RBI ने ब्याज दरों में नहीं किया कोई बदलाव, आर्थिक वृद्धि दर 6% रहने का जताया अनुमान
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 06 Feb 2020 12:17 PM
मुंबई : आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष की आखिरी द्विमासिक समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दरों को यथावत रखने की घोषणा की. यह लगातार दूसरा मौका है जब केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट एवं रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया. रिजर्व बैंक ने रेपो दर को 5.15 प्रतिशत पर यथावत रखा है. गुरुवार को […]
मुंबई : आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष की आखिरी द्विमासिक समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दरों को यथावत रखने की घोषणा की. यह लगातार दूसरा मौका है जब केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट एवं रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया. रिजर्व बैंक ने रेपो दर को 5.15 प्रतिशत पर यथावत रखा है. गुरुवार को रिजर्व बैंक ने कहा कि जब तक संभव है, वह नीतिगत रुख को उदार बनाये रखेगा. अर्थव्यवस्था में नरमी बरकरार है, आर्थिक वृद्धि दर संभावित क्षमता से नीचे है.
रिजर्व बैंक ने गुरुवार को अगले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर छह प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया. रिजर्व बैंक ने आर्थिक समीक्षा में दिये गये आर्थिक वृद्धि के अनुमान के निचले स्तर पर अगले वित्त वर्ष की वृद्धि का अनुमान लगाया है. संसद में 31 जनवरी को पेश आर्थिक समीक्षा में 2020-21 में आर्थिक वृद्धि दर छह से 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है.
रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में यहां हुई तीन दिवसीय बैठक के बाद मौद्रिक नीति समिति ने पाया कि अर्थव्यवस्था में नरमी अभी भी बरकरार है और आर्थिक वृद्धि की गति क्षमता से कमजोर बनी हुई है. रिजर्व बैंक ने दिसंबर में पेश मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में 2019-20 के लिये आर्थिक वृद्धि दर पांच प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया था.
रिजर्व बैंक ने कहा कि 2020-21 में आर्थिक वृद्धि परिदृश्य को निजी उपभोग का स्तर तथा बाह्य कारकों समेत विभिन्न कारक प्रभावित करेंगे. उसने कहा कि निजी उपभोग में, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में रबी फसल की बेहतर संभावनाओं के मद्देनजर सुधार होने की उम्मीद है. खाद्य पदार्थों की कीमतों में हालिया तेजी ने व्यापार संतुलन कृषि के पक्ष में किया है, इससे ग्रामीण आय को समर्थन मिलने की उम्मीद है। उसने कहा कि वैश्विक व्यापार की अनिश्चितताओं में नरमी आने से निर्यात को प्रोत्साहन मिलने तथा निवेश गतिविधियों में तेजी आने का अनुमान है. रिजर्व बैंक ने कहा कि हालांकि कोरोना वायरस के फैले संक्रमण से पर्यटकों की आवक तथा वैश्विक व्यापार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.
रिजर्व बैंक ने कहा कि ग्रामीण व बुनियादी संरचना खर्च बढ़ाने के उपायों के साथ ही आम बजट में व्यक्तिगत आयकर को तार्किक बनाये जाने से घरेलू मांग को समर्थन मिलने की उम्मीद है. रिजर्व बैंक ने विभिन्न कारकों का संज्ञान लेते हुए आर्थिक वृद्धि दर के 2020-21 में छह प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया. उसने कहा कि आर्थिक वृद्धि दर 2020-21 की पहली छमाही में 5.5 से छह प्रतिशत तथा तीसरी तिमाही में 6.2 प्रतिशत रह सकती है.
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