टेलीकॉम रिवेन्यू की परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दूरसंचार उद्योग ने बताया विनाशकारी

Updated at : 24 Oct 2019 8:58 PM (IST)
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टेलीकॉम रिवेन्यू की परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दूरसंचार उद्योग ने बताया विनाशकारी

नयी दिल्ली : दूरसंचार उद्योग ने दूरसंचार राजस्व की परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ‘विनाशकारी प्रभाव’ वाला करार दिया है. दूरसंचार क्षेत्र की प्रमुख कंपनी वोडाफोन-आइडिया ने कहा है कि दूरसंचार राजस्व की परिभाषा पर इस फैसले का उद्योग पर काफी प्रतिकूल असर पड़ेगा. कंपनी ने कहा कि वह कानूनी सलाह के बाद […]

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नयी दिल्ली : दूरसंचार उद्योग ने दूरसंचार राजस्व की परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ‘विनाशकारी प्रभाव’ वाला करार दिया है. दूरसंचार क्षेत्र की प्रमुख कंपनी वोडाफोन-आइडिया ने कहा है कि दूरसंचार राजस्व की परिभाषा पर इस फैसले का उद्योग पर काफी प्रतिकूल असर पड़ेगा. कंपनी ने कहा कि वह कानूनी सलाह के बाद इस निर्णय के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करेगी. वहीं, एक अन्य दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल ने कहा कि शीर्ष अदालत के फैसले से कंपनियों की वित्तीय स्थिति कमजोर होगी.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निराशा जताते हुए वोडाफोन-आइडिया ने सरकार से उद्योग पर वित्तीय दबाव को कम करने के लिए तरीके ढूंढने का आग्रह किया है. वोडाफोन-आइडिया ने कहा कि हम इस फैसले का अध्ययन करेंगे. अपने कानूनी सलाहकारों से विचार-विमर्श के बाद हम अगला कदम उठायेंगे. यदि ऐसा करने के लिए किसी तरह का तकनीकी या प्रक्रियागत आधार होगा, तो उसे पुनर्विचार याचिका में शामिल किया जायेगा. कंपनी ने कहा कि इस फैसले का देश के दूरसंचार उद्योग पर विनाशकारी असर पड़ेगा. यह उद्योग पहले से ही भारी वित्तीय दबाव से जूझ रहा है.

वहीं, एयरटेल ने भी इसी तरह की राय जताते हुए कहा कि सरकार को इसके प्रभाव की समीक्षा करनी चाहिए और संकट से गुजर रहे उद्योग पर वित्तीय बोझ को कम करने के रास्ते तलाशने चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने दूरसंचार सेवाप्रदाताओं से करीब 92,000 करोड़ रुपये की समायोजित सकल आय (दूरसंचार सेवाओं की बिक्री से प्राप्त आय) की वसूली के लिए केंद्र की याचिका स्वीकार कर ली है. इससे कंपनियों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा.

एयरटेल ने फैसले पर निराशा जताते हुए कहा कि दूरसंचार सेवा प्रदाता दूरसंचार क्षेत्र को विकसित करने और ग्राहकों को विश्वस्तरीय सेवाएं देने के लिए अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब दूरसंचार क्षेत्र वित्तीय संकट से गुजर रहा है और यह फैसला क्षेत्र की सफलतापूर्वक काम करने की क्षमता को और कमजोर कर सकता है. कंपनी ने कहा कि इस फैसले का असर 15 पुरानी दूरसंचार कंपनियों पर पड़ा है. एयरटेल पर अकेले 21,000 करोड़ रुपये की देनदारी होने का अनुमान है.

वहीं, दूरसंचार सेवाप्रदाता कंपनियों के संगठन सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने दूरसंचार राजस्व परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को उद्योग के लिए विनाशकारी बताते हुए कहा कि उद्योग को पहले से ही अनिश्चित वित्तीय परिस्थितियों का सामना कर रहा है. सीओएआई के महानिदेशक राजन मैथ्यू ने कहा कि सवाल यह है कि क्या यह वह वित्तीय लाठी है, जो अंतत: दूरसंचार सेवाप्रदाताओं की कमर तोड़ देगी. मैथ्यू ने कहा कि मौजूदा तनाव की स्थिति में यह फैसला उद्योग के लिए ‘विनाशकारी’ होगा.

डेलॉइट इंडिया में प्रौद्योगिकी मीडिया और दूरसंचार (टीएमटी) के लीडर हेमंत जोशी ने कहा कि यह पहले से घाटे में चल रहे दूरसंचार उद्योग पर और दबाव बढ़ायेगा. ईवाई में टीएमटी (उभरते बाजार) लीडर प्रशांत सिंघल ने कहा कि इस निर्णय का उद्योग पर बहुत असर पड़ेगा, जबकि वह पहले से ही वित्तीय दबाव में है.

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