ePaper

सरकारी बैंकों के प्रमुखों ने कृषि ऋण माफी पर सवाल खड़ा किया

Updated at : 04 Jan 2015 7:02 PM (IST)
विज्ञापन
सरकारी बैंकों के प्रमुखों ने कृषि ऋण माफी पर सवाल खड़ा किया

पुणे: बैंकिंग क्षेत्र पर कृषि ऋण माफी कार्यक्रमों के प्रतिकूल प्रभाव को रोकने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों ने इस तरह की योजनाओं को बंद करने की एक सुर में मांग की है. पिछले महीने, रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा था कि ऋण माफी योजनाओं से किसानों तक ऋण का प्रभाव […]

विज्ञापन

पुणे: बैंकिंग क्षेत्र पर कृषि ऋण माफी कार्यक्रमों के प्रतिकूल प्रभाव को रोकने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों ने इस तरह की योजनाओं को बंद करने की एक सुर में मांग की है.

पिछले महीने, रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा था कि ऋण माफी योजनाओं से किसानों तक ऋण का प्रभाव बाधित हुआ है. उन्होंने कहा था, ‘‘ कुछ राज्यों में खास मौकों पर हमने ऋण माफी योजनाएं चलाईं.ये ऋण माफी योजनाएं कितनी प्रभावी रहीं.वास्तव में अध्ययनों से पता चलता है कि ये निष्प्रभावी रहीं.वास्तव में इन योजनाओं के बाद किसानों के लिए ऋण का प्रवाह बाधित हुआ है.’’
कल यहां संपन्न हुए बैंकों के सम्मेलन ‘ज्ञान संगम’ में ऋण माफी योजनाओं को खत्म करने के पक्ष में सभी बैंक प्रमुख दिखे. इसके अलावा, बैंकों ने तीन लाख रपये से कम के कृषि ऋणों पर ब्याज दर की सीमा हटाने की भी मांग की जिससे ऋण बाजार में किसी तरह की कृत्रिम विकृति न रहे. गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सरकारों ने पिछले साल आए चक्रवाती तूफान फैलिन से प्रभावित किसानों के ऋण माफ करने की घोषणा की थी.इन दो राज्यों में बैंकों ने कृषि क्षेत्र को 1.3 लाख करोड रपये से अधिक का ऋण दे रखा है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola