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किसान दिवस: कृषि क्षेत्र में 8 साल में बढ़ा 56900 करोड़ का निवेश, किसानों को सब्सिडी में 50% की वृद्धि

Updated at : 23 Dec 2022 12:37 PM (IST)
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किसान दिवस: कृषि क्षेत्र में 8 साल में बढ़ा 56900 करोड़ का निवेश, किसानों को सब्सिडी में 50% की वृद्धि

Prabhat Khabar Explainer: आइए, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और किसान नेता चौधरी चरण सिंह की जयंती (23 दिसंबर), जिसे राष्ट्रीय किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है, के अवसर पर जानते हैं कि भारत में कृषि के क्षेत्र में निवेश का ट्रेंड क्या है.

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Prabhat Khabar Explainer: भारत में किसानों को अन्नदाता का दर्जा दिया गया है. ये अन्नदाता अब तक भगवान भरोसे ही खेती-बाड़ी करते रहे हैं. धीरे-धीरे कृषि क्षेत्र में बदलाव आने लगा है. कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र में निवेश होने लगे हैं. हाल के वर्षों में कृषि क्षेत्र में होने वाले निवेश में वृद्धि देखी गयी है. सरकार ने भी किसानों को सब्सिडी (Subsidy To Farmers) के साथ-साथ खेती-बाड़ी के लिए उन्हें पीएम किसान सम्मान निधि (PM Kisan Samman Nidhi) के रूप में साल में 6,000 रुपये की दे रही है. इस सेक्टर में निवेश बढ़ने से कृषि क्षेत्र का परिदृश्य बदलने की उम्मीद है. आइए, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और किसान नेता चौधरी चरण सिंह की जयंती (23 दिसंबर), जिसे राष्ट्रीय किसान दिवस (National Farmers Day) के रूप में मनाया जाता है, के अवसर पर जानते हैं कि भारत में कृषि (Agriculture in India) के क्षेत्र में अब निवेश का ट्रेंड (Investment Trend in Agriculture Sector) कैसा है. किस तरह से इस क्षेत्र में निवेश बढ़ रहा है.

कृषि क्षेत्र में धीरे-धीरे बढ़ रही है निवेश की रफ्तार

भारत में कृषि क्षेत्र में निवेश (Investment in Agriculture) की रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ रही है. पिछले 8 साल में ही इस क्षेत्र में होने वाले निवेश में 56,900 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है. वर्ष 2011-12 में 35,700 करोड़ रुपये का निवेश हुआ करता था. वर्ष 2018-19 में यह बढ़कर 92,600 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, सब्सिडी (Subsidy to Farmers) की राशि में 50 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है. नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (NITI) आयोग के सदस्य (कृषि) प्रो रमेश चंद ने अपने एक लेक्चर में यह जानकारी दी.

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2011-12 में कृषि क्षेत्र में 35,700 करोड़ रुपये का निवेश

आजादी का अमृत महोत्सव शृंखला के तहत आयोजित ICAR लेक्चर सीरीज में प्रो रमेश चंद ने भारत के कृषि परिदृश्य पर ‘एग्रिकल्चर इन पोस्ट इंडिपेंडेंट इंडिया: लुकिंग बैक एंड लुकिंग अहेड’ विषयक व्याख्यान दिया था. इसमें उन्होंने कई तथ्य पेश किये. इसमें उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2011-12 में कृषि क्षेत्र में 35,700 करोड़ रुपये का निवेश हुआ करता था.

भारत में ऐसे बढ़ा कृषि क्षेत्र में निवेश का ट्रेंड

वर्ष 2012-13 में यह बढ़कर 39,700 करोड़ रुपये हो गया. वर्ष 2013-14 में इसमें ममूली वृद्धि दर्ज की गयी. इस वर्ष निवेश की राशि 40,800 करोड़ रुपये हो गयी, जबकि वर्ष 2014-15 में यह बढ़कर 47,300 करोड़ रुपये हो गया. वर्ष 2015-16 में निवेश की रकम 56,200 करोड़ रुपये, वर्ष 2016-17 में 66,900 करोड़ रुपये, वर्ष 2017-18 में 67,100 करोड़ रुपये हो गयी. वर्ष 2018-19 में इसमें अप्रत्याशित वृद्धि हुई. निवेश की राशि बढ़कर 92,600 करोड़ रुपये हो गयी.

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2018-19 में किसानों को सरकार ने दी 1,51,300 करोड़ की सब्सिडी

प्रो रमेश चंद ने कृषि पर दी जाने वाली सब्सिडी के बारे में भी अपने व्याख्यान में बताया. उन्होंने कहा कि वर्ष 2018-19 में सरकार ने 1,51,300 करोड़ रुपये की सब्सिडी किसानों को दी, जो वर्ष 2011-12 में 1,00,500 करोड़ रुपये हुआ करती थी. यह रकम वर्ष 2012-13 में 1,07,600 करोड़ रुपये, वर्ष 2013-14 में 1,03,200 करोड़ रुपये, वर्ष 2014-15 में 1,06,200 करोड़ रुपये, वर्ष 2015-16 में 1,08,100 करोड़ रुपये, वर्ष 2016-17 में 97,600 करोड़ रुपये, वर्ष 2017-18 में 1,27,300 करोड़ रुपये और वर्ष 2018-19 में 1,51,300 करोड़ रुपये हो गयी. बता दें कि सब्सिडी की इस राशि में किसानों को बिजली पर दी जाने वाली सब्सिडी शामिल नहीं है.

2018-19 में किसानों को 1.51 लाख करोड़ की सब्सिडी
वर्षसब्सिडी की राशि
2011-12“100500 करोड़ रुपये”
2012-13“107600 करोड़ रुपये”
2013-14“103200 करोड़ रुपये”
2014-15“106200 करोड़ रुपये”
2015-16“108100 करोड़ रुपये”
2016-17“97600 करोड़ रुपये”
2017-18“127300 करोड़ रुपये”
2018-19“151300 करोड़ रुपये”

जीडीपी का 10 फीसदी से ज्यादा खर्च कृषि सब्सिडी पर

नीति आयोग के सदस्य प्रो चंद ने बताया कि भारत सरकार कुल जीडीपी का 10 फीसदी से ज्यादा कृषि सब्सिडी पर खर्च करती है. इसमें बिजली पर दी जाने वाली सब्सिडी शामिल है. 2 फीसदी राशि पीएम किसान सम्मान निधि के रूप में किसानों के खाते में सरकार ट्रांसफर करती है. प्रो चंद के मुताबिक, कुल जीडीपी के 2.62 फीसदी के बराबर रकम सरकार कृषि क्षेत्र में निवेश करती है. इस क्षेत्र में निजी एवं कॉर्पोरेट निवेशकों की हिस्सेदारी सिर्फ 1.22 फीसदी है.

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वर्ष 2018-19 में किसानों को मिली इतनी सब्सिडी

प्रो रमेश चंद के मुताबिक, सरकार ने वर्ष 2018-19 में किसानों को प्रति हेक्टेयर 10,728 रुपये की सब्सिडी दी. सब्सिडी की यह रकम वर्ष 2011-12 में 7,128 रुपये प्रति हेक्टेयर हुआ करती थी. वर्ष 2012-13 में 7,631 रुपये, वर्ष 2013-14 में 7,319 रुपये, वर्ष 2014-15 में 7,532 रुपये, वर्ष 2015-16 में 7,670 रुपये, वर्ष 2016-17 में 6,923 रुपये, वर्ष 2017-18 में 9,029 रुपये और वर्ष 2018-19 में 10,728 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से सरकार ने किसानों को सब्सिडी दी.

किसानों को प्रति हेक्टेयर सब्सिडी की राशि
वर्षप्रति हेक्टेयर सब्सिडी की राशि
2011-12“7128 रुपये”
2012-13“7631 रुपये”
2013-14“7319 रुपये”
2014-15“7532 रुपये”
2015-16“7670 रुपये”
2016-17“6923 रुपये”
2017-18“9029 रुपये”
2018-19“10728 रुपये”

कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र का जीडीपी में है 20 फीसदी योगदान

प्रो रमेश चंद की मानें, तो कृषि क्षेत्र भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 20 फीसदी का योगदान देता है. भारत में 40 फीसदी रोजगार कृषि क्षेत्र ही लोगों को देता है. इतना ही नहीं, जनकल्याणकारी योजनाओं को कृषि की मदद से ही लागू किया जाता है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत सालाना 41 अरब डॉलर के कृषि उत्पादों का निर्यात करता है, जबकि 20 बिलियन डॉलर का आयात करता है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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