बजट में मर्चेंट डिस्काउंट रेट खत्म करने से पेमेंट इंडस्ट्री को सता रहा बर्बाद होने का डर

मुंबई : भुगतान (पेमेंट) उद्योग ने आगाह किया है कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को समाप्त करने से वे बुरी तरह प्रभावित होंगे और भुगतान कारोबार उद्योग ढह जायेगा. पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया ने सोमवार को बयान में कहा कि सरकार का यह कदम तमाम अध्ययनों, यहां तक कि हाल में जारी रिजर्व बैंक के […]
मुंबई : भुगतान (पेमेंट) उद्योग ने आगाह किया है कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को समाप्त करने से वे बुरी तरह प्रभावित होंगे और भुगतान कारोबार उद्योग ढह जायेगा. पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया ने सोमवार को बयान में कहा कि सरकार का यह कदम तमाम अध्ययनों, यहां तक कि हाल में जारी रिजर्व बैंक के दृष्टि दस्तावेज का उलट है. अभी प्रत्येक डिजिटल लेन-देन पर दो फीसदी एमडीआर देने का प्रावधान है. इससे मध्यस्थ इकाइयों को ढांचे की लागत निकालने में मदद मिलती है.
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काउंसिल के मानद चेयरमैन नवीन सूर्या ने कहा कि अभी सिर्फ 10 फीसदी भारतीय ही डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करते हैं. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब जरूरत इस बात की है कि इसके अधिक से अधिक खिलाड़ी इस क्षेत्र में उतरें, जिससे यह सेवा अधिक व्यापक हो सके. उन्होंने आगाह किया कि एमडीआर को समाप्त करने की घोषणा से पूरा डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री बिना किसी कारोबार और राजस्व मॉडल के रह जायेगा.
वर्ल्डलाइन के दक्षिण एशिया और मध्यपूर्व प्रमुख दीपक चंदनानी ने कहा कि बैंकों को शून्य एमडीआर का बोझ उठाने को कहा जायेगा, जिससे प्राप्ति कारोबार करने वाले का मुनाफा प्रभावित होगा. यह भी हो सकता है कि बैंक इसमें से कुछ भरपाई फिनटेक भागीदारों से करने का प्रयास करें, जिससे पूरा पारिस्थितिकी तंत्र नकारात्मक तरीके से प्रभावित होगा.
उनका मानना है कि बजट में की गयी इस पहल से डिजिटल पेमेंट के तरीकों का इस्तेमाल करने वालों की संख्या में फिर से कमी आ सकती है. नोटबंदी के बाद डिजिटल पेमेंट 14 फीसदी तक पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद से इसमें गिरावट बनी हुई है.
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