दालों के दाम पर अंकुश लगाने के लिये हो सकता है आयात

Updated at : 12 May 2015 1:34 PM (IST)
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दालों के दाम पर अंकुश लगाने के लिये हो सकता है आयात

नयी दिल्ली : सरकार एमएमटीसी जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के जरिए दलहन आयात पर विचार कर रही है ताकि घरेलू आपूर्ति बढाई जा सके और इनके बढते खुदरा मूल्य पर लगाम लगाई जा सके. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सामान्य से कम बारिश और आस्ट्रेलिया एवं कनाडा में उत्पादन घटने की संभावनाओं के […]

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नयी दिल्ली : सरकार एमएमटीसी जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के जरिए दलहन आयात पर विचार कर रही है ताकि घरेलू आपूर्ति बढाई जा सके और इनके बढते खुदरा मूल्य पर लगाम लगाई जा सके. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सामान्य से कम बारिश और आस्ट्रेलिया एवं कनाडा में उत्पादन घटने की संभावनाओं के बीच उपभोक्ता मामले मंत्रालय दलहन आयात के विकल्पों पर विचार कर रहा है.

भारत सालाना 1.8 से 1.9 करोड टन दलहन का उत्पादन करता है लेकिन उसे घरेलू मांग पूरी करने के लिए हर साल 30-40 लाख टन दलहन आयात भी करना पडता है. पिछले दो साल में दलहन आयात मुख्य तौर पर निजी व्यापारियों के जरिए हुआ है. खुदरा बाजार में दलहन की कीमत बढी है. राष्ट्रीय राजधानी में फिलहाल तुअर (अरहर) की कीमत 108 रुपये प्रति किलो है जो आठ जनवरी 2015 को 83 रुपये किलो थी.

इसी तरह चने की दाल का दाम बढकर 68 रुपये प्रति किलो हो गया जबकि मसूर की दाल 94 रुपये किलो हो गई जो समीक्षाधीन अवधि में 84 रुपये किलो थी. मूंग की दाल की कीमत अब 107 रुपये किलो है जो आठ जनवरी को 98 रुपये थी. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा ‘हम कीमत पर निगाह रखे हुए हैं और आयात के लिए हम योजना बना रहे हैं. हम यह पहल इसलिए कर रहे हैं कि कनाडा और आस्ट्रेलिया में संभावित उत्पादन घटने और वैश्विक मूल्य पर इसके असर की खबरें हैं.’

अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय घरेलू बाजार में दलहन उपलब्धता बढाने के लिए पहल करने पर विचार कर रहा है. दलहन उत्पादन मुख्य तौर पर वर्षा सिंचित क्षेत्र में होती है. मानसूनी बारिश में कमी से मूंग, उडद और अरहर के उत्पादन और उनकी कीमत पर असर हो सकता है. मंत्रालय जल्दी ही आयात मुद्दे पर विचार करेगा ताकि कनाडा और आस्ट्रेलिया से उत्पादन घटने के मद्देनजर इथोपिया और तंजानिया जैसे अन्य देशों पर विचार करने की जरुरत है.

मूल्य के संबंध में अधिकारी ने कहा ‘फिलहाल ऐसी कोई चिंता नहीं है. हम अग्रिम योजना बना रहे हैं ताकि आयात के जरिए आपूर्ति बढाने के लिए समय पर हस्तक्षेप किया जा सके.’ केंद्र ने पिछले दो वित्त वर्षों के दौरान एमएमटीसी, एसटीसी और पीईसी जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के जरिए दलहन का आयात नहीं किया है.

संसद की लोक लेखा समिति ने अपनी ताजा रपट में दलहन में आत्म-निर्भरता और आयात के लिए अग्रिम योजना संबंधी दीर्घकालिक निति के अभाव के लिए सरकार की खिंचाई की है. आधिकारिक आंकडों के मुताबिक देश में निजी व्यापार के जरिए 2013-14 में 40 लाख टन दलहन आयात हुआ जबकि 2014-15 में 34 लाख टन का आयात हुआ. वित्त वर्ष 2014-15 में दलहन का उत्पादन घटकर 1.84 करोड टन रहा जो पिछले साल 1.97 करोड टन था.

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