रघुराम राजन के फैसले से उद्योग जगत हुआ नाखुश
Updated at : 02 Dec 2014 5:09 PM (IST)
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नयी दिल्ली: नीतिगत दरों में यथास्थिति बनाये रखने के रिजर्व बैंक के रुख से उद्योग जगत में नाराजगी का आलम है. केन्द्रीय बैंक के इस फैसले से नाराज उद्योग जगत ने कहा है कि आर्थिक वृद्धि की सुस्त चाल को बढाने के लिये रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कमी लाकर बेहतर तालमेल और सामंजस्य बिठा […]
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नयी दिल्ली: नीतिगत दरों में यथास्थिति बनाये रखने के रिजर्व बैंक के रुख से उद्योग जगत में नाराजगी का आलम है. केन्द्रीय बैंक के इस फैसले से नाराज उद्योग जगत ने कहा है कि आर्थिक वृद्धि की सुस्त चाल को बढाने के लिये रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कमी लाकर बेहतर तालमेल और सामंजस्य बिठा सकता है.
प्रमुख वाणिज्य एवं उद्योग मंडलों ने कहा कि दरों में कटौती से विनिर्माण क्षेत्र को सकारात्मक संकेत दिया जा सकता था जो मुश्किल दौर से गुजर रहा है. फिक्की के अध्यक्ष सिद्धार्थ बिड़ला ने एक बयान में कहा- हालांकि, ढांचागत क्षेत्र में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन मांग में नरमी के चलते विनिर्माण क्षेत्र में नरमी रही जिससे क्षमता उपयोग में सुधार पर नियंत्रण लगा है. उन्होंने कहा हमें उम्मीद है कि आरबीआइ अगले नीतिगत समीक्षा चक्र से पहले सकारात्मक संकेत दे सकता है. उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा है कि रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कमी लाने की उद्योगों की मांग को नजरंदाज किया है जबकि उद्योगों की निम्न ब्याज दर परिवेश बनाये जाने की मांग पूरी तरह उचित है.
एसोचैम के अनुसार, केवल अर्थिक वृद्धि से ही रोजगार की समस्या से निपटा जा सकता है और अंतत: आपूर्ति बढाकर मुद्रास्फीति पर काबू पाया जा सकता है. आर्थिक वृद्धि के जरिये ही मुद्रास्फीति को सतत आधार पर नियंत्रण में रखने के लिये संरचनात्मक बदलाव लाये जा सकते हैं.
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