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तापी गैस योजना में पांच साल लगेंगे, तब तक उर्वरक व रसायन में करें निवेश : अशरफ गनी

नयी दिल्ली : अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने आज कहा कि 10 अरब डालर की तापी गैस पाइपलाइन परियोजना का निर्माण कार्य अगले पांच साल में पूरा कर लिया जाएगा. इसके साथ ही गनी ने भारतीय कंपनियों से कहा कि वे अफगानिस्तान व तुर्कमेनिस्तान से प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल करते हुए उर्वरक व रसायन […]

नयी दिल्ली : अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने आज कहा कि 10 अरब डालर की तापी गैस पाइपलाइन परियोजना का निर्माण कार्य अगले पांच साल में पूरा कर लिया जाएगा.
इसके साथ ही गनी ने भारतीय कंपनियों से कहा कि वे अफगानिस्तान व तुर्कमेनिस्तान से प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल करते हुए उर्वरक व रसायन उत्पादन में निवेश करें. महत्वाकांक्षी तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत (तापी) गैस पाइपलाइन के 2018 तक शुरु होने की संभावना है.
गनी ने यहां एक व्यवसायिक कार्यक्रम में कहा, तुर्कमेनिस्तान से अफगानिस्तान और वहां से पाकिस्तान फिर भारत को पाइपलाइन के साथ प्रेषण (ट्रांसमिटिंग) के लिए एक खाका तैयार किया गया है. लेकिन मैं आपको एक अन्य विकल्प में निवेश का न्योता देता हूं. तापी को पांच साल लगेंगे. मैं भारतीय उद्योग को न्योता देता हूं कि वह तुर्कमेनिस्तान व अफगानिस्तान से प्राकृतिक गैस आपूर्ति पर आधारित उर्वरकों व रसायनों के उत्पादन में हमारे साथ जुडें.
उल्लेखनीय है कि तापी में शामिल चारों देश एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय कंपनी नहीं खोज पाए हैं जो कि उस समूह की अगुवाई करें जो कि पाइपलाइन बिछाए और उसका परिचालन करे. गनी ने कहा, वैश्विक उर्वरक उद्योग सीमित आपूर्ति की बडी समस्या से जूझ रहा है, तुर्कमेनिस्तान की गैस उपलब्ध है. अगर हम इसका दोहन नहीं करेंगे तो हो सकता है कि हम इस अवसर को खो दें.
उन्होंने कहा, मैं एक छोटे रास्ते का प्रस्ताव करता हूं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस रुख में रुचि दिखाई है. अफगानिस्तान को उर्वरक व रसायनों के केंद्र में बदलने के लिए हमें आपकी जरुरत है. इस अवधारणा में बिजली मुख्य नहीं बल्कि सहायक उत्पाद के तौर पर होगी.
इसके साथ ही गनी ने भारतीय उद्योग जगत से अफगानिस्तान में निवेश करने को कहा. उन्होंने कहा कि वहां विशेषकर रेलवे, बिजली उत्पादन, खनन तथा कौशल विकास में निवेश की बडी संभावनाएं मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि हम अफगानिस्तान के कायापलट में भारतीय निजी क्षेत्र को प्रमुख भागीदार के रुप में देखते हैं.

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