा करेगी.

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