गैस के नये मूल्य की घोषणा 1 जुलाई तक

Updated at : 05 Jun 2014 6:01 PM (IST)
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गैस के नये मूल्य की घोषणा 1 जुलाई तक

नयी दिल्ली : सरकार 1 जुलाई से प्राकृतिक गैस की कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती है. पेट्रोलियम मंत्रालय के एक शीर्ष सूत्र ने कहा कि नये मूल्य फार्मूले को कैबिनेट की मंजूरी के बाद गैस के नये मूल्य की घोषणा की जाएगी. सी रंगराजन की अगुवाई वाली समिति के फार्मूले पर आधारित प्राकृतिक गैस कीमत […]

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नयी दिल्ली : सरकार 1 जुलाई से प्राकृतिक गैस की कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती है. पेट्रोलियम मंत्रालय के एक शीर्ष सूत्र ने कहा कि नये मूल्य फार्मूले को कैबिनेट की मंजूरी के बाद गैस के नये मूल्य की घोषणा की जाएगी.

सी रंगराजन की अगुवाई वाली समिति के फार्मूले पर आधारित प्राकृतिक गैस कीमत में पहली मूल्यवृद्धि मूल रुप से 1 अप्रैल से लागू होनी थी. हालांकि, गैस के नये दाम की घोषणा से पहले आम चुनाव की वजह से इसका क्रियान्वयन टाल दिया गया.

सूत्र ने कहा, गैस मूल्य में संशोधन ऐसा मुद्दा है जिस पर ध्यान देने की जरुरत है. इस पर निर्णय 1 जुलाई से पहले लेना है. मंत्रालय ने इससे पहले 21 अप्रैल को रिलायंस इंडस्टरीज को बताया था कि नई दरों की घोषणा 1 जुलाई तक की जाएगी.

रिलायंस इंडस्टरीज को कृष्णा गोदावरी बेसिन की केजी-डी6 परियोजना की गैस को अभी पुरानी 4.2 डालर प्रति इकाई की दर पर बेचना पड़ रहा है जबकि इस दर का अनुबंध समाप्त हो गया है. सूत्र ने कहा, हमने रिलायंस इंडस्टरीज से कहा है कि संशोधित गैस कीमत को लागू करने की जल्दी से जल्दी की तारीख 1 जुलाई है और ऐसे में हमें उससे पहले नई कीमतों की घोषणा करनी है.

रंगराजन फार्मूला पर स्पष्टता के बाद ही मंत्रालय नई दरों की घोषणा करेगा. इससे गैस के दाम दोगुना हो जाएंगे. सूत्र ने कहा, संभवत: हमें कैबिनेट में जाना होगा. हमारे पास इस मुद्दे पर स्थिति अगले सप्ताह संभवत: मंगलवार तक अधिक स्पष्ट होगी.

मंत्रालय तेल एवं गैस मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष अगले कुछ दिनों में प्रस्तुतीकरण दे सकता है. इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गैस मूल्यवृद्धि पर किस तरीके से आगे बढ़ना है. उस सूत्र ने कहा, इस प्रस्तुतिकरण में निर्णय के लिए लंबित मुद्दों में गैस मूल्य का मुद्दा शीर्ष पर है. यदि प्रधानमंत्री रंगराजन फार्मूला के आधार पर ही नई दरों को सहमति दे देते हैं, तो इसकी घोषणा कर दी जाएगी. पूर्ववर्ती सरकार ने पिछले साल दिसंबर में इसे मंजूरी दी थी.

यदि ऐसा लगता है कि फार्मूला में कुछ समायोजन की जरुरत है या फिर सरकार बिजली व उर्वरक क्षेत्र के उपभोक्ताओं के हितों का संरक्षण करना चाहती है, तो कैबिनेट में इस पर विचार विमर्श हो सकता है. भाजपा ने सत्ता में आने से पहले कहा था कि यदि वह सरकारी बनाती है तो इस फार्मूला की समीक्षा करेगी.

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