एक हफ्ते में दूसरे दिन की हड़ताल में शामिल हुए 10 लाख बैंक कर्मचारी, कामकाज पूरी तरह से रहा ठप

By Prabhat Khabar Digital Desk
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मुंबई : सार्वजनिक क्षेत्र के विजया और देना बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय को लेकर एक ही हफ्ते में दूसरे दिन बुधवार को बैंकों की हड़ताल में देश भर में करीब 10 लाख कर्मचारी शामिल हुए, जिससे पूरे दिन सरकारी बैंकों का कामकाज ठप रहा. हालांकि, हड़ताल में शामिल यूनियनों के पदाधिकारियों का दावा यह भी है कि हड़ताल के दौरान चेक समाशोधन के लिए विभिन्न केंद्रों पर वरिष्ठ पदाधिकारियों को तैनात किया गया था.

सार्वजनिक क्षेत्र के विजया बैंक और देना बैंक के सरकारी क्षेत्र के ही एक बड़े बैंक ऑफ बड़ौदा में प्रस्तावित विलय के विरोध में बैंक कर्मचारियों की बुधवार को हड़ताल से बैंक सेवाएं प्रभावित हुईं. बैंक यूनियनों का दावा है कि हड़ताल में सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंक, पुरानी पीढ़ी के निजी क्षेत्र के बैंक तथा कुछ विदेशी बैंक के करीब 10 लाख कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए. यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने हड़ताल के आह्वान पर एक सप्ताह से भी कम समय में यह दूसरी हड़ताल है. इससे पहले, 21 दिसंबर को बैंक अधिकारियों ने वेतन वृद्धि और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रस्तावित विरोध को लेकर हड़ताल की थी.

यूएफबीयू नौ बैंक यूनियनों का संगठन है. इसमें ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन, द ऑल इंडिया बैंक एंप्लाइज एसोसिएशन और नेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स समेत अन्य यूनियन शामिल हैं. एक यूनियन-पदाधिकारी ने दावा किया कि हड़ताल के कारण केवल महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात में 2,000 रुपये मूल्य के चेक समाशोधन में अटक गये.

इस बीच, इंदौर से मिली खबर के अनुसार, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन की मध्य प्रदेश इकाई के संयोजक एमके शुल्क ने कहा कि राज्य में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की करीब 7,000 शाखाएं हड़ताल के कारण प्रभावित हुईं. उन्होंने दावा किया कि कुछ निजी क्षेत्र के बैंक भी हड़ताल से प्रभावित हुए. हालांकि, बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने दावा किया कि कामकाज सामान्य रहा.

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हमने सभी चेक समाशोधन केंद्रों पर वरिष्ठ अधिकारियों को तैनात किया था, ताकि हमारे ग्राहकों पर असर नहीं पड़े. ट्रेजरी समेत सभी कामकाज सामान्य रहे. यूनियनों का दावा है कि विजया बैंक और देना बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय से बैंक और ग्राहक दोनों के हित प्रभावित होंगे.

सरकार ने सितंबर में विजया और देना बैंक के बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय की घोषणा की थी. विलय के बाद अस्तित्व में आने वाली इकाई का कारोबार 14,820 करोड़ रुपये का होगा. स्टेट बैंक और एचडीएफसी बैंक के बाद तीसरा सबसे बड़ा बैंक होगा. एक यूनियन नेता ने कहा कि इस विलय से कई शाखाएं बंद होंगी और ग्राहकों को कठिनाइयों का सामना करना होगा, क्योंकि बैंकों पर जनधन योजना, मुद्रा योजना सामाजिक सुरक्षा योजना जैसी विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर पहले से दबाव है.

विरोध के बावजूद सरकार ने पिछले सप्ताह प्रस्तावित विलय को मंजूरी दे दी. पिछले सप्ताह सार्वजनिक क्षेत्र के करीब 3.20 लाख अधिकारियों ने प्रस्तावित विलय के विरोध और वेतन संशोधन तत्काल लागू करने की मांग को लेकर एक दिन की हड़ताल की थी. बैंकों के प्रबंधन ने इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) को स्केल 1 से 3 तक के कर्मचारियों के लिए वेतन समीक्षा को लेकर बातचीत की जिम्मेदारी दी है, लेकिन कर्मचारी इसे स्केल 7 तक के कर्मचारियों तक लागू करने की मांग कर रहे हैं.

यूनियनों और बैंक प्रबंधकों के मंच आईबीए के बीच वेतन संशोधन को लेकर बातचीत पिछले 13 महीने से चल रही है. आईबीए ने वेतन में 8 फीसदी वृद्धि का प्रस्ताव किया है. पिछले वेतन संशोधन (एक नवंबर 2012 से 31 अक्टूबर 2017 के लिए) में कर्मचारियों के वेतन में 15 फीसदी की वृद्धि की थी.

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